ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत मंडपम में मोदी-पुतिन-शी जिनपिंग की गर्मजोशी ने खींचा विश्व का ध्यान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उल्लेखनीय सौहार्द का प्रदर्शन किया। तीनों नेताओं को परस्पर हाथ थामे और मुस्कुराते हुए देखा गया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गए।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन के प्रारंभ से पहले भारत मंडपम में आए वैश्विक नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। इनमें राष्ट्रपति पुतिन और शी जिनपिंग के अलावा इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान शामिल रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर इन क्षणों की झलकियाँ साझा करते हुए पोस्ट किया, 'ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 दिल्ली में शुरू हो गया है।' यह शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित है।
एससीओ से ब्रिक्स तक — सौहार्द की निरंतरता
यह पहली बार नहीं है जब तीनों नेताओं के बीच इस तरह के व्यक्तिगत सौहार्द की झलक देखने को मिली हो। गौरतलब है कि पिछले महीने बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान 31 अगस्त को आधिकारिक 'फैमिली फोटो' के अवसर पर भी मोदी, पुतिन और शी को मुस्कुराते और हाथ मिलाते हुए देखा गया था।
इससे पहले, 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच तियानजिन में आयोजित 2025 एससीओ प्लस शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेताओं के बीच गहरी व्यक्तिगत बॉन्डिंग के कई यादगार दृश्य सामने आए थे। उस अवसर पर पीएम मोदी का राष्ट्रपति पुतिन को गले लगाना, दोनों नेताओं के साथ उनकी साझा सैर और बातचीत के क्षणों ने शीर्ष नेताओं के बीच निजी सौहार्द को रेखांकित किया था।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस वर्ष भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की थीम 'बिल्डिंग फॉर रिजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' — यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण — है। यह थीम प्रधानमंत्री मोदी के 'मानवता प्रथम' की भावना पर आधारित जन-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है।
आम जनता और वैश्विक मीडिया पर असर
भारत मंडपम से आई तस्वीरों और वीडियो ने न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी खासी सुर्खियाँ बटोरीं। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर हैं, मोदी-पुतिन-शी के बीच यह व्यक्तिगत सौहार्द भारत की बहु-ध्रुवीय कूटनीति की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश रूस और चीन पर दबाव बनाए हुए हैं, और भारत तीनों शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति पर चल रहा है।
क्या होगा आगे
13 सितंबर को शिखर सम्मेलन के समापन पर संयुक्त घोषणापत्र जारी होने की संभावना है। इसके अलावा द्विपक्षीय बैठकों और विभिन्न कार्यसूचियों पर चर्चा भी अपेक्षित है। ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के नेताओं की एक साथ उपस्थिति इस शिखर सम्मेलन को भारत की विदेश नीति के लिए एक अहम मंच बना रही है।