10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ईडी का चिटफंड घोटाले पर शिकंजा: विशाखापत्तनम-हैदराबाद में 5 जगह छापे, ₹1.01 करोड़ नकद व 182 बैंक खाते फ्रीज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ईडी का चिटफंड घोटाले पर शिकंजा: विशाखापत्तनम-हैदराबाद में 5 जगह छापे, ₹1.01 करोड़ नकद व 182 बैंक खाते फ्रीज

सारांश

ईडी ने ₹2,000 करोड़ से अधिक के कथित चिटफंड घोटाले में विशाखापत्तनम और हैदराबाद में एक साथ 5 ठिकानों पर छापे मारे। WBEPL के निदेशकों के 182 बैंक खाते फ्रीज, ₹1.01 करोड़ नकद व 6 लग्जरी गाड़ियाँ जब्त। ओडिशा समेत 6 राज्यों के हजारों निवेशक प्रभावित।

मुख्य बातें

ईडी ने 5 अगस्त 2026 को विशाखापत्तनम और हैदराबाद में 5 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे।
तलाशी में ₹1.01 करोड़ नकद , संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए।
WBEPL और उसके निदेशकों के 182 बैंक खाते और 6 लग्जरी वाहन फ्रीज।
कंपनी पर ₹2,000 करोड़ से अधिक की अवैध जमा राशि जुटाने का आरोप है।
ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के हजारों निवेशक प्रभावित।
जांच CBI, SFIO, ओडिशा पुलिस और अन्य एजेंसियों की चार्जशीट के आधार पर शुरू हुई थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भुवनेश्वर जोनल ऑफिस ने 5 अगस्त 2026 को विशाखापत्तनम और हैदराबाद में वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (WBEPL) तथा उसके निदेशकों से जुड़े 5 आवासीय और व्यावसायिक ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की गई इस कार्रवाई में ₹1.01 करोड़ नकद बरामद हुए और कंपनी के 182 बैंक खाते तथा 6 लग्जरी वाहन फ्रीज किए गए।

मुख्य घटनाक्रम

तलाशी के दौरान ईडी ने WBEPL, उसके निदेशकों मल्ला विजया प्रसाद और वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अल्ला तथा संबंधित संस्थाओं से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए। इनमें संपत्ति के कागजात और कई डिजिटल डिवाइस शामिल हैं। साथ ही चल व अचल संपत्तियों का विवरण भी बरामद किया गया।

ईडी ने 10 अगस्त को जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया कि यह अभियान ₹2,000 करोड़ से अधिक के कथित चिटफंड घोटाले की व्यापक जांच का हिस्सा है।

घोटाले की कार्यप्रणाली

जांच में सामने आया है कि WBEPL के निदेशकों और प्रबंध निदेशक ने रियल एस्टेट कारोबार की आड़ में अवैध जमा राशि संग्रह की एक सुनियोजित योजना चलाई। कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए जनता से ₹2,000 करोड़ से अधिक की धनराशि जमा की गई।

जांचकर्ताओं के अनुसार, कंपनी पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए नए निवेशकों की रकम का इस्तेमाल करती थी — जो एक क्लासिक पोंजी संरचना है। इसके अलावा निवेशकों के पैसे को असंबंधित कामों और निजी लाभ के लिए उपयोग किया गया, वित्तीय विवरणों में हेरफेर कर जमा राशि छिपाई गई, और भूमि के अनियमित लेनदेन के जरिए असली कीमत को दबाया गया।

कितने राज्यों के निवेशक प्रभावित

ईडी की जांच से अब तक यह स्पष्ट हुआ है कि ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों के हजारों निवेशकों से अलग-अलग स्कीमों के जरिए धन जुटाया गया। कंपनी ने विशाखापत्तनम में जमीन देने का वादा किया था, लेकिन बाद में अपनी शाखाओं से कामकाज बंद कर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।

जांच का आधार

ईडी ने यह जांच कई एफआईआर और उसके बाद इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (भुवनेश्वर), सीबीआई, एसीबी (धनबाद), ओडिशा पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) की शिकायत के आधार पर शुरू की। ये सभी शिकायतें WBEPL और उसके निदेशकों के विरुद्ध थीं।

आगे की जांच

ईडी के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्रीय एजेंसियाँ देशभर में चिटफंड और पोंजी योजनाओं के खिलाफ अपना शिकंजा कसती जा रही हैं। गौरतलब है कि बहु-राज्यीय चिटफंड घोटालों में ईडी की यह कार्रवाई उस श्रृंखला की एक और कड़ी है, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में सारदा, रोज़ वैली और अन्य मामलों में भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ से अधिक की राशि और छह राज्यों में फैला नेटवर्क यह सवाल खड़ा करता है कि राज्य-स्तरीय एजेंसियाँ इतने लंबे समय तक मूकदर्शक क्यों रहीं। ईडी की कार्रवाई देर से आई है — लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या फ्रीज की गई संपत्तियाँ वास्तव में पीड़ित निवेशकों तक पहुँचती हैं, जो अक्सर इन मामलों में सबसे लंबा इंतजार करते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने WBEPL के खिलाफ यह कार्रवाई क्यों की?
ईडी ने PMLA, 2002 की धारा 17 के तहत यह कार्रवाई ₹2,000 करोड़ से अधिक के कथित चिटफंड घोटाले की जांच के तहत की। कंपनी पर आरोप है कि उसने रियल एस्टेट की आड़ में जनता से अवैध रूप से धन जुटाया और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की।
WBEPL घोटाले में किन-किन राज्यों के निवेशक प्रभावित हुए हैं?
जांच के अनुसार ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों के हजारों निवेशक प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने विशाखापत्तनम में जमीन देने का वादा कर निवेशकों को आकर्षित किया था।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद और जब्त किया गया?
तलाशी में ₹1.01 करोड़ नकद, संपत्ति के कागजात और कई डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए। इसके अलावा WBEPL और उसके निदेशकों के 182 बैंक खाते और 6 लग्जरी वाहन फ्रीज किए गए।
WBEPL के खिलाफ जांच कब और कैसे शुरू हुई?
ईडी ने यह जांच CBI, SFIO, ओडिशा पुलिस, इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (भुवनेश्वर) और ACB (धनबाद) द्वारा दायर एफआईआर व चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी। ये सभी शिकायतें WBEPL और उसके निदेशकों के विरुद्ध थीं।
क्या इस मामले में आगे और कार्रवाई होगी?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है। फ्रीज की गई संपत्तियों और बरामद दस्तावेजों की जाँच के बाद और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की भी संभव है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले