18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली: अमित शाह, योगी, फडणवीस समेत शीर्ष नेता रात्रिभोज में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पधारे वैश्विक नेताओं का औपचारिक स्वागत किया। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी संदर्भ में दो दिवसीय यह शिखर सम्मेलन राजधानी में आयोजित हो रहा है।
रात्रिभोज में शीर्ष नेताओं की उपस्थिति
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विदेशी मेहमानों के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई वरिष्ठ नेता बस से रवाना हुए। यह उपस्थिति इस सम्मेलन को भारत सरकार द्वारा दी जा रही सर्वोच्च प्राथमिकता को रेखांकित करती है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मेजबानी करने पर गर्व है। उन्होंने बताया कि वे मंत्रिमंडलीय सहयोगियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ रात्रिभोज में शामिल हो रहे हैं।
वैश्विक नेताओं का स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सहित अन्य वैश्विक नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह एक साथ इतने प्रभावशाली वैश्विक नेताओं की उपस्थिति भारत की बढ़ती कूटनीतिक हैसियत का प्रमाण है।
भारत की अध्यक्षता और थीम
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' रखा गया है, जो प्रधानमंत्री मोदी के 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। गौरतलब है कि भारत ने 1 जनवरी 2026 से चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है — इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में यह दायित्व निभा चुका है।
ब्रिक्स समूह की संरचना
ब्रिक्स समूह में अब 11 सदस्य देश शामिल हैं — ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात। इसके अतिरिक्त बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम साझेदार देशों के रूप में जुड़े हुए हैं। यह समूह इस वर्ष अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है, जो इसे विशेष रूप से ऐतिहासिक बनाता है।
आगे क्या
दो दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक सहयोग, जलवायु परिवर्तन, और बहुपक्षीय संस्थाओं के सुधार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत की अध्यक्षता में यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को और मुखर करने का अवसर माना जा रहा है।