केरल अंग तस्करी: ईडी ने 9 ठिकानों पर छापे मारे, बैंक खाते फ्रीज, दस्तावेज जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 जून 2026 को केरल में अवैध अंग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 9 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जिसमें फर्जी दस्तावेज, प्रत्यारोपण रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम सबूत जब्त किए गए। एर्नाकुलम के अस्पतालों में हुए अवैध अंग प्रत्यारोपण और उससे जुड़े आर्थिक अपराध इस जांच के केंद्र में हैं।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी के कोच्चि जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई केरल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की। पुलिस जांच में पहले ही एक संगठित आपराधिक गिरोह का खुलासा हो चुका था, जो फर्जी दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और अवैध अंग तस्करी में सक्रिय था। यह गिरोह कथित तौर पर परोपकारी अंगदान और मेडिकल टूरिज्म की आड़ में अपना काला कारोबार चला रहा था।
छापेमारी के दौरान आरोपियों और उनसे जुड़े बिचौलियों के बैंक खातों को फ्रीज करने के आदेश जारी किए गए। अपराध से अर्जित धन के उपयोग और अंतिम लाभार्थियों की पहचान के लिए वित्तीय लेनदेन की गहन जांच जारी है।
आरोपी और रैकेट का तरीका
प्रारंभिक जांच के अनुसार, मोहम्मद नजीब के और उनकी सहयोगी रशीदा ए.ए. ने अपनी कंपनी कल्लाथारस मेडिकल टूरिज्म प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से 2021 से 2026 के बीच इस रैकेट को संचालित किया। एजेंटों और बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाया जाता था।
ईडी के अनुसार, अंगदाताओं को ₹5 लाख से ₹15 लाख तक का लालच दिया जाता था, जबकि अंग प्राप्त करने वालों से ₹20 लाख से ₹35 लाख या उससे अधिक राशि वसूली जाती थी। यह मूल्य अंतर ही इस आपराधिक नेटवर्क की कमाई का मुख्य स्रोत था।
फर्जी दस्तावेज और अस्पतालों की भूमिका
आरोपियों ने पुलिस के फर्जी प्रमाणपत्र, जनप्रतिनिधियों के सिफारिश पत्र, आधार कार्ड और राशन कार्ड सहित कई नकली दस्तावेज तैयार किए। ये दस्तावेज एर्नाकुलम के पल्लीक्करा स्थित सन कम्युनिकेशंस डीटीपी सेंटर और साइन एचडी डिजिटल स्टूडियो में बनाए जाते थे। इन्हीं फर्जी कागजों के आधार पर एर्नाकुलम के बड़े अस्पतालों में अवैध अंग प्रत्यारोपण कराए जाते थे।
गौरतलब है कि जिला स्तरीय प्राधिकरण समिति से मंजूरी के लिए जमा किए गए दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि रैकेट ने संस्थागत प्रक्रियाओं को भी धोखे से भेदा।
जब्त सबूत और संपत्तियों की जांच
छापेमारी में जब्त किए गए दस्तावेजों में फर्जी कागजात, अस्पतालों के प्रत्यारोपण रिकॉर्ड, दाताओं और प्राप्तकर्ताओं का विवरण तथा प्राधिकरण समिति को सौंपे गए आवेदन शामिल हैं। ईडी आरोपियों और उनके सहयोगियों के नाम पर दर्ज अचल संपत्तियों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अपराध की कमाई से कौन-सी संपत्तियाँ खरीदी गईं।
आगे की कार्रवाई
यह मामला केवल अंग तस्करी तक सीमित नहीं है — ईडी की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग के उन रास्तों को खंगाल रही है जिनसे इस नेटवर्क की अवैध कमाई को वैध बनाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अंग प्रत्यारोपण की निगरानी व्यवस्था पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। जांच के आगे बढ़ने के साथ और गिरफ्तारियों और संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।