24 जुलाई 2026
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बेंगलुरु ISIS फंडिंग केस: ईडी ने 8 ठिकानों पर छापे मारे, डिजिटल सबूत जब्त, ₹7.50 लाख फ्रीज

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बेंगलुरु ISIS फंडिंग केस: ईडी ने 8 ठिकानों पर छापे मारे, डिजिटल सबूत जब्त, ₹7.50 लाख फ्रीज

सारांश

बेंगलुरु में ISIS भर्ती नेटवर्क की जड़ें व्यक्तित्व विकास कैंप और कुरान सर्कल में छुपी थीं — ईडी की 8 ठिकानों पर छापेमारी ने डिजिटल सबूत और ₹7.50 लाख की आपराधिक संपत्ति ज़ब्त की। दो ट्रस्ट और पाँच गिरफ्तार आरोपी इस कथित नेटवर्क के केंद्र में हैं।

मुख्य बातें

ईडी ने 21 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में 8 स्थानों पर PMLA के तहत छापेमारी की।
आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस जब्त; ₹7.50 लाख की आपराधिक संपत्ति फ्रीज।
जांच NIA की एफआईआर पर आधारित, जो UAPA की धाराओं 17, 18 और 18B के तहत दर्ज है।
इकरा वेलफेयर ट्रस्ट और गाइडेंस फॉर मैनकाइंड ट्रस्ट कथित ISIS भर्ती नेटवर्क के केंद्र में।
अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार : व्यवसायी, बैंक एनालिस्ट, दंत चिकित्सक और दो IT पेशेवर।
आरोपियों पर तुर्की के रास्ते सीरिया भेजने के लिए फंड जुटाने का आरोप।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में 8 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की, जो ISIS भर्ती और आतंकी फंडिंग मॉड्यूल से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा थी। इस कार्रवाई में एजेंसी ने आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस जब्त किए और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17(1-ए) के तहत अपराध से अर्जित ₹7.50 लाख की राशि को फ्रीज कर दिया।

जांच की पृष्ठभूमि

ईडी की यह कार्रवाई राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) से उपजी है। एनआईए ने यह मामला गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 17 (आतंकवादी गतिविधियों के लिए फंड जुटाना), धारा 18 (आतंकवाद के लिए साजिश और तैयारी) और धारा 18B (आतंकवादी गतिविधियों के लिए भर्ती) के अंतर्गत दर्ज किया था।

यह एफआईआर बेंगलुरु स्थित इकरा वेलफेयर ट्रस्ट, गाइडेंस फॉर मैनकाइंड (GFM) ट्रस्ट और कुछ व्यक्तियों से जुड़ी कथित ISIS भर्ती गतिविधियों से संबंधित है।

पाँच आरोपी पहले से गिरफ्तार

जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें शामिल हैं: इरफान नासिर (व्यवसायी); अहमद अब्दुल कादर (एक निजी बैंक में बिजनेस एनालिस्ट); मो. तौकीर महमूद (दंत चिकित्सक और KIMS के पूर्व छात्र); ज़ुहाब हमीद शकील मन्ना उर्फ जोहैब मन्ना (IT पेशेवर); और मो. शिहाब (IT पेशेवर, जो जांच के दौरान कथित तौर पर फरार थे)।

भर्ती का तरीका: कैंप और स्टडी सर्कल

जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने 'इकरा कैंप' — जिसे व्यक्तित्व विकास कार्यशाला के रूप में प्रस्तुत किया गया — और 'कुरान सर्कल' नामक साप्ताहिक अध्ययन समूह के माध्यम से कमजोर व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें कट्टरपंथी बनाया। चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने लोगों को तुर्की के रास्ते सीरिया भेजने के उद्देश्य से व्यक्तियों, ट्रस्टों और अपनी निजी बचत से धन एकत्र किया और उसे आगे पहुँचाया।

चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि आरोपियों ने कथित तौर पर सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों से जुड़ी भावनाओं का दुरुपयोग कर सांप्रदायिक तनाव भड़काने और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए ISIS की विचारधारा का प्रचार करने का प्रयास किया।

ट्रस्टों की भूमिका पर जांच

ईडी के अनुसार, जांच से यह सामने आया है कि आरोपी और इकरा वेलफेयर ट्रस्ट तथा गाइडेंस फॉर मैनकाइंड ट्रस्ट से जुड़े ट्रस्टियों ने मिलकर धन संग्रह किया। आरोप है कि इस धनराशि का उपयोग कमजोर लोगों को ISIS में भर्ती करने और उसे सुगम बनाने में किया गया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ दक्षिण भारत में ISIS-संबद्ध नेटवर्क की निगरानी बढ़ा रही हैं।

आगे की कार्रवाई

जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच जारी है। ईडी का मामला NIA की समानांतर आपराधिक जांच के साथ आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस नेटवर्क के वित्तीय प्रवाह को उजागर करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु ISIS फंडिंग मामले में ईडी की छापेमारी किस आधार पर हुई?
ईडी ने PMLA, 2002 के तहत यह कार्रवाई NIA द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई ECIR के तहत की। NIA ने यह मामला UAPA की धाराओं 17, 18 और 18B के अंतर्गत दर्ज किया था, जो आतंकी फंडिंग, साजिश और भर्ती से संबंधित हैं।
इकरा वेलफेयर ट्रस्ट और GFM ट्रस्ट की इस मामले में क्या भूमिका बताई गई है?
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दोनों ट्रस्टों से जुड़े ट्रस्टियों और आरोपियों ने मिलकर धन एकत्र किया। आरोप है कि यह धनराशि कमजोर व्यक्तियों को ISIS में भर्ती करने और उन्हें तुर्की के रास्ते सीरिया भेजने में इस्तेमाल की गई।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं और वे कौन हैं?
अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं — इरफान नासिर (व्यवसायी), अहमद अब्दुल कादर (बैंक एनालिस्ट), मो. तौकीर महमूद (दंत चिकित्सक), ज़ुहाब हमीद शकील मन्ना उर्फ जोहैब मन्ना (IT पेशेवर) और मो. शिहाब (IT पेशेवर, जो जांच के दौरान कथित तौर पर फरार थे)।
आरोपियों ने भर्ती के लिए किन तरीकों का कथित इस्तेमाल किया?
चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों ने 'इकरा कैंप' (व्यक्तित्व विकास कार्यशाला के रूप में प्रस्तुत) और 'कुरान सर्कल' (साप्ताहिक अध्ययन समूह) के ज़रिए लोगों को कट्टरपंथी बनाया। साथ ही एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से ISIS विचारधारा का प्रचार किया गया।
ईडी ने छापेमारी में क्या बरामद किया?
21 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में 8 स्थानों पर की गई छापेमारी में ईडी ने आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस जब्त किए। इसके अलावा PMLA की धारा 17(1-ए) के तहत अपराध से अर्जित ₹7.50 लाख की राशि फ्रीज की गई।
राष्ट्र प्रेस
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