ईडी की UP में बड़ी कार्रवाई: पीएमएलए के तहत 13 ठिकानों पर छापे, टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क की जांच
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लखनऊ जोनल टीम ने 16 जुलाई को मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश सहित कुछ अन्य स्थानों पर 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह मामला कथित तौर पर टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़ा है, जो लगभग दो वर्ष पहले सामने आया था। 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के तहत की गई इस कार्रवाई को केंद्रीय एजेंसी की अब तक की इस मामले में सबसे बड़ी छापेमारी बताया जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में सबसे पहले उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी। जब जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू उजागर हुए, तो ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया। एफआईआर में एक संगठित गिरोह का उल्लेख है जो कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने, उनके लिए जाली भारतीय पहचान दस्तावेज़ तैयार करवाने और देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें बसाने में सक्रिय था।
वित्तीय नेटवर्क की परतें
ईडी अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में एक गहरे वित्तीय नेटवर्क के सुराग मिले हैं। इसमें कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर भारी मात्रा में विदेशी चंदा प्राप्त होता था। आरोप है कि इस धन को अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई बैंक खातों, 'म्यूल अकाउंट' और बहु-स्तरीय लेन-देन के ज़रिये ठिकाने लगाया जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अवैध घुसपैठ और टेरर फंडिंग के खिलाफ अपनी नीति को और सख्त बनाने में जुटी है।
नकद और छोटे ट्रांसफर का जाल
जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्धों को नकद निकासी और छोटी रकम के बैंक ट्रांसफर के माध्यम से धन पहुँचाया जाता था। इस तरह की लेयरिंग तकनीक का उपयोग आमतौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में संदिग्धों की पहचान छुपाने के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि यह मामला अवैध घुसपैठ और आतंकी वित्तपोषण दोनों आयामों को एक साथ जोड़ता है, जो इसे विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।
आगे की जांच
ईडी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और जल्द ही और खुलासे हो सकते हैं। छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई सामने आ सकती है।