18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का अंतिम दिन भारत मंडपम में, 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' जारी; शी जिनपिंग ने दिए भारत-चीन संबंधों के चार सूत्र
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का दूसरा और अंतिम दिन चल रहा है। सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के बीच विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है। भारत इस प्रतिष्ठित सम्मेलन का चौथी बार आयोजन कर रहा है।
नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 — मुख्य बिंदु
शनिवार, 12 सितंबर को सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के समर्थन से 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' जारी किया गया। इस घोषणापत्र में ब्रिक्स राष्ट्रों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने हेतु परस्पर बातचीत, परामर्श और कूटनीतिक प्रयासों के अपने संकल्प को दोहराया।
घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने तथा हालात को और बिगाड़ने वाली किसी भी कार्रवाई से बचने का आग्रह किया गया। यह घोषणापत्र ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक स्तर पर अपने उच्चतम बिंदुओं में से एक पर है।
शी जिनपिंग के चार सूत्र — भारत-चीन संबंधों पर
चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को भारत-चीन संबंधों को लेकर चार अहम सुझाव प्रस्तुत किए।
पहला सूत्र: दोनों देशों को वस्तुनिष्ठ और संतुलित रणनीतिक समझ के साथ आगे बढ़ना चाहिए। शी जिनपिंग ने कहा कि 'भारत और चीन साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं, और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं।'
दूसरा सूत्र: दोनों देशों को सहयोग और साझेदारी के जरिए साझा सफलता हासिल करनी चाहिए। इसके लिए विकास को साझा लक्ष्य मानकर मित्रवत संबंधों और पारस्परिक लाभकारी सहयोग को बढ़ावा देना आवश्यक बताया गया।
तीसरा सूत्र: आपसी सम्मान और समझदारी के आधार पर बाधाओं को दूर किया जाए। शी ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों और सीमा से जुड़े मुद्दों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जाए तथा सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता कायम रखी जाए।
चौथा सूत्र: बहुपक्षीय सहयोग को मज़बूत करना। शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन को ब्रिक्स की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) तथा जी-20 जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ाना चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था और आयोजन की भव्यता
सम्मेलन के दोनों दिन भारत मंडपम परिसर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। बहु-स्तरीय सुरक्षा घेरे, यातायात नियंत्रण और विशेष अभिसूचना तंत्र को सक्रिय रखा गया है। गौरतलब है कि भारत मंडपम ने इससे पहले जी-20 सम्मेलन सहित कई बड़े वैश्विक आयोजनों की मेजबानी की है।
ब्रिक्स और भारत की भूमिका
भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, जो वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती साख को रेखांकित करता है। ब्रिक्स समूह — जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ विस्तारित सदस्य देश शामिल हैं — वैश्विक GDP और व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है।
आगे के घटनाक्रम पर सभी की निगाहें टिकी हैं — विशेष रूप से इस पर कि दूसरे दिन कौन-कौन से द्विपक्षीय समझौते और संयुक्त वक्तव्य सामने आते हैं।