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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी की कूटनीतिक जीत, मध्य पूर्व पर सर्वसम्मत घोषणापत्र पारित

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी की कूटनीतिक जीत, मध्य पूर्व पर सर्वसम्मत घोषणापत्र पारित

सारांश

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी ने मतभेदों के बावजूद सभी सदस्यों को एक सर्वसम्मत घोषणापत्र पर एकजुट किया। वैश्विक मीडिया इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत बता रही है — ऐसे वक्त में जब दुनिया में युद्ध, टैरिफ और गठबंधन की अनिश्चितता छाई है।

मुख्य बातें

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय रूप में आयोजित हुआ।
PM मोदी ने 10 पूर्ण सदस्यों और सऊदी अरब को मध्य पूर्व पर एक सर्वसम्मत घोषणापत्र पर सहमत कराया।
घोषणापत्र में परमाणु सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमलों पर 'गहरी चिंता' जताई गई और 'अधिकतम संयम' की अपील की गई।
मोदी ने समूह से 20-वर्षीय विजन अपनाने और निर्णय लागू करने के लिए स्थायी तंत्र बनाने की अपील की।
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने शिखर सम्मेलन को मोदी और शी जिनपिंग के बीच विकासशील विश्व की आवाज़ बनने की प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम ने व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और एमएसएमई पर सिफारिशें घोषणापत्र में शामिल कराईं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में चिह्नित किया है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को लेकर आपसी मतभेदों के बावजूद, मोदी ने सभी 10 पूर्ण सदस्य देशों और सऊदी अरब को एक कड़े शब्दों वाले संयुक्त घोषणापत्र पर सहमत करा लिया — जो इस शिखर सम्मेलन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

जापान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल की। अलग-अलग राय रखने वाले ब्रिक्स सदस्यों को एकजुट कर एक सर्वसम्मत बयान पर लाना, वैश्विक विभाजन के इस दौर में असाधारण माना जा रहा है। घोषणापत्र में किसी देश का नाम लिए बिना संयम बरतने और हालात बिगाड़ने वाले कार्यों से बचने की अपील की गई। इसमें आम नागरिकों के बुनियादी ढाँचे और परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए जाने वाले हमलों पर 'गहरी चिंता' भी जताई गई।

मोदी का 20-वर्षीय विजन

रूसी समाचार एजेंसी टीएएसएस की रिपोर्ट के अनुसार, नेताओं की बैठक में शुरुआती संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने समूह से एक महत्वाकांक्षी 20-वर्षीय विजन अपनाने और निर्णयों को निरंतर लागू करने के लिए ठोस तंत्र बनाने की अपील की।

मोदी ने कहा, 'आज, ब्रिक्स एक परिपक्व अवस्था में पहुँच गया है। पिछले दो दशकों में, इस समूह ने वैश्विक मंच पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है। हम एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं और आम सहमति के आधार पर आगे बढ़ते हैं। हम किसी से टकराव के जरिए नहीं, बल्कि सभी को इस प्रक्रिया में शामिल करके विकास की कोशिश करते हैं। अब समय आ गया है कि ब्रिक्स के भीतर हमारी एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस नतीजों में बदला जाए।'

घोषणापत्र के मुख्य बिंदु

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से जो संयुक्त घोषणापत्र अपनाया, उसमें मध्य पूर्व में संयम और वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया गया। यह शिखर सम्मेलन ऐसे मुश्किल समय में हुआ जब मध्य पूर्व और यूक्रेन के युद्धों से ऊर्जा और शिपिंग बाधित हो रही है और टैरिफ दबाव सदस्यों को प्रभावित कर रहे हैं।

घोषणापत्र में 'अधिकतम संयम' बरतने की अपील की गई और आम नागरिकों के बुनियादी ढाँचे तथा परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए जाने वाले हमलों के खिलाफ विशेष चेतावनी दी गई। गौरतलब है कि यह घोषणापत्र तब आया है जब समूह के भीतर इन मुद्दों पर एकमत होना कठिन माना जा रहा था।

