ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर मायावती: मजबूत सहयोग वैश्विक संघर्षों में उम्मीद की किरण
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 13 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वैश्विक संघर्षों और आर्थिक उथल-पुथल के इस दौर में ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत एकजुटता आशा की किरण साबित हो सकती है। उन्होंने नई दिल्ली में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में BSP का आधिकारिक रुख पेश करते हुए ब्रिक्स मुद्रा पर चर्चा और फिलिस्तीन तथा आतंकवाद पर समूह की स्थिति का स्वागत किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य
मायावती ने स्पष्ट किया कि लखनऊ में यह बैठक तीन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर बुलाई गई थी — नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर पार्टी की प्रतिक्रिया साझा करना, लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे पंचायती विभाग के कर्मचारियों के मुद्दे को उठाना, और देशभर में ज़मीनी स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करना। उन्होंने विशेष रूप से बहुजन समुदाय के बीच समर्थन आधार का विस्तार करने पर बल दिया।
वैश्विक संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों पर BSP का रुख
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए मायावती ने कहा कि यूक्रेन और ईरान में जारी युद्धों ने तमाम देशों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं, जिनमें टैरिफ-संबंधी और आर्थिक कठिनाइयाँ प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत बॉन्ड भी एक उम्मीद भरा कदम होगा।' BSP प्रमुख ने यह भी कहा कि ब्रिक्स मुद्रा का विकास सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक ठोस बनाने में सहायक होगा।
फिलिस्तीन और आतंकवाद पर ब्रिक्स की स्थिति
मायावती ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर ब्रिक्स के रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि 1967 की सीमाओं के आधार पर दो-राज्य समाधान और एक स्वतंत्र फिलिस्तीन के लिए समूह का एकजुट समर्थन सकारात्मक संकेत है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए ब्रिक्स की प्रतिबद्धता, विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में, भारत की स्थिति के लिए उचित समर्थन दर्शाती है।
भारत-चीन संबंधों पर सतर्क रुख
पड़ोसी देश चीन के साथ भारत के संबंधों पर मायावती ने संतुलित लेकिन सतर्क टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मतभेदों को विवादों में न बदलने देने और परस्पर विकास-भागीदारी के दृष्टिकोण का मूल्यांकन उसके व्यावहारिक परिणामों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यह भी उतना ही उचित होगा कि दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे का भी आपस में जल्द से जल्द समाधान हो जाए।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ब्रिक्स नेता नई दिल्ली में भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
आगे क्या
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों, आर्थिक सहयोग, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और आतंकवाद जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श जारी है। BSP के इस रुख से स्पष्ट है कि विपक्षी दलों की नज़र भी ब्रिक्स के संभावित नतीजों पर है, और शिखर सम्मेलन से निकले ठोस परिणामों की राजनीतिक समीक्षा आने वाले दिनों में तेज होगी।