13 सितंबर 2026
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धनबाद में अवैध कोयला खदान धंसी, महिला समेत 2 की मौत; मलबे में दबे हो सकते हैं कई और

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धनबाद में अवैध कोयला खदान धंसी, महिला समेत 2 की मौत; मलबे में दबे हो सकते हैं कई और

सारांश

झारखंड के धनबाद में अवैध कोयला सुरंग धंसने से कम से कम दो लोगों की जान गई और कई मलबे में दबे हो सकते हैं — यह हादसा उस खतरनाक अवैध खनन नेटवर्क की याद दिलाता है जो गरीबी और प्रशासनिक ढिलाई के बीच फलता-फूलता है।

मुख्य बातें

13 सितंबर 2026 की सुबह करीब सात बजे धनबाद के केशलपुर कुम्हारपट्टी में अवैध कोयला सुरंग धंसी।
स्थानीय लोगों के अनुसार मुनिया देवी समेत दो लोगों की मौत , हालाँकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
तीन घायलों को मलबे से निकालकर स्थानीय नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।
मलबे में कई और लोगों के दबे होने की आशंका; राहत-बचाव अभियान जारी।
अवैध सुरंगों से निकला कोयला बाइक के ज़रिये आसपास के बाज़ारों में बेचा जाता था।

झारखंड के धनबाद जिले के कतरास स्थित केशलपुर कुम्हारपट्टी में 13 सितंबर 2026 की सुबह करीब सात बजे एक अवैध कोयला खदान की सुरंग अचानक ढह गई, जिसमें एक महिला समेत कम से कम दो लोगों की मौत की सूचना है। स्थानीय लोगों के अनुसार तीन घायलों को मलबे से निकालकर नज़दीकी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है, जबकि आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोग दबे हैं। घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और पुलिस मौके पर जाँच कर रही है।

हादसा कैसे हुआ

स्थानीय लोगों के मुताबिक, रामकनाली ओपी क्षेत्र के इस इलाके में कुछ महिला और पुरुष सुबह-सुबह अवैध सुरंग में कोयला काटने और बीनने के लिए उतरे थे। इसी दौरान सुरंग का ऊपरी हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया और कई लोग मलबे में दब गए। हादसे की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुँचे और कुदाल, गैंता जैसे हाथ के औज़ारों से मलबा हटाने का काम शुरू किया।

मृतक और घायल

स्थानीय लोगों के अनुसार, मलबे से निकाले गए दो लोग पहले ही दम तोड़ चुके थे। मृतकों में केवटकुली निवासी मुनिया देवी और बेलोंजाबाद निवासी एक अन्य व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं। तीन घायलों को स्थानीय नर्सिंग होम में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। हालाँकि मृतकों और घायलों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

अवैध खनन का नेटवर्क

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस इलाके की अवैध सुरंगों से निकाला गया कोयला बाइक के ज़रिये आसपास के बाज़ारों में बेचा जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कोयला खनन लंबे समय से एक गंभीर समस्या बनी हुई है। गौरतलब है कि इस तरह की 'रैट-होल माइनिंग' यानी चूहा-बिल शैली की खुदाई में काम करने वाले अधिकतर लोग अत्यंत गरीब परिवारों से होते हैं और जीविका के लिए जोखिम भरे हालात में उतरने को मजबूर होते हैं।

राहत और बचाव अभियान

पुलिस मौके पर पहुँचकर जाँच और राहत-बचाव कार्य की निगरानी कर रही है। स्थानीय निवासियों की आशंका है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोग दबे हो सकते हैं, इसलिए बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों की पुष्टि के बाद ही सटीक हताहत संख्या सामने आ सकेगी।

क्या होगा आगे

यह हादसा अवैध खनन पर नियंत्रण की दिशा में नीतिगत विफलताओं पर एक बार फिर सवाल खड़े करता है। आलोचकों का कहना है कि जब तक इन इलाकों में वैकल्पिक रोज़गार और कड़ी प्रशासनिक निगरानी नहीं होगी, इस तरह के हादसे थमने वाले नहीं हैं। राहत और बचाव कार्य पूरे होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और जवाबदेही तय होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्थायी समाधान नहीं निकलता। सवाल यह है कि जब सुरंगों में उतरने वाले लोग गरीबी से मजबूर हैं, तो क्या सिर्फ पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त है? प्रशासन की जवाबदेही सिर्फ बचाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए — अवैध खनन के पीछे काम करने वाले आपूर्ति नेटवर्क और स्थानीय बाज़ार को भी जवाबदेह बनाना ज़रूरी है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनबाद में कोयला खदान हादसा कब और कहाँ हुआ?
यह हादसा 13 सितंबर 2026 की सुबह करीब सात बजे झारखंड के धनबाद जिले के कतरास स्थित रामकनाली ओपी क्षेत्र के केशलपुर कुम्हारपट्टी में हुआ। अवैध सुरंग का ऊपरी हिस्सा अचानक ढह गया, जिसमें कई लोग दब गए।
धनबाद खदान हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
स्थानीय लोगों के अनुसार मुनिया देवी समेत दो लोगों की मौत हुई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। पुलिस और अधिकारी मौके पर जाँच कर रहे हैं।
क्या मलबे में अभी भी लोग दबे हैं?
हाँ, स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि मलबे के नीचे अभी भी कई लोग दबे हो सकते हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है और सटीक संख्या अधिकारियों की पुष्टि के बाद सामने आएगी।
इस इलाके में अवैध खनन कैसे होता था?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इलाके में अवैध सुरंगें खोदकर कोयला निकाला जाता था और बाइक के ज़रिये नज़दीकी बाज़ारों में बेचा जाता था। हादसे के वक्त भी लोग इसी उद्देश्य से सुरंग में उतरे थे।
धनबाद में अवैध खनन की यह पहली घटना है?
नहीं, धनबाद और झारखंड के कोयला बहुल इलाकों में अवैध खनन की दुर्घटनाएँ पहले भी होती रही हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रशासनिक निगरानी और वैकल्पिक रोज़गार के अभाव में ऐसे हादसे थमते नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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