केरल अंग तस्करी नेटवर्क: ईडी ने कोच्चि समेत 5 ठिकानों पर छापेमारी, नकली दस्तावेज़ों का भंडाफोड़
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 जून 2026 को केरल में कथित अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कोच्चि के निजी अस्पतालों और संदिग्ध बिचौलियों के आवासों सहित पाँच स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज इस मामले में एजेंसी अंग प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं से जुड़े कथित अवैध वित्तीय लेन-देन की जाँच कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी की टीमें गुरुवार सुबह कोच्चि के एक कॉर्पोरेट अस्पताल और राज्य के अन्य ठिकानों पर एक साथ पहुँचीं। कोल्लम में एजेंसी ने एक महिला के घर पर छापा मारा, जिस पर इस रैकेट में बिचौलिए की भूमिका निभाने का संदेह है। इसके अलावा कासरगोड निवासी एक व्यक्ति के आवास की भी तलाशी ली गई, जिसे पिछले महीने उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
जाँच का दायरा और मनी ट्रेल
जाँच के दौरान ईडी ने वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज़, इनवॉइस और अन्य कागज़ात ज़ब्त किए हैं। एजेंसी को कथित तौर पर यह पता चला है कि यह नेटवर्क अंग दाता और प्राप्तकर्ता को जोड़ता था तथा प्रारंभिक चिकित्सा जाँच में सहायता करता था — और इस पूरी प्रक्रिया में भारी कमीशन वसूला जाता था।
एजेंसी यह जाँच कर रही है कि क्या इन लेन-देन से प्राप्त धनराशि आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में स्थानांतरित की गई। अधिकारियों के अनुसार, अंग प्रत्यारोपण की प्रत्येक प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में कमीशन लिए जाने के संकेत मिले हैं।
नकली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल
जाँच का एक अहम पहलू कथित रूप से तैयार किए गए फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों से जुड़ा है। ईडी उन दावों की पड़ताल कर रही है जिनके अनुसार अस्पताल के नकली लेटरहेड, पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट और जनप्रतिनिधियों व वरिष्ठ अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर वाले सिफारिश पत्र बनाए और उपयोग किए गए।
गौरतलब है कि अंग प्रत्यारोपण एक अत्यंत नियंत्रित चिकित्सा प्रक्रिया है और इसके लिए कड़ी सत्यापन प्रक्रिया से गुज़रना अनिवार्य होता है। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर इन फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों ने किस तरह उस सत्यापन प्रक्रिया को दरकिनार किया।
कानूनी आधार
ईडी ने यह मामला पीएमएलए के तहत उन आरोपों के आधार पर दर्ज किया है जिनमें कहा गया है कि अंग तस्करी नेटवर्क ने प्रत्यारोपण से जुड़े वित्तीय लेन-देन के ज़रिए अवैध कमाई की। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अंग प्रत्यारोपण के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को लेकर स्वास्थ्य नियामक संस्थाएँ पहले से सतर्क हैं।
आगे क्या होगा
ज़ब्त किए गए दस्तावेज़ों और डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत फोरेंसिक जाँच जारी है। यदि मनी ट्रेल की पुष्टि होती है, तो और गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई संभव है। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की भी जाँच की जा रही है।