18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 14-15 मई को नई दिल्ली में, विदेश मंत्रालय ने जारी किया पूरा शेड्यूल
सारांश
मुख्य बातें
भारत 14 और 15 मई 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने दो दिवसीय समिट का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिसमें भारत मंडपम को मुख्य आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है। इससे पहले 17वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी ब्राजील ने रियो डी जेनेरियो में की थी।
समिट का विस्तृत कार्यक्रम
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, पहले दिन गुरुवार, 14 मई को सुबह 10 बजे विदेश मंत्रियों का भारत मंडपम में आगमन होगा। इसके 30 मिनट बाद पहले सेशन की शुरुआत होगी। दोपहर 1 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 'सेवा तीर्थ' में सभी मंत्रियों की संयुक्त मुलाकात निर्धारित है।
दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर दूसरे सेशन की शुरुआत होगी। शाम 7 बजे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की ओर से भारत मंडपम में ही डिनर का आयोजन किया जाएगा। समिट के दूसरे दिन 15 मई को सुबह 10 बजे तीसरे सेशन की शुरुआत होगी।
किन देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
बैठक में ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया और इंडोनेशिया के विदेश मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात की ओर से उप-विदेश मंत्री स्तर का प्रतिनिधित्व होने की उम्मीद है। ईरान की ओर से भी उप-विदेश मंत्री स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है, जबकि चीन के शेरपा प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की उम्मीद है।
चर्चा के प्रमुख एजेंडे
रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक में वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय सहयोग, आर्थिक साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को लेकर बहस तेज है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता और थीम
भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए 'नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' थीम निर्धारित की है। 13 जनवरी 2026 को अध्यक्षता संभालने के बाद भारत ने 'ब्रिक्स 2026' की आधिकारिक वेबसाइट, थीम और लोगो लॉन्च किए थे। गौरतलब है कि 13वां ब्रिक्स समिट 9 सितंबर 2021 को भी भारत में आयोजित हुआ था, जिसकी थीम 'ब्रिक्स 15: कंटिन्यूटी, कंसोलिडेशन और कंसेंसस के लिए इंट्रा-ब्रिक्स सहयोग' थी। उस समिट में नेताओं ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन को अपनाया था, जिसमें बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार, आतंकवाद-रोधी सहयोग और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) पर जोर दिया गया था।
भारत का ब्रिक्स में योगदान
भारत ने अपनी पिछली ब्रिक्स अध्यक्षता में संवाद प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ और समावेशी बनाया था। उस दौरान डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन और पहली जल मंत्रियों की बैठक जैसे नए मंत्री स्तरीय ट्रैक शुरू किए गए थे। इस बार भी भारत से उम्मीद की जा रही है कि वह ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूती से सामने रखेगा। आने वाले दिनों में समिट के परिणाम दस्तावेज़ और संयुक्त घोषणापत्र पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।