ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत मंडपम में PM मोदी ने दूसरे दिन वैश्विक नेताओं का किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन विश्व के कई प्रमुख नेताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। भारत की मेज़बानी में हो रहे इस सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें विविध भू-राजनीतिक दृष्टिकोण वाले देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर एकत्रित हुए हैं।
कौन-कौन से नेता पहुंचे भारत मंडपम
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, घाना के राष्ट्रपति जॉन महामा, बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्टे नदायिशिमिये, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस और सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद सम्मेलन के दूसरे दिन भारत मंडपम पहुंचे। इनके अतिरिक्त, शनिवार की रात्रिभोज में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक घेब्रेयेसस भी सम्मिलित हुए।
ओपन सेशन और इस वर्ष की थीम
ब्रिक्स और आउटरीच देशों के नेताओं ने रविवार को एक ओपन सेशन में भाग लिया, जिसका केंद्र इस वर्ष की थीम — 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना' — के मुख्य स्तंभों पर रहा। नेताओं ने आपसी हितों के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और सदस्य देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ करने के मार्ग तलाशे।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र: बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि
सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को ही ब्रिक्स देशों ने 'नई दिल्ली घोषणा-पत्र' को सर्वसम्मति से अपनाया — जिसे विशेषज्ञ एक उल्लेखनीय कूटनीतिक सफलता मान रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सदस्य देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर परस्पर विरोधी दृष्टिकोण विद्यमान हैं। घोषणा-पत्र में भारत की अध्यक्षता की सराहना करते हुए कहा गया कि उसने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता को मजबूत करने के लिए नई ऊर्जा और गति प्रदान की है।
घोषणा-पत्र में तीन प्रमुख स्तंभों — राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग, आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग तथा सांस्कृतिक एवं जन-स्तरीय सहयोग — के तहत ब्रिक्स सहयोग को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। नेताओं ने शांति को बढ़ावा देने, अधिक न्यायसंगत और प्रतिनिधित्वपूर्ण वैश्विक व्यवस्था निर्मित करने, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, सतत विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि के लिए अपनी रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।
वीगन गाला डिनर: भारत की विविधता और पर्यावरण चेतना का प्रदर्शन
शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स नेताओं के सम्मान में एक भव्य रात्रिभोज का आयोजन किया। इस अवसर का विशेष आकर्षण एक विशेष वीगन (पूर्णतः पौधों पर आधारित) गाला डिनर था, जो भारत की समृद्ध और विविध खानपान परंपराओं को प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, समावेशिता और जिम्मेदार आतिथ्य के सिद्धांतों को भी रेखांकित करता था।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करने का अवसर है। सम्मेलन के समापन पर नेताओं द्वारा संयुक्त वक्तव्य और द्विपक्षीय बैठकों के परिणाम वैश्विक व्यापार, सुरक्षा और जलवायु नीति पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। भारत की अध्यक्षता में लिए गए निर्णय आने वाले महीनों में बहुपक्षीय सहयोग की दिशा तय करेंगे।