बेंगलुरु ISIS फंडिंग केस: ईडी ने 8 ठिकानों पर छापे मारे, डिजिटल सबूत जब्त, ₹7.50 लाख फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में 8 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जो ISIS भर्ती और आतंकी फंडिंग मॉड्यूल से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा थी। इस कार्रवाई में एजेंसी ने आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस जब्त किए और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17(1-ए) के तहत अपराध से अर्जित ₹7.50 लाख की राशि को फ्रीज कर दिया।
जांच की पृष्ठभूमि
ईडी की यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) से उपजी है। एनआईए ने यह मामला गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 17 (आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड जुटाना), धारा 18 (आतंकवाद के लिए साजिश और तैयारी) और धारा 18B (आतंकवादी गतिविधियों के लिए भर्ती) के अंतर्गत दर्ज किया था।
यह एफआईआर बेंगलुरु स्थित इकरा वेलफेयर ट्रस्ट, गाइडेंस फॉर मैनकाइंड (GFM) ट्रस्ट और कुछ व्यक्तियों से जुड़ी कथित ISIS भर्ती गतिविधियों से संबंधित है।
पाँच आरोपी पहले से गिरफ्तार
जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें शामिल हैं: इरफान नासिर (व्यवसायी); अहमद अब्दुल कादर (एक निजी बैंक में बिजनेस एनालिस्ट); मो. तौकीर महमूद (दंत चिकित्सक और KIMS के पूर्व छात्र); ज़ुहाब हमीद शकील मन्ना उर्फ जोहैब मन्ना (IT पेशेवर); और मो. शिहाब (IT पेशेवर, जो जांच के दौरान कथित तौर पर फरार थे)।
भर्ती का तरीका: कैंप और स्टडी सर्कल
जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने 'इकरा कैंप' — जिसे व्यक्तित्व विकास कार्यशाला के रूप में प्रस्तुत किया गया — और 'कुरान सर्कल' नामक साप्ताहिक अध्ययन समूह के माध्यम से कमजोर व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें कट्टरपंथी बनाया। चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने लोगों को तुर्की के रास्ते सीरिया भेजने के उद्देश्य से व्यक्तियों, ट्रस्टों और अपनी निजी बचत से धन एकत्र किया और उसे आगे पहुँचाया।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि आरोपियों ने कथित तौर पर सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी भावनाओं का दुरुपयोग कर सांप्रदायिक तनाव भड़काने और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए ISIS की विचारधारा का प्रचार करने का प्रयास किया।
ट्रस्टों की भूमिका पर जांच
ईडी के अनुसार, जांच से यह सामने आया है कि आरोपी और इकरा वेलफेयर ट्रस्ट तथा गाइडेंस फॉर मैनकाइंड ट्रस्ट से जुड़े ट्रस्टियों ने मिलकर धन संग्रह किया। आरोप है कि इस धनराशि का उपयोग कमजोर लोगों को ISIS में भर्ती करने और उसे सुगम बनाने में किया गया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ दक्षिण भारत में ISIS-संबद्ध नेटवर्क की निगरानी बढ़ा रही हैं।
आगे की कार्रवाई
जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच जारी है। ईडी का मामला NIA की समानांतर आपराधिक जांच के साथ आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस नेटवर्क के वित्तीय प्रवाह को उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।