चंडीगढ़ में ब्रिक्स TCIM स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन शुरू, 21 देशों के प्रतिनिधि पारंपरिक चिकित्सा पर मंत्रणा करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
चंडीगढ़ में 21 जुलाई 2026 को भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स पारंपरिक, पूरक एवं एकीकृत चिकित्सा (TCIM) पर चार दिवसीय मंत्रीस्तरीय बैठक का औपचारिक आगाज हुआ। इस अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सम्मेलन में 21 देशों के स्वास्थ्य मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। बैठक का केंद्रीय उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकृत करने और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने पर विचार-विमर्श करना है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, यह बैठक चार दिवसीय ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक के उद्घाटन दिवस पर आयोजित की गई। पोस्ट-ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की उपस्थिति के कारण चंडीगढ़ को इस अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य चर्चा के लिए आदर्श केंद्र माना जा रहा है। गौरतलब है कि यह पहला अवसर है जब भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के TCIM एजेंडे को इस स्तर पर मंत्रीस्तरीय चर्चा का मंच मिला है।
बैठक के प्रमुख एजेंडा बिंदु
बैठक में भाग लेने वाले देशों से TCIM पर ब्रिक्स एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। इससे अनुसंधान, क्लिनिकल वैलिडेशन, डिजिटल ज्ञान-साझाकरण, नियामकीय समन्वय (रेगुलेटरी हार्मोनाइजेशन) और पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के संरक्षण जैसे क्षेत्रों में ठोस सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।
इंटीग्रेटिव मेडिसिन को बढ़ावा देना भी एजेंडे में प्रमुख रूप से शामिल है — यानी आधुनिक उपचार पद्धतियों के साथ-साथ पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा को एक साथ मिलाकर काम करने की रणनीति तैयार की जाएगी। इसके अलावा, ब्रिक्स देश मिलकर एक ऐसा टिकाऊ और नवाचार-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने पर विचार करेंगे, जो भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य संकट या महामारी का सशक्त रूप से सामना करने में सक्षम हो।
नौ प्राथमिकता क्षेत्रों की समीक्षा
स्वास्थ्य मंत्रिस्तरीय बैठक में ब्रिक्स स्वास्थ्य एजेंडे के तहत तय नौ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इनमें निवारक स्वास्थ्य सेवाएँ, मानसिक स्वास्थ्य, महामारी से निपटने की तैयारी, तपेदिक (TB) अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचा, दवाओं के लिए नियामकीय समन्वय, तथा सामाजिक एवं आर्थिक कारणों से जुड़ी बीमारियों से निपटने की रणनीतियाँ शामिल हैं।
वैश्विक सहयोग और डिजिटल स्वास्थ्य
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से ब्रिक्स देश डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल रिसर्च और महामारी से निपटने की तैयारियों में आपसी सहयोग को नई ऊँचाई देने पर मंत्रणा करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा की स्वास्थ्य नीतियों में शामिल करने की माँग तेज हो रही है।
आगे क्या
चार दिवसीय बैठक के समापन पर सदस्य देशों के बीच TCIM सहयोग के लिए एक साझा रोडमैप और कार्ययोजना तैयार किए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप के टर्म्स ऑफ रेफरेंस को अंतिम रूप मिल जाता है, तो यह ब्रिक्स देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा को लेकर नीतिगत समन्वय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।