18 सितंबर 2026
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भारत-दक्षिण कोरिया संबंध 21वीं सदी के सबसे उम्मीदवार रिश्तों में: राजदूत ली सियोंग-हो

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भारत-दक्षिण कोरिया संबंध 21वीं सदी के सबसे उम्मीदवार रिश्तों में: राजदूत ली सियोंग-हो

सारांश

दक्षिण कोरिया के राजदूत ली सियोंग-हो ने नई दिल्ली में पहले 'कोरियन एजुकेशन फेयर' के मौके पर कहा कि भारत-कोरिया संबंध 21वीं सदी के सबसे उम्मीद भरे रिश्तों में से एक हैं — राजनीतिक से लेकर शैक्षणिक तक हर स्तर पर दोनों देश करीब आ रहे हैं।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरियाई राजदूत ली सियोंग-हो ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत-कोरिया संबंधों को 21वीं सदी के सबसे उम्मीद भरे रिश्तों में से एक बताया।
भारत में पहला 'कोरियन एजुकेशन फेयर' आयोजित हुआ; राजदूत ने इसे दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर कहा।
राजदूत ने PM नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के जन-सेवा सफर की सराहना की और उन्हें 'महान नेता' बताया।
दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, औद्योगिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है।
भविष्य में और बड़े शिक्षा आदान-प्रदान कार्यक्रमों की योजना है।

भारत में दक्षिण कोरिया के राजदूत ली सियोंग-हो ने 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'कोरियन एजुकेशन फेयर' के मौके पर कहा कि भारत-दक्षिण कोरिया संबंध 21वीं सदी के सबसे उम्मीद भरे द्विपक्षीय रिश्तों में से एक हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के जन-सेवा सफर की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों के संबंध नई ऊँचाइयों पर पहुँचे हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल

राजदूत ली सियोंग-हो ने भारत में आयोजित इस पहले 'कोरियन एजुकेशन फेयर' को दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा, 'हम वास्तव में कोरिया और भारत को जोड़ने वाले मजबूत पुल बना रहे हैं। छात्र ही वे लोग हैं, जो आगे चलकर हमारी साझेदारी और दोस्ती को और मजबूत करेंगे।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शिक्षा मेला केवल एक शुरुआत है और भविष्य में इसे और बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। उनके अनुसार, 'यह पहला एजुकेशन फेयर है, लेकिन निश्चित रूप से आखिरी नहीं। हम दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में इस जुड़ाव को लगातार मजबूत और विस्तृत करते रहेंगे।'

पीएम मोदी की भूमिका की सराहना

राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'महान नेता' बताते हुए कहा कि पूरी दुनिया उनका सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि मोदी दोनों देशों के रिश्तों को और करीब लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं और कोरियाई पक्ष को उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।

गौरतलब है कि यह कूटनीतिक सराहना ऐसे समय में आई है जब भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग लगातार गहरा हो रहा है।

बहुआयामी साझेदारी की राह

राजदूत ली सियोंग-हो ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध राजनीतिक, आर्थिक, औद्योगिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक — हर स्तर पर तेज़ी से प्रगाढ़ हो रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि यह 21वीं सदी के सबसे उम्मीद भरे रिश्तों में से एक है। हर स्तर पर हम एक-दूसरे के बहुत ज़्यादा करीब आ रहे हैं।'

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मज़बूत कर रहा है और दक्षिण कोरिया एक विश्वसनीय तकनीकी व औद्योगिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।

आगे की दिशा

'कोरियन एजुकेशन फेयर' की यह शुरुआत दोनों देशों के बीच पीपल-टू-पीपल कनेक्ट को नई दिशा देती है। आने वाले समय में शिक्षा आदान-प्रदान कार्यक्रमों के और विस्तार की उम्मीद है, जो दोनों देशों की युवा पीढ़ियों को एक-दूसरे के करीब लाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि पीपल-टू-पीपल संपर्क दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों की सबसे मज़बूत नींव होती है। हालाँकि, सराहना के शब्दों से परे, असली कसौटी यह होगी कि दोनों देश व्यापार घाटे, सेमीकंडक्टर सहयोग और रक्षा तकनीक हस्तांतरण जैसे ठोस मुद्दों पर कितनी तेज़ी से आगे बढ़ते हैं। युवा पीढ़ी को जोड़ने की यह पहल सही दिशा में है, लेकिन इसे नीतिगत ढाँचे के साथ जोड़ना होगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-दक्षिण कोरिया संबंधों को 21वीं सदी का सबसे उम्मीद भरा रिश्ता क्यों कहा गया?
दक्षिण कोरियाई राजदूत ली सियोंग-हो के अनुसार, दोनों देश राजनीतिक, आर्थिक, औद्योगिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक — हर स्तर पर तेज़ी से एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और कोरिया की तकनीकी शक्ति के संयोग से और भी महत्त्वपूर्ण हो गई है।
'कोरियन एजुकेशन फेयर' क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह भारत में आयोजित पहला 'कोरियन एजुकेशन फेयर' है, जिसका उद्देश्य भारतीय और कोरियाई छात्रों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। राजदूत ने इसे दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों की नींव बताया और कहा कि यह पहला फेयर है, आखिरी नहीं।
राजदूत ली सियोंग-हो ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
राजदूत ली सियोंग-हो ने PM नरेंद्र मोदी को 'महान नेता' बताते हुए कहा कि पूरी दुनिया उनका सम्मान करती है और उनके 25 वर्षों के जन-सेवा सफर की सराहना की। उन्होंने कहा कि मोदी दोनों देशों के रिश्तों को और करीब लाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है?
राजदूत के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, औद्योगिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है। शिक्षा मेले के ज़रिये पीपल-टू-पीपल संपर्क को और मज़बूती दी जा रही है।
भविष्य में भारत-कोरिया शैक्षणिक सहयोग की क्या योजना है?
राजदूत ली सियोंग-हो ने संकेत दिया कि 'कोरियन एजुकेशन फेयर' को आगे और बड़े पैमाने पर आयोजित किया जाएगा। दोनों देश छात्रों के माध्यम से द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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