तेल संकट में पाकिस्तान का बड़ा फैसला: सरकारी वाहनों का ईंधन कोटा कटा, मोटरसाइकिल मालिकों को ₹100/लीटर सब्सिडी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान सरकार ने 18 सितंबर 2026 को सरकारी खर्च में कटौती के उपायों के एक नए दौर की घोषणा की, जिसमें सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में कटौती प्रमुख है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति बाधित होने के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह इस साल खर्च में कटौती की दूसरी आधिकारिक घोषणा है।
नए उपायों में क्या-क्या शामिल
रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार के नए निर्देशों में सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन में कटौती, सरकारी संस्थाओं द्वारा नए वाहनों की खरीद पर पाबंदी, और अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर प्रतिबंध शामिल हैं। इसके अलावा आधिकारिक रात्रिभोज पर रोक, आईटी उपकरणों को छोड़कर सरकारी संस्थाओं द्वारा टिकाऊ वस्तुओं की खरीद पर रोक, और बैठकों के लिए टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के उपयोग का निर्देश भी जारी किया गया है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने इस साल मार्च में भी ऊर्जा बचत के लिए दो सप्ताह के लिए स्कूल बंद किए थे, सभी सरकारी विभागों में ईंधन उपयोग घटाया था और कंपनियों से अधिक कर्मचारियों को घर से काम करने देने का आग्रह किया था।
आम नागरिकों को राहत: ईंधन सब्सिडी लागू
बढ़ती कीमतों के बोझ को कम करने के लिए पाकिस्तान ने बुधवार से मोटरसाइकिल, रिक्शा और छोटी कारों के मालिकों को प्रति लीटर 100 पाकिस्तानी रुपए की ईंधन सब्सिडी लागू की है। यह सब्सिडी प्रति माह तय सीमा तक की गई खरीद पर ही लागू होगी। यह कदम उन निम्न और मध्यम वर्गीय नागरिकों को लक्षित राहत देने का प्रयास माना जा रहा है, जो रोज़मर्रा के आवागमन के लिए दोपहिया वाहनों और छोटी गाड़ियों पर निर्भर हैं।
होर्मुज संकट और तेल आपूर्ति में बाधा
इज़रायल और अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्र पर संयुक्त हमले किए जाने के बाद 28 फरवरी को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी, जिसके बाद पाकिस्तान को खाड़ी देशों से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित हो गई। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने कथित तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से 'अवैध' तरीके से गुजरने की कोशिश करने वाले एक तेल टैंकर पर हमला कर उसे रोकने की जानकारी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है, ऐसे में इस तनाव का असर पाकिस्तान जैसे तेल आयातक देशों पर सीधे पड़ा है।
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और पृष्ठभूमि
ईरान संकट और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से कर्ज चुकाने की माँग ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ा दिया है। देश का कर्ज-जीडीपी अनुपात करीब 70 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि निर्यात की हिस्सेदारी 1990 के दशक में GDP के लगभग 16 प्रतिशत से घटकर 2024 में करीब 10.4 प्रतिशत रह गई है। आलोचकों का कहना है कि सरकार के बढ़ते रक्षा खर्च ने स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित कर दिए हैं — जो दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक माने जाते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम के तहत राजकोषीय सुधारों के दबाव में है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाहरी तेल संकट और घरेलू राजकोषीय तनाव का यह संयोग पाकिस्तान के लिए एक जटिल आर्थिक चुनौती खड़ी कर रहा है।
आगे की राह
इन उपायों की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि होर्मुज पर तनाव कितने समय तक बना रहता है और पाकिस्तान वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत कितनी तेजी से सुरक्षित कर पाता है। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जारी अस्थिरता के बीच पाकिस्तान के लिए नीतिगत लचीलापन बनाए रखना अगले महीनों में सबसे बड़ी परीक्षा होगी।