एनआईए अदालत ने लश्कर आतंकी विक्रम कुमार को 7 साल की सजा सुनाई, बेंगलुरु जेल कट्टरपंथीकरण मामले में 8वाँ दोषी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की बेंगलुरु विशेष अदालत ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के सक्रिय सदस्य विक्रम कुमार उर्फ छोटा उस्मान को 2023 के बेंगलुरु जेल कट्टरपंथीकरण मामले में दोषी करार देते हुए 7 साल के कठोर कारावास और ₹30,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। 2 मई को सुनाए गए इस फैसले के साथ विक्रम इस मामले में दोषी ठहराया जाने वाला आठवाँ आरोपी बन गया है।
मुख्य घटनाक्रम
अदालत ने विक्रम कुमार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम [यूए(पी)ए] और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई। इससे पहले पिछले महीने अदालत ने इसी मामले में कथित मास्टरमाइंड और लश्कर ऑपरेटिव टी. नसीर सहित सात अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराया था।
गौरतलब है कि टी. नसीर 2008 के बेंगलुरु सिलसिलेवार बम धमाकों के सिलसिले में परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में रहते हुए कट्टरपंथीकरण की साजिश रचने का आरोपी है।
एनआईए जाँच में क्या सामने आया
एनआईए की जाँच के अनुसार, विक्रम कुमार को बेंगलुरु जेल में नसीर और सह-आरोपी जुनैद अहमद ने कट्टरपंथी बनाकर एलईटी के नेटवर्क में भर्ती किया था। रिहाई के बाद भी वह दोनों के संपर्क में बना रहा।
मई 2023 में विक्रम ने हरियाणा के अंबाला से हथगोले और वॉकी-टॉकी का जखीरा एकत्र किया और उसे बेंगलुरु में एक सह-आरोपी को सौंप दिया। जाँच एजेंसी के अनुसार, जुनैद से आर्थिक सहायता प्राप्त विक्रम, टी. नसीर को अदालत में पेशी के दौरान भागने में मदद करने की बड़ी साजिश में भी शामिल था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला मूल रूप से जुलाई 2023 में बेंगलुरु केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने दर्ज किया था, जब आदतन अपराधियों के पास से हथियार, गोला-बारूद और डिजिटल उपकरण बरामद हुए थे। इन आरोपियों ने लश्कर-ए-तैयबा की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए बेंगलुरु में सिलसिलेवार आतंकी हमलों की योजना बनाई थी।
सीसीबी से मामला अपने हाथ में लेने के बाद एनआईए ने इसमें छिपी बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया, जिसमें नसीर को जेल से भगाने की योजना भी शामिल थी। यह पूरी साजिश भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं संप्रभुता को नुकसान पहुँचाने के एलईटी के एजेंडे का हिस्सा बताई गई है।
आगे क्या होगा
एनआईए ने इस मामले में जुनैद अहमद समेत 12 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। जुनैद अभी भी फरार है और उसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं। यह मामला भारतीय जेलों में कट्टरपंथीकरण की गहरी जड़ों और आतंकी नेटवर्क की पहुँच को उजागर करता है, जिस पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नज़र बनी हुई है।