ब्रिक्स साझा मुद्रा पर कोई प्रस्ताव नहीं, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर चर्चा जारी: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने 12 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि ब्रिक्स की कोई साझा मुद्रा शुरू करने का फिलहाल कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं है। हालाँकि, सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान निपटान को सुगम बनाने पर दीर्घकालिक चर्चा जारी है, जिसे द्विपक्षीय लेनदेन लागत घटाने का व्यावहारिक मार्ग माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने कहा कि ब्रिक्स के भीतर किसी साझा मुद्रा को लेकर अभी कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान का विषय नया नहीं है — इस पर पिछले एक दशक से अधिक समय से विचार-विमर्श होता आया है।
दलेला ने रेखांकित किया कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने से द्विपक्षीय लेनदेन की लागत कम हो सकती है और यह व्यवस्था वैश्विक भुगतान एवं निपटान प्रणाली की पूरक के रूप में कार्य कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य मौजूदा वैश्विक वित्तीय तंत्र का विकल्प खड़ा करना नहीं, बल्कि व्यापार को अधिक सुविधाजनक, किफायती और प्रभावशाली बनाना है।
चर्चा का दायरा और उद्देश्य
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अंतर-ब्रिक्स चर्चा का मूल लक्ष्य साझा मुद्रा बनाना नहीं, बल्कि आपसी व्यापार को बढ़ाना, भुगतान प्रणालियों को बेहतर बनाना और कारोबारियों के लिए लेनदेन की लागत कम करना है। दलेला ने बताया कि सदस्य देश द्विपक्षीय और बहुपक्षीय ढाँचों के माध्यम से ऐसे तंत्र विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं जो व्यापार और निवेश को आसान बना सकें।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के स्तर पर भी लगातार चर्चा हो रही है और विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता की उपलब्धियाँ
दलेला ने बताया कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स सहयोग के दौरान एमएसएमई सहयोग पोर्टल, ग्लोबल वैल्यू चेन सहयोग, लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई), विज्ञान एवं अनुसंधान रिपॉजिटरी और स्टार्टअप सहयोग जैसी पहलें प्रमुख उपलब्धियों के रूप में उभरी हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं और 30 से अधिक भारतीय शहरों में विभिन्न ब्रिक्स कार्यक्रम हुए। दलेला ने इसे 'पूरे देश का प्रयास' बताया।
उन्होंने आगे कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने चार प्रमुख स्तंभों के तहत लगभग 150 व्यावहारिक परिणाम हासिल किए हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग, नवाचार, सतत विकास और वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने से जुड़े कई कदम शामिल हैं।
नई दिल्ली घोषणा पत्र और व्यापार व्यवस्था
ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 को अपनाया, जिसमें एकतरफा शुल्क (टैरिफ) और गैर-शुल्क बाधाओं पर गंभीर चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने कहा कि ऐसी नीतियाँ वैश्विक व्यापार को विकृत करती हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
घोषणा पत्र में डब्ल्यूटीओ-केंद्रित खुले, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के समर्थन को दोहराया गया। साथ ही इथियोपिया और ईरान की डब्ल्यूटीओ सदस्यता की दावेदारी का समर्थन भी किया गया। गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय के सचिव ने यह भी बताया कि ब्रिक्स के अंतर्गत 22 मंत्रीस्तरीय ट्रैक सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और लगभग हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार हुआ है।
आगे क्या
विदेश मंत्रालय के सचिव ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा पत्र में विकास-केंद्रित सहयोग को विशेष महत्व दिया गया है और यह एजेंडा अफ्रीका, एशिया तथा अन्य ग्लोबल साउथ देशों की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर एकतरफा टैरिफ के दबाव को लेकर विकासशील देशों की चिंताएँ बढ़ रही हैं। स्थानीय मुद्रा व्यापार पर आगे की चर्चा वित्त और केंद्रीय बैंक स्तर पर जारी रहने की उम्मीद है।