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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन: PM मोदी बोले — ब्रिक्स समाधान का इकोसिस्टम, 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' देगा साझा विजन को दिशा

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन: PM मोदी बोले — ब्रिक्स समाधान का इकोसिस्टम, 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' देगा साझा विजन को दिशा

सारांश

भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में सम्पन्न 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन पर PM मोदी ने ब्रिक्स को 'समाधान का इकोसिस्टम' बताया और 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' को साझा विजन की नई नींव करार दिया — साथ ही अगले मेज़बान चीन को शुभकामनाएँ दीं।

मुख्य बातें

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ।
PM मोदी ने ब्रिक्स को 'देशों का समूह नहीं, समाधान का इकोसिस्टम' बताया।
'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' को सदस्य देशों के साझा विजन और भावी सहयोग की दिशा-रेखा के रूप में अपनाया गया।
मोदी ने परिणामों को समयबद्ध कार्रवाई और जमीनी प्रभाव से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता चीन को सौंपी गई; मोदी ने चीन को शुभकामनाएँ दीं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स महज देशों का एक समूह नहीं, बल्कि यह 'समाधान का इकोसिस्टम' है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस सम्मेलन में स्वीकृत 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' सदस्य देशों के साझा विजन और भविष्य के सहयोग को एक स्पष्ट दिशा प्रदान करेगा।

मुख्य घटनाक्रम

दो दिवसीय सम्मेलन के समापन पर PM मोदी ने कहा, 'पिछले दो दिनों की हमारी चर्चाओं ने हमारा विश्वास और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, समाधान का एक इकोसिस्टम है।' उन्होंने जोर दिया कि इस शिखर सम्मेलन से जुड़ा 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' सदस्य देशों के भावी सहयोग को ठोस आधार देगा।

मोदी ने यह भी कहा कि अब परिणामों को 'समयबद्ध एक्शन' और 'अंतिम पायदान पर प्रभाव' से जोड़ना आवश्यक है — यानी केवल घोषणाएँ नहीं, बल्कि आम जीवन पर दिखने वाला असर ज़रूरी है।

सदस्य देशों के प्रति आभार

समापन संबोधन में PM मोदी ने सभी सदस्य देशों और उनकी टीमों का विशेष अभिनंदन किया। उन्होंने कहा, 'आपके महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने हमारे सहयोग को व्यापकता भी दी है और गहराई भी दी है। आप सबकी मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती उपयुक्तता, उदारता और समावेशिता का प्रमाण है।'

गौरतलब है कि ब्रिक्स अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है और इसकी सदस्यता संख्या में उल्लेखनीय विस्तार हो चुका है, जिससे वैश्विक मंच पर इसकी भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

ठोस परिणामों पर जोर

मोदी ने कहा कि ब्रिक्स को अब 'फ्रेमवर्क फाइल्स से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में प्रभाव' पैदा करना होगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक दक्षिण के देश बहुपक्षीय संस्थाओं से अधिक व्यावहारिक और क्रियान्वयन-केंद्रित सहयोग की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'दुनिया हमसे केवल विचार और प्रतिबद्धता नहीं, कंक्रीट परिणाम की अपेक्षा करती है।'

चीन को अगले आयोजन की शुभकामनाएँ

सम्मेलन के समापन पर PM मोदी ने ब्रिक्स के अगले अध्यक्ष देश के रूप में चीन को शुभकामनाएँ दीं। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन को सफल बताते हुए उन्होंने सभी प्रतिनिधिमंडलों की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना की।

आगे की राह

'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' के क्रियान्वयन की रूपरेखा अब सदस्य देशों के बीच राजनयिक और तकनीकी स्तर पर तय होगी। यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स के विस्तारित स्वरूप को वैश्विक आर्थिक व सुरक्षा व्यवस्था में अपनी प्रासंगिकता साबित करने का दबाव बढ़ा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विस्तारित सदस्यता के साथ आई भिन्न प्राथमिकताओं को एक सुसंगत कार्यसूची में बाँधना असल चुनौती है। चीन को अध्यक्षता सौंपना भू-राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है — विशेषकर तब जब भारत-चीन सीमा पर हालिया तनाव की पृष्ठभूमि में दोनों देश बहुपक्षीय मंच पर सहयोग की भाषा बोल रहे हैं।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कहाँ और कब आयोजित हुआ?
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में दो दिनों तक चला।
'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' क्या है?
'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाया गया साझा घोषणापत्र है, जिसे PM मोदी ने सदस्य देशों के साझा विजन और भावी सहयोग की दिशा-रेखा बताया। इसका उद्देश्य ब्रिक्स के सहयोग को ठोस और समयबद्ध परिणामों से जोड़ना है।
PM मोदी ने ब्रिक्स को 'समाधान का इकोसिस्टम' क्यों कहा?
PM मोदी ने समापन संबोधन में कहा कि दो दिनों की चर्चाओं ने यह विश्वास और मजबूत किया कि ब्रिक्स केवल देशों का राजनीतिक समूह नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान का एक मंच है। उनका आशय था कि ब्रिक्स को अब सैद्धांतिक प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन में प्रभाव पैदा करना होगा।
ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता किस देश को मिली?
ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता चीन को सौंपी गई है। PM मोदी ने नई दिल्ली सम्मेलन के समापन पर चीन को अगले मेज़बान के रूप में शुभकामनाएँ दीं।
ब्रिक्स सम्मेलन में PM मोदी ने किस बात पर सबसे अधिक जोर दिया?
PM मोदी ने इस बात पर सर्वाधिक जोर दिया कि ब्रिक्स के सभी परिणामों को 'समयबद्ध एक्शन' और जमीनी स्तर पर ठोस प्रभाव से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि दुनिया अब ब्रिक्स से केवल विचार और प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि कंक्रीट परिणाम चाहती है।
राष्ट्र प्रेस
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