पाकिस्तान में महंगाई का उछाल: पेट्रोल, खाद्य कीमतों में वृद्धि ने बढ़ाई चिंता

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पाकिस्तान में महंगाई का उछाल: पेट्रोल, खाद्य कीमतों में वृद्धि ने बढ़ाई चिंता

सारांश

पाकिस्तान में महंगाई दर में वृद्धि ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। जानें इस आर्थिक संकट के पीछे के कारण।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान में महंगाई दर 6.44 प्रतिशत बढ़ी है।
  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है।
  • खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं।
  • पाकिस्तान की जीडीपी में रेमिटेंस का योगदान 10 प्रतिशत है।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यक्रमों में शामिल होने की संख्या 26 है।

नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में अल्पकालिक महंगाई का मुख्य सूचकांक, जिसे सेंसिटिव प्राइस इंडिकेटर (एसपीआई) कहा जाता है, 11 मार्च को समाप्त सप्ताह में सालाना आधार पर 6.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस वृद्धि का मुख्य कारण पेट्रोलियम उत्पादों और आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी है।

पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आंकड़ों के अनुसार, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सूचकांक पिछले सप्ताह की तुलना में 1.89 प्रतिशत बढ़ा है, जो घरेलू उपयोग की प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल की कीमतों में 20.60 प्रतिशत और डीजल में 19.54 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़ोतरी के साथ, एलपीजी की कीमतों में भी 12.13 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिसने महंगाई में अहम भूमिका निभाई है।

इसके साथ ही, खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। प्याज की कीमत में 9.63 प्रतिशत, केला 1.44 प्रतिशत और गेहूं का आटा 1.28 प्रतिशत महंगा हुआ है।

अन्य खाद्य सामग्री जैसे चिकन की कीमत 0.66 प्रतिशत, दाल माश 0.55 प्रतिशत, जलावन लकड़ी 0.38 प्रतिशत, चना दाल 0.10 प्रतिशत, ताजा दूध 0.08 प्रतिशत और पका हुआ बीफ 0.02 प्रतिशत बढ़ा है।

एक अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान अल्पकालिक विदेशी प्रेषण और बाहरी सहायता पर अत्यधिक निर्भरता के कारण एक जटिल आर्थिक स्थिति में फंसता जा रहा है।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान की जीडीपी में रेमिटेंस का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो निर्यात आय के बराबर है। इससे फैक्ट्रियों के बंद होने, उच्च बेरोजगारी और उत्पादन क्षमता के कम इस्तेमाल जैसी आर्थिक कमजोरियां प्रकट हो रही हैं।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि 2026 से 2031 के बीच पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर कर्ज, महंगाई और बढ़ती गरीबी का गहरा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ेगा।

यह भी बताया गया है कि 1958 से अब तक पाकिस्तान 26 बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। इन कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को अब तक 34 अरब डॉलर से अधिक की सहायता मिली है। हालिया 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी कार्यक्रम 2024 में शुरू हुआ, जिसे 2025-26 तक बढ़ाया गया है, जो देश की बढ़ती बाहरी सहायता पर निर्भरता को दर्शाता है।

Point of View

NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान में महंगाई क्यों बढ़ रही है?
महंगाई का मुख्य कारण पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी है।
पाकिस्तान की जीडीपी में रेमिटेंस का योगदान कितना है?
पाकिस्तान की जीडीपी में रेमिटेंस का हिस्सा लगभग 10 प्रतिशत है।
आईएमएफ के कार्यक्रमों में पाकिस्तान कितनी बार शामिल हुआ है?
पाकिस्तान अब तक 26 बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है।
महंगाई का आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?
महंगाई ने आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कितनी वृद्धि हुई है?
पेट्रोल की कीमत में 20.60 प्रतिशत और डीजल में 19.54 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़ोतरी हुई है।
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