18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की नई दिल्ली घोषणा: पारंपरिक चिकित्सा सहयोग को मिली नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली घोषणा ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (टीसीआईएम) के क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग को नई गति दी है। सदस्य देशों ने इस विषय पर एक ब्रिक्स विशेषज्ञ कार्य समूह के प्रस्तावित गठन का स्वागत किया है, जिसकी जानकारी आयुष मंत्रालय ने 13 सितंबर 2026 को रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी।
घोषणा में क्या है खास
नई दिल्ली घोषणा में औषधीय पौधों और हर्बल तैयारियों पर उपचारात्मक और निवारक उद्देश्यों के लिए शोध में अधिक सहयोग का आह्वान किया गया है। इसके साथ ही, ब्रिक्स देशों की साझा पारंपरिक फार्माकोपिया को सुरक्षित, प्रभावी और किफायती चिकित्सीय उत्पाद विकसित करने की संभावित आधारशिला के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, घोषणा में साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण और उपयुक्त नियामकीय ढाँचे के ज़रिये टीसीआईएम पद्धतियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के महत्व को भी दोहराया गया है।
प्रस्तावित कार्य समूह की भूमिका
ब्रिक्स हेल्थ ट्रैक के तहत प्रस्तावित यह विशेषज्ञ कार्य समूह सदस्य देशों के बीच संवाद, सहयोग और ज्ञान-आदान-प्रदान के एक केंद्रित मंच के रूप में काम करेगा। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह कार्य समूह साक्ष्यों को साझा करने, अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने तथा गुणवत्ता और नियामकीय दृष्टिकोण में सुधार के लिए एक ठोस मंच प्रदान कर सकता है। यह घोषणा टीसीआईएम पर संरचित सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।
केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा में टीसीआईएम को मान्यता दिया जाना पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'भारत वैज्ञानिक अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से आयुर्वेद और चिकित्सा की अन्य पारंपरिक प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।' जाधव ने यह भी कहा कि प्रस्तावित विशेषज्ञ कार्य समूह सदस्य देशों को ज्ञान साझा करने और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने का अवसर देगा।
चंडीगढ़ बैठक से जुड़ी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह पहल 21 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत आयोजित पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पर हुई ब्रिक्स बैठक के बाद आगे बढ़ी है। यह ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य नीति में शामिल करने की माँग तेज़ हो रही है।
आगे की राह
मंत्रालय के अनुसार, औषधीय पौधों और हर्बल तैयारियों पर ज़ोर देने से ब्रिक्स देशों के बीच दस्तावेजीकरण, फार्माकोपियल मानकों, गुणवत्ता आश्वासन और चिकित्सीय उत्पादों के विकास सहित वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को और गहरा करने के रास्ते खुल सकते हैं। यह कदम ब्रिक्स के बहुपक्षीय स्वास्थ्य एजेंडे में भारतीय आयुष दर्शन को केंद्र में लाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।