पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक तेल संकट का असर: शहबाज शरीफ ने उठाए कड़े कदम
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर वैश्विक तेल संकट का गहरा प्रभाव है।
- प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कठोर मितव्ययिता उपायों की घोषणा की।
- मंत्रियों के विदेश दौरे पर रोक और सैलरी में कटौती की गई।
- स्कूलों को दो हफ्ते के लिए बंद करने का फैसला किया गया।
- सरकार ने ऊर्जा बचत के उपायों पर ध्यान केंद्रित किया।
इस्लामाबाद, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के साथ जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल संकट को जन्म दिया है, जिसका प्रभाव अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन पर साफ नजर आ रहा है।
प्रमुख दैनिक डॉन के अनुसार, संभावित कठिनाइयों को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में कठोर मितव्ययिता (ऑस्टेरिटी) उपायों की घोषणा की है और यह स्वीकार किया है कि ईंधन की कीमतों को लेकर “कठिन फैसला” लेना अनिवार्य हो गया है।
इसका प्रभाव सामान्य जनता पर भी पड़ेगा। मंत्रियों और सलाहकारों के विदेश यात्रा को निलंबित कर दिया गया है, साथ ही मंत्रियों का वेतन अगले दो महीने तक रोक दिया जाएगा और सांसदों की सैलरी में भी 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।
पाकिस्तान में अब सरकारी गाड़ियों को दो महीने तक 50 प्रतिशत कम ईंधन उपलब्ध होगा। 60 प्रतिशत सरकारी वाहन कार्यरत नहीं होंगे। सभी सरकारी विभाग अपने खर्च में 20 प्रतिशत की कमी करेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पाकिस्तान के नियंत्रण में नहीं है और वैश्विक परिस्थितियों के कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस संकट के समय संयम रखें और सरकार के प्रयासों में सहयोग करें।
सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में सार्वजनिक और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की संख्या को आधा करने का निर्णय शामिल है। कुछ कर्मचारी घर से काम करेंगे ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके। हालांकि, यह नियम बैंक, अस्पताल, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों जैसी आवश्यक सेवाओं पर लागू नहीं होगा।
ऊर्जा संकट को देखते हुए देशभर में सभी स्कूलों और कॉलेजों को दो सप्ताह के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है। उच्च शिक्षा संस्थानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस अवधि में अपनी कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करें ताकि शैक्षणिक गतिविधियों में कोई बाधा न आए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने ईंधन भंडार और राष्ट्रीय तैयारियों की समीक्षा के लिए एक विशेष कैबिनेट समिति की बैठक भी आयोजित की। इस बैठक में तेल की उपलब्धता, आपूर्ति श्रृंखला और संभावित आपात परिस्थितियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा की गई।
संघीय सरकार के अलावा कई प्रांतों ने भी अपने स्तर पर कदम उठाना शुरू कर दिया है। पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान की सरकारों ने ऊर्जा बचत और प्रशासनिक प्रबंधन संबंधी कई उपायों की घोषणा की है। वहीं, सिंध की कैबिनेट इस मुद्दे पर चर्चा के लिए बैठक आयोजित करने वाली है।
सरकार का कहना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियाँ लंबे समय तक इसी प्रकार बनी रहती हैं, तो देश में ऊर्जा बचत और आर्थिक प्रबंधन के संबंध में और भी कदम उठाए जा सकते हैं।