तेजस्वी यादव का BJP और चुनाव आयोग पर तंज: 'TMC का नाम और चुनाव चिह्न भी लूटा'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 18 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के विधायक-सांसद तोड़ने के बाद अब पार्टियों के नाम, चुनाव चिह्न और बैंक खाते भी छीने जा रहे हैं। यह बयान चुनाव आयोग द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न 'फूल और घास' को आगामी उपचुनावों के लिए फ्रीज किए जाने की पृष्ठभूमि में आया है।
तेजस्वी यादव का एक्स पर हमला
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि संविधान, लोकलाज और लोकतांत्रिक मूल्यों को तार-तार करते हुए भाजपा ने संवैधानिक संस्थाओं के 'अटूट सहयोग एवं समर्थन से' पहले विपक्षी दलों के विधायक-सांसद तोड़े, फिर मुख्यमंत्री सहित सरकारें भी 'चुराईं'।
उन्होंने आगे लिखा कि 'इनकी लोकतांत्रिक चोरी और डकैती की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि अब विपक्षी पार्टियों के नाम, चुनाव चिह्न और बैंक खातों को भी लूट रहे हैं।' तेजस्वी ने शिवसेना, एनसीपी और एलजेपी के बाद अब TMC के साथ हुई कार्रवाई को एक ही पैटर्न का हिस्सा बताते हुए कहा, 'लोकतंत्र के रक्षक ही अब भक्षक की भूमिका में हैं।'
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी एक्स पर पोस्ट कर इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि 'पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस — हर बार एक ही पैटर्न, भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं, फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है।'
राहुल गांधी ने कहा कि 'जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।' उन्होंने इसे लोकतांत्रिक पतन का प्रतीक बताया — 'वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी।'
चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि ECI की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन 'उल्टा वह उन ताकतों की मदद कर रहा है जो जनता के फैसले को पलट देते हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर राजनीतिक दल और हर उस मतदाता की है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना और एनसीपी के विवादों में भी चुनाव आयोग के निर्णयों पर विपक्ष ने इसी तरह के सवाल उठाए थे।
TMC चुनाव चिह्न विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों के मद्देनजर TMC के नाम और उसके पारंपरिक चिह्न 'फूल और घास' को फ्रीज करने का निर्णय लिया। विपक्षी दलों का कहना है कि यह कदम एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पहले किसी पार्टी में फूट डाली जाती है और फिर मूल पार्टी को उसके चुनाव चिह्न से वंचित कर दिया जाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब आगामी उपचुनावों को लेकर राजनीतिक गर्मी बढ़ रही है और विपक्षी एकजुटता की परीक्षा होनी है। BJP की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।