पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील, सुधारों की आवश्यकता: विशेषज्ञों की चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- आयातित ईंधन पर निर्भरता
- कमजोर विदेशी वित्तीय स्थिति
- सरकारी खर्च की सीमित क्षमता
- जल्द आर्थिक सुधार की आवश्यकता
- ऊर्जा की मांग को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आयातित ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता, कमजोर विदेशी वित्तीय स्थिति और सरकारी खर्च की सीमित क्षमता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अभी भी वैश्विक झटकों के प्रति बहुत कमजोर बनी हुई है। यदि शीघ्र ही बड़े आर्थिक सुधार नहीं किए गए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा हाई-ऑक्टेन ईंधन पर पेट्रोलियम शुल्क बढ़ाने का निर्णय कुछ हद तक सही माना जा रहा है, क्योंकि यह महंगी और लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल करने वालों पर लागू होता है। इससे सरकार हर महीने लगभग ९ अरब रुपए जुटा रही है, जिसका उपयोग आम जनता को बढ़ती तेल कीमतों से बचाने के लिए किया जा रहा है।
हालांकि, यह कदम केवल अस्थायी राहत प्रदान करता है, विशेषकर वर्तमान में जब वैश्विक तेल कीमतें भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्रभावित हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह निर्णय अर्थव्यवस्था की जटिल समस्याओं को हल नहीं करता।
इन समस्याओं में आयातित ईंधन पर निर्भरता, कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति और सीमित वित्तीय संसाधन शामिल हैं। यही कारण है कि देश की अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील बनी हुई है और बिना सुधार के, स्थिति और खराब हो सकती है।
वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने भी इस स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि 'उम्मीद कोई रणनीति नहीं होती', खासकर जब मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह संघर्ष कम हो जाए, लेकिन इसका प्रभाव सप्लाई चेन, उत्पादन और व्यापार मार्गों पर बना रह सकता है, जिससे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
सरकार के पिछले कदम, जैसे ईंधन भत्ते में कटौती और आंशिक वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था, भी उतने प्रभावी नहीं माने जा रहे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा की मांग को नियंत्रित करने के लिए और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। जैसे कि बाजार, रेस्तरां और व्यापारिक संस्थानों को समय से पहले बंद करना, ऐसे कदम जिनका राजनीतिक कारणों से टाला गया है, उन्हें अब स्थायी नीति के रूप में लागू करने की आवश्यकता हो सकती है।