बेंगलुरु में ईडी की छापेमारी: मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर क्राइम के मामले में बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बेंगलुरु में मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर क्राइम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में व्यापक कार्रवाई की है। यह कार्रवाई पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट), 2002 के तहत की जा रही है। ईडी की टीम ने कर्नाटक में फैले लगभग 12 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस मामले में कथित साइबर अपराधी श्रीकृष्ण उर्फ श्रीकी और उनके सहयोगियों का नाम सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, यह जांच कर्नाटक पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट्स के आधार पर शुरू की गई है, जिनमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइटों की हैकिंग, बिटकॉइन की चोरी, जबरन वसूली और एनडीपीएस एक्ट के उल्लंघन जैसे गंभीर अपराधों के आरोप शामिल हैं।
ईडी की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पूरा नेटवर्क बहुत ही संगठित तरीके से कार्य कर रहा था। सबसे पहले वेबसाइट्स और डिजिटल वॉलेट्स को हैक करके वहां से क्रिप्टो एसेट्स चुराए जाते थे। इसके बाद इन चोरी किए गए डिजिटल एसेट्स को विभिन्न क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बेचा जाता था ताकि उनका असली स्रोत छुपा रहे। इसके बाद जो धन प्राप्त होता था, उसे विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इस प्रक्रिया में धन को कई स्तरों में घुमाया जाता था ताकि उसकी ट्रैकिंग करना कठिन हो जाए। अंततः इस अवैध आय का उपयोग आरोपी और उनके करीबी लोग अपने निजी लाभ के लिए करते थे।
छापेमारी के दौरान, ईडी ने कुछ अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को भी कवर किया। इनमें मोहम्मद हारिस नलपड़ और ओमर फारूक नलपड़ के आवास शामिल हैं। ये दोनों कर्नाटक के शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एनए हारिस के बेटे हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि ये दोनों श्रीकृष्ण रमैश के करीबी सहयोगी हैं और कथित रूप से इस अपराध से प्राप्त अवैध धन के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल हैं।
इसके अलावा, ईडी ने एक और ठिकाने पर कार्रवाई की, जो अकीब खान से जुड़ा हुआ बताया गया है। अकीब खान पूर्व केंद्रीय मंत्री के रहमान खान के पोते हैं। उनके चाचा मंसूर अली खान ने बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। ईडी के अनुसार, अकीब खान को भी इस मामले में कथित रूप से अपराध से प्राप्त आय का प्रत्यक्ष लाभार्थी माना जा रहा है।
ईडी की टीम ने सभी ठिकानों से दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इनकी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें और यह पता लगाया जा सके कि धन कैसे विभिन्न व्यक्तियों तक पहुंचा।
इस समय ईडी की कार्रवाई जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि यह एक बड़ा साइबर-फाइनेंशियल नेटवर्क हो सकता है, जिसमें कई स्तरों पर लोग शामिल हैं। आगे की जांच में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।