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मध्य पूर्व संघर्ष के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट

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मध्य पूर्व संघर्ष के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट

सारांश

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। ईंधन की बढ़ती कीमतें और निर्यात में कमी इस संकट को और बढ़ा सकती हैं।

मुख्य बातें

संघर्ष के चलते ऊर्जा कीमतों में वृद्धि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर खतरा निर्यात में कमी के संकेत महंगाई में बढ़ोतरी की संभावना पेट्रोलियम आयात में वृद्धि से समस्या बढ़ सकती है

नई दिल्ली, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का पाकिस्तान की नाजुक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है, और ईंधन के आयात पर इस देश की अत्यधिक निर्भरता इसे और भी जोखिम में डाल रही है। वर्तमान में, इस संघर्ष के चलते ऊर्जा की कीमतों में असाधारण वृद्धि हुई है, जिसका प्रभाव मध्य पूर्व के अन्य देशों पर भी पड़ रहा है।

अगर यह युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है और ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो पाकिस्तान को एक बार फिर से व्यापक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है, जो विकास की गति को बाधित करेगा। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से जीडीपी पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है, और यह अर्थव्यवस्था, जो हाल ही में वर्षों की अस्थिरता के बाद संजीवनी प्राप्त करने लगी थी, फिर से धीमी पड़ सकती है।

कराची के डॉन अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “इस युद्ध के प्रभाव केवल तेल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति में बाधा तक सीमित नहीं रहेंगे। लंबे समय तक चलने वाला यह संघर्ष विदेश से आने वाली धनराशियों (रेमिटेंस) के प्रवाह को भी कमजोर कर सकता है, और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मंदी के कारण निर्यात की मांग भी प्रभावित हो सकती है।”

पेट्रोलियम के आयात में वृद्धि से आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है, जबकि निर्यात जो पहले ही जुलाई से फरवरी के बीच लगभग 8 प्रतिशत गिर चुके हैं, आर्थिक मंदी के कारण और भी कमजोर हो सकते हैं। इसके अलावा, खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की मंदी, जिनसे पाकिस्तान को अपने कुल रेमिटेंस का आधे से अधिक हिस्सा मिलता है, एक नकारात्मक बाहरी झटका दे सकती है। इन सभी दबावों के कारण पाकिस्तान के भुगतान संतुलन घाटे में वृद्धि हो सकती है।

यदि ये प्रवृत्तियां जारी रहती हैं तो चालू खाता घाटा काफी बढ़ सकता है। यह स्थिति 2022 के संकट की याद दिलाती है, जब वैश्विक तेल और वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को संकट के कगार पर पहुंचा दिया था और पाकिस्तान को आईएमएफ से सहायता प्राप्त करनी पड़ी थी।

सार्वजनिक स्तर पर इसके प्रभाव और भी गंभीर और लंबे समय तक रह सकते हैं, क्योंकि वैश्विक तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर पेट्रोल और बिजली की दरों में वृद्धि करती हैं। इसके साथ ही, परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से व्यापक महंगाई को भी बढ़ावा मिलता है।

यदि कच्चे तेल की कीमतें यूक्रेन युद्ध के दौरान देखे गए उच्च स्तर के करीब पहुंचती हैं, तो पाकिस्तान फिर से उच्च मुद्रास्फीति के दौर में फंस सकता है, जिसका असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा, जो अभी तक पिछले झटकों से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को वैश्विक घटनाओं से प्रभावित करने की आवश्यकता है। इस समय, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष से उत्पन्न दबावों का सामना करना आवश्यक है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को क्या खतरे हैं?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से खतरा है, जिससे ऊर्जा कीमतें बढ़ रही हैं।
क्या पाकिस्तान को फिर से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है?
यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो पाकिस्तान को वृहद आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
उर्जा संकट का असर पाकिस्तान की जनता पर कैसे होगा?
ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ेगी, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवार प्रभावित होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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