ब्रिक्स बिजनेस फोरम की भूमिका

शिखर सम्मेलन के समानांतर ब्रिक्स बिजनेस फोरम ने व्यापार, निवेश, वित्त, प्रौद्योगिकी और विकास की चुनौतियों पर व्यापार जगत के नेताओं, मंत्रियों और राष्ट्राध्यक्षों को एक साझा मंच दिया। यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, इस फोरम ने ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल की सिफारिशों पर चर्चा में भी अहम भूमिका निभाई। एमएसएमई, डिजिटल अर्थव्यवस्था, मानकों में सहयोग और मूल्य श्रृंखला एकीकरण पर इन सिफारिशों को शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में नियमित रूप से शामिल किया जाता है।

वैश्विक मीडिया का नजरिया

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, शिखर सम्मेलन का केंद्रीय सवाल यह था कि प्रधानमंत्री मोदी या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग — विकासशील दुनिया की अधिक प्रभावशाली आवाज़ के रूप में कौन उभरेगा। द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा कि अमेरिका के साथ भारत और चीन के संबंधों में अनिश्चितता ने इन दोनों परमाणु-सक्षम पड़ोसी देशों के लिए तनाव कम करने का एक दुर्लभ अवसर उत्पन्न किया है। अमेरिकी प्रमुख अखबारों ने इस समिट को बदलते वैश्विक व्यवस्था की झलक के रूप में देखा — जो तनावपूर्ण गठबंधनों, क्षेत्रीय युद्धों और वाशिंगटन-बीजिंग प्रतिस्पर्धा से आकार ले रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स समूह का विस्तार हो चुका है और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता पर बहस तेज है। भारत की अध्यक्षता में सर्वसम्मत घोषणापत्र का आना, नई दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह 'अधिकतम संयम' की अपील कहीं भी व्यवहार में बदलती है — या महज़ एक और बहुपक्षीय दस्तावेज़ बनकर रह जाती है। ब्रिक्स के भीतर रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व पर गहरे मतभेद हैं; किसी देश का नाम न लेना सहमति का संकेत नहीं, बल्कि अक्सर असहमति को ढकने का तरीका होता है। भारत के लिए असली दाँव यह है कि क्या नई दिल्ली मोदी-शी प्रतिस्पर्धा के बीच ब्रिक्स को अपनी रणनीतिक पूँजी में बदल पाएगी, या यह मंच चीन के 'ग्लोबल साउथ' कथानक को और मज़बूत करता रहेगा।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कहाँ और कब आयोजित हुआ?
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय प्रारूप में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता भारत ने की। शनिवार को शुरू हुए इस सम्मेलन में 10 पूर्ण सदस्य देशों और सऊदी अरब ने भाग लिया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त घोषणापत्र में क्या कहा गया?
घोषणापत्र में मध्य पूर्व में 'अधिकतम संयम' बरतने और हालात बिगाड़ने वाले कार्यों से बचने की अपील की गई। इसमें आम नागरिकों के बुनियादी ढाँचे और परमाणु सुविधाओं पर जानबूझकर किए जाने वाले हमलों पर 'गहरी चिंता' भी जताई गई, हालाँकि किसी देश का नाम नहीं लिया गया।
PM मोदी ने ब्रिक्स नेताओं के सामने क्या विजन रखा?
PM मोदी ने समूह से एक महत्वाकांक्षी 20-वर्षीय विजन अपनाने और निर्णयों को लगातार लागू करने के लिए ठोस तंत्र बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की एकता और आम सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस नतीजों में बदलने का समय आ गया है।
वैश्विक मीडिया ने इस शिखर सम्मेलन को किस नज़रिए से देखा?
जापान टाइम्स ने इसे मोदी की बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया, जबकि द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे मोदी और शी जिनपिंग के बीच विकासशील दुनिया की अधिक प्रभावशाली आवाज़ बनने की प्रतिस्पर्धा के रूप में प्रस्तुत किया। अमेरिकी अखबारों ने इसे बदलते वैश्विक व्यवस्था की झलक करार दिया।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम की शिखर सम्मेलन में क्या भूमिका रही?
ब्रिक्स बिजनेस फोरम ने व्यापार, निवेश, वित्त, डिजिटल अर्थव्यवस्था, एमएसएमई और वैल्यू चेन एकीकरण पर व्यापार जगत के नेताओं और मंत्रियों को एक साझा मंच दिया। इस फोरम की सिफारिशें ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के माध्यम से शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र और आगे की कार्ययोजनाओं में शामिल की जाती हैं।
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