ईंधन संकट और महंगाई की मार: अमेरिका-ईरान तनाव से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बेहाल
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में ऊर्जा सप्लाई बाधित, पाकिस्तान में तेल-गैस की कीमतें बढ़ीं।
- UNDP की चेतावनी: इस संकट से 3 करोड़ से अधिक पाकिस्तानी फिर से गरीबी में जा सकते हैं।
- बिजली नियामक फरवरी फ्यूल एडजस्टमेंट के तहत प्रति यूनिट 1.42 रुपए की अतिरिक्त वसूली करेगा।
- चेनस्टोर एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान के अनुसार दुकानें जल्दी बंद करने के आदेश से दो हफ्तों में 200 अरब रुपए का कारोबारी नुकसान।
- देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और गैस की कमी की शिकायतें बढ़ रही हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष खत्म होने के बाद भी इसके आर्थिक दुष्प्रभाव लंबे समय तक बने रहेंगे।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब सीधे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है — ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, बिजली बिल बढ़ रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने चेतावनी दी है कि इस संकट के चलते तीन करोड़ से अधिक पाकिस्तानी फिर से गरीबी की चपेट में आ सकते हैं। 'द न्यूज इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार कूटनीतिक स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस राहत नहीं मिली है।
होर्मुज स्ट्रेट की रुकावट और ऊर्जा सप्लाई पर असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रास्ते में अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो रही है।
एशिया के वे देश जो ऊर्जा के लिए बाहरी आयात पर निर्भर हैं, उन्हें इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। पाकिस्तान इस श्रेणी में सबसे अधिक संवेदनशील देशों में शामिल है, क्योंकि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल और गैस पर निर्भर है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान पहले से ही आईएमएफ के कर्ज तले दबा है और विदेशी मुद्रा भंडार सीमित है। ऐसे में आयातित ईंधन की बढ़ती लागत उसकी आर्थिक स्थिति को और नाजुक बना रही है।
बिजली बिल में बढ़ोतरी और आम जनता पर असर
महंगे ईंधन का बोझ अब सीधे आम पाकिस्तानी उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। बिजली नियामक ने फरवरी के फ्यूल एडजस्टमेंट के तहत प्रति यूनिट 1.42 रुपए की अतिरिक्त वसूली की तैयारी कर ली है।
देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और गैस की कमी की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट गर्मियों तक जारी रहा — जब बिजली की मांग चरम पर होती है — तो आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ और अधिक बढ़ सकता है।
यह विडंबना ही है कि जिस देश में पहले से करोड़ों लोग ऊर्जा गरीबी में जी रहे हैं, वहां ऊर्जा लागत में यह वृद्धि सामाजिक असंतोष को और गहरा कर सकती है।
व्यापार जगत को नुकसान, ऊर्जा बचत नीति पर सवाल
पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा बचाने के लिए दुकानों को जल्दी बंद करने का आदेश दिया है। लेकिन इस फैसले पर कारोबारी जगत ने कड़ी आपत्ति जताई है।
चेनस्टोर एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, इस नीति के चलते मात्र दो हफ्तों में लगभग 200 अरब रुपए के कारोबार का नुकसान हो चुका है। संगठन का तर्क है कि संगठित रिटेल सेक्टर को अनुपातहीन नुकसान हो रहा है, जबकि छोटी और अनौपचारिक मार्केट्स पर यह नियम उतना लागू नहीं होता।
इससे न केवल बाजार में असमानता बढ़ रही है, बल्कि सरकार की ऊर्जा बचत की वास्तविक उपलब्धि भी संदिग्ध हो गई है।
गरीबी और कृषि संकट की दोहरी मार
UNDP की रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट केवल शहरी उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। खेती के अहम मौसम में ईंधन और खाद की कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी चरमराने लगी है।
अगर हालात नहीं सुधरे तो तीन करोड़ से अधिक लोग फिर से गरीबी रेखा के नीचे जा सकते हैं। यह आंकड़ा उस देश के लिए बेहद चिंताजनक है जो पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि भले ही अमेरिका-ईरान संघर्ष निकट भविष्य में थम जाए, इसके आर्थिक दुष्प्रभाव पाकिस्तान में लंबे समय तक महसूस किए जाते रहेंगे। आने वाले हफ्तों में होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दिशा ही तय करेगी कि पाकिस्तान को कब और कितनी राहत मिलेगी।