28 अगस्त 2026
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डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी: ईडी ने ₹51.75 करोड़ की बैंक जमा फ्रीज की, ₹34,615 करोड़ के घोटाले में बड़ी कार्रवाई

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डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी: ईडी ने ₹51.75 करोड़ की बैंक जमा फ्रीज की, ₹34,615 करोड़ के घोटाले में बड़ी कार्रवाई

सारांश

ईडी ने डीएचएफएल के ₹34,615 करोड़ के बैंक घोटाले में ₹51.75 करोड़ की जमा फ्रीज की — ब्रिटेन की संपत्ति 'हर्टमोर हाउस' की बिक्री से जुड़े कथित कृत्रिम लेनदेन और विदेशी खातों में धन प्रवाह की जांच के बाद। यह देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक की जांच का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

ईडी ने डीएचएफएल से जुड़े ₹34,615 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में ₹51.75 करोड़ (लगभग 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर ) की बैंक जमा राशि फ्रीज की।
फ्रीजिंग पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत 19 अगस्त 2026 को हुई तलाशी के बाद की गई।
ब्रिटेन स्थित संपत्ति हर्टमोर हाउस — वनीता वधावन के नाम पर — को कथित तौर पर कृत्रिम ऋण समझौते के ज़रिए बेचा गया।
बिक्री की राशि अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के भारत स्थित खाते में भेजी गई, न कि वास्तविक मालिक के खाते में।
सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, 17 बैंकों के कंसोर्टियम को ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ; कुल स्वीकृत ऋण ₹42,871.42 करोड़ था।
जांच में धन प्रवाह, विदेशी संपत्तियों और संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत पड़ताल जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और उसके प्रमोटरों से जुड़े ₹34,615 करोड़ के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में ₹51.75 करोड़ की बैंक जमा राशि फ्रीज कर दी है। एजेंसी के अनुसार, यह राशि अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से संबंधित है, जिसका पता मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान चला।

कार्रवाई का आधार और तलाशी अभियान

ईडी द्वारा 28 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 19 अगस्त को किए गए तलाशी अभियान के बाद की गई। तलाशी के दौरान अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते की जांच की गई, जिसमें कथित तौर पर लगभग 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब ₹51.75 करोड़ जमा पाए गए। एजेंसी ने इस राशि को पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज किया है। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं।

ब्रिटेन की संपत्ति और कृत्रिम लेनदेन का जाल

जांच में सामने आया कि ब्रिटेन में स्थित हर्टमोर हाउस नामक संपत्ति, जो कपिल वधावन की पत्नी वनीता वधावन के नाम पर थी, को कथित तौर पर जटिल वित्तीय लेनदेन और कृत्रिम देनदारी खड़ी कर बेच दिया गया। ईडी के अनुसार, अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई और वनीता वधावन के बीच एक कथित ऋण समझौता तैयार किया गया था, जिसके आधार पर ब्रिटेन स्थित संपत्ति को गिरवी रखा गया।

एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी संपत्ति पर कानूनी बोझ दिखाकर डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी देनदारियों का निपटान करना था। जांच के अनुसार, वर्ष 2026 में इस संपत्ति को बेचा गया, लेकिन बिक्री से प्राप्त राशि वनीता वधावन के खाते में न जाकर अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के भारत स्थित बैंक खाते में भेजी गई।

मूल मामला: सीबीआई की प्राथमिकी और बैंक कंसोर्टियम

यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम की ओर से दर्ज कराई थी। सीबीआई के अनुसार, बैंकों के इस समूह ने डीएचएफएल को कुल ₹42,871.42 करोड़ की ऋण सुविधाएं मंजूर की थीं। प्राथमिकी में आरोप है कि कपिल वधावन, धीरज वधावन और अन्य आरोपियों ने मिलकर कंपनी के खातों में हेरफेर कर ऋण राशि का दुरुपयोग और गबन किया, जिससे बैंकों को लगभग ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ।

आगे की जांच और व्यापक संदर्भ

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और धन के प्रवाह, विदेशी संपत्तियों तथा संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। गौरतलब है कि डीएचएफएल मामला देश के सबसे बड़े बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वित्तीय संस्थाओं में एनपीए (अनर्जक परिसंपत्तियों) के प्रबंधन और ऋण वसूली पर नियामक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ईडी की यह कार्रवाई संकेत देती है कि जांच एजेंसियां अब विदेशी संपत्तियों और जटिल वित्तीय संरचनाओं तक भी अपनी पहुंच बना रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ₹51.75 करोड़ की फ्रीजिंग ₹34,615 करोड़ के कुल नुकसान के सामने महज एक अंश है — यह सवाल उठाता है कि बाकी धन की वसूली कहाँ तक पहुंची है। विदेशी संपत्तियों तक जांच का विस्तार सराहनीय है, परंतु 'हर्टमोर हाउस' जैसे जटिल अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की परतें उखाड़ने में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। यह मामला यह भी रेखांकित करता है कि बड़े कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं पर बैंकों की 'ड्यू डिलिजेंस' कितनी कमज़ोर थी — एक प्रणालीगत विफलता जो अकेले ईडी की कार्रवाई से नहीं सुधरेगी।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने डीएचएफएल मामले में क्या कार्रवाई की है?
प्रवर्तन निदेशालय ने डीएचएफएल और उसके प्रमोटरों से जुड़े ₹34,615 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी मामले में ₹51.75 करोड़ (लगभग 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर) की बैंक जमा राशि पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज की है। यह कार्रवाई 19 अगस्त 2026 को हुई तलाशी के बाद की गई।
डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी मामला क्या है?
सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, कपिल वधावन, धीरज वधावन और अन्य आरोपियों ने 17 बैंकों के कंसोर्टियम से ₹42,871.42 करोड़ की ऋण सुविधाएं लेकर खातों में हेरफेर कर गबन किया, जिससे बैंकों को ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कंसोर्टियम की ओर से यह शिकायत दर्ज कराई थी।
हर्टमोर हाउस और अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई का इस मामले से क्या संबंध है?
ईडी के अनुसार, ब्रिटेन स्थित संपत्ति हर्टमोर हाउस वनीता वधावन के नाम पर थी और इसे अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के साथ कथित कृत्रिम ऋण समझौते के आधार पर गिरवी रखकर बेचा गया। बिक्री की राशि वनीता वधावन के खाते में न जाकर अल जालोर के भारत स्थित बैंक खाते में भेजी गई, जिसे एजेंसी अपराध से अर्जित धन को खपाने की सुनियोजित प्रक्रिया मानती है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और धन के प्रवाह, विदेशी संपत्तियों तथा संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। तलाशी में जब्त दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई संभव है।
इस मामले में कौन-से बैंक प्रभावित हुए हैं?
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई में 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम ने डीएचएफएल को ₹42,871.42 करोड़ की ऋण सुविधाएं दी थीं। सीबीआई के अनुसार, इन बैंकों को कुल मिलाकर लगभग ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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