धनबाद के मुनीडीह कोल वाशरी में स्लरी मलबा धंसा, चार दिहाड़ी मजदूरों की दबकर मौत
सारांश
Key Takeaways
धनबाद (झारखंड) में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के पश्चिमी झरिया क्षेत्र स्थित मुनीडीह कोल वाशरी में शनिवार, 2 मई की शाम एक भीषण हादसे में स्लरी लोडिंग के दौरान मलबे का विशाल ढेर धंस जाने से चार दिहाड़ी मजदूरों की दबकर मौत हो गई। यह घटना शाम करीब साढ़े पाँच बजे उस वक्त हुई जब लोडिंग पॉइंट पर 7 से 10 मजदूरों की एक टोली मैन्युअल तरीके से ट्रक में वाश कोल डस्ट (स्लरी) लोड कर रही थी।
हादसे का घटनाक्रम
अधिकारियों के अनुसार, लोडिंग के दौरान स्लरी का विशाल ढेर अचानक भरभराकर मजदूरों पर गिर पड़ा, जिससे मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और वाशरी प्रबंधन की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं।
अब तक मलबे से तीन मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि एक अन्य लापता मजदूर की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। गोपीनाथडीह निवासी सुनीता देवी मलबे से सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहीं और बाल-बाल बच गईं।
मृतकों की पहचान
हादसे में जान गँवाने वाले चारों मजदूरों की पहचान हो चुकी है। मृतकों में गोपीनाथडीह निवासी माणिक बाउरी (45 वर्ष) और दिनेश बाउरी (52 वर्ष), समशिखरा निवासी दीपक बाउरी (50 वर्ष) तथा रुदी कपूरिया निवासी मोड़ा गोप (59 वर्ष) शामिल हैं। हादसे के बाद पीड़ित परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
वर्ष 1983 में स्थापित और लगभग 1.6 मिलियन टन प्रति वर्ष की क्षमता वाली इस वाशरी में हुए हादसे ने सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि स्लरी लोडिंग जैसे जोखिमपूर्ण कार्य के दौरान मौके पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम और अधिकारियों की निगरानी की भारी कमी थी। गौरतलब है कि कोयला खदान और वाशरी परिसरों में मैन्युअल लोडिंग के दौरान इस प्रकार की दुर्घटनाएँ श्रम सुरक्षा नियमों के क्रियान्वयन पर बार-बार प्रश्नचिह्न लगाती रही हैं।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
फिलहाल मुनीडीह ओपी सहित पुटकी और भागाबांध थाना की पुलिस मौके पर विधि-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी है। अधिकारियों के अनुसार लापता मजदूर की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी है। यह हादसा ऐसे समय में आया है जब कोयला क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर पहले से ही चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। जाँच के नतीजे और BCCL प्रबंधन की जवाबदेही तय होना अभी बाकी है।