डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी: ईडी ने ₹51.75 करोड़ की बैंक जमा फ्रीज की, ₹34,615 करोड़ के घोटाले में बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और उसके प्रमोटरों से जुड़े ₹34,615 करोड़ के बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में ₹51.75 करोड़ की बैंक जमा राशि फ्रीज कर दी है। एजेंसी के अनुसार, यह राशि अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) से संबंधित है, जिसका पता मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान चला।
कार्रवाई का आधार और तलाशी अभियान
ईडी द्वारा 28 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 19 अगस्त को किए गए तलाशी अभियान के बाद की गई। तलाशी के दौरान अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के बैंक खाते की जांच की गई, जिसमें कथित तौर पर लगभग 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब ₹51.75 करोड़ जमा पाए गए। एजेंसी ने इस राशि को पीएमएलए की धारा 17(1ए) के तहत फ्रीज किया है। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं।
ब्रिटेन की संपत्ति और कृत्रिम लेनदेन का जाल
जांच में सामने आया कि ब्रिटेन में स्थित हर्टमोर हाउस नामक संपत्ति, जो कपिल वधावन की पत्नी वनीता वधावन के नाम पर थी, को कथित तौर पर जटिल वित्तीय लेनदेन और कृत्रिम देनदारी खड़ी कर बेच दिया गया। ईडी के अनुसार, अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई और वनीता वधावन के बीच एक कथित ऋण समझौता तैयार किया गया था, जिसके आधार पर ब्रिटेन स्थित संपत्ति को गिरवी रखा गया।
एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य विदेशी संपत्ति पर कानूनी बोझ दिखाकर डीएचएफएल बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी देनदारियों का निपटान करना था। जांच के अनुसार, वर्ष 2026 में इस संपत्ति को बेचा गया, लेकिन बिक्री से प्राप्त राशि वनीता वधावन के खाते में न जाकर अल जालोर ट्रेडिंग एफजेडई के भारत स्थित बैंक खाते में भेजी गई।
मूल मामला: सीबीआई की प्राथमिकी और बैंक कंसोर्टियम
यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जो यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 17 बैंकों के एक कंसोर्टियम की ओर से दर्ज कराई थी। सीबीआई के अनुसार, बैंकों के इस समूह ने डीएचएफएल को कुल ₹42,871.42 करोड़ की ऋण सुविधाएं मंजूर की थीं। प्राथमिकी में आरोप है कि कपिल वधावन, धीरज वधावन और अन्य आरोपियों ने मिलकर कंपनी के खातों में हेरफेर कर ऋण राशि का दुरुपयोग और गबन किया, जिससे बैंकों को लगभग ₹34,615 करोड़ का नुकसान हुआ।
आगे की जांच और व्यापक संदर्भ
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और धन के प्रवाह, विदेशी संपत्तियों तथा संबंधित संस्थाओं की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। गौरतलब है कि डीएचएफएल मामला देश के सबसे बड़े बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वित्तीय संस्थाओं में एनपीए (अनर्जक परिसंपत्तियों) के प्रबंधन और ऋण वसूली पर नियामक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ईडी की यह कार्रवाई संकेत देती है कि जांच एजेंसियां अब विदेशी संपत्तियों और जटिल वित्तीय संरचनाओं तक भी अपनी पहुंच बना रही हैं।