16 जुलाई 2026
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ईडी की UP में बड़ी कार्रवाई: पीएमएलए के तहत 13 ठिकानों पर छापे, टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क की जांच

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ईडी की UP में बड़ी कार्रवाई: पीएमएलए के तहत 13 ठिकानों पर छापे, टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क की जांच

सारांश

ईडी की लखनऊ टीम ने पीएमएलए के तहत उत्तर प्रदेश में 13 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। मामला कथित टेरर फंडिंग, रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ और जाली दस्तावेज़ नेटवर्क से जुड़ा है। चैरिटेबल ट्रस्टों के ज़रिये विदेशी धन के दुरुपयोग की भी जांच जारी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लखनऊ जोनल टीम ने 16 जुलाई को पीएमएलए के तहत उत्तर प्रदेश सहित अन्य स्थानों पर 13 ठिकानों पर छापेमारी की।
मामला कथित तौर पर टेरर फंडिंग और रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ से जुड़ा है, जो लगभग दो साल पहले सामने आया था।
पहले यूपी एटीएस ने एफआईआर दर्ज की थी; मनी लॉन्ड्रिंग का पहलू सामने आने पर ईडी ने जांच अपने हाथ में ली।
कथित नेटवर्क में चैरिटेबल ट्रस्ट शामिल हैं जिन्हें भारी विदेशी चंदा मिलता था और धन को म्यूल अकाउंट व बहु-स्तरीय ट्रांजैक्शन से छुपाया जाता था।
जांच में नकद निकासी और छोटे बैंक ट्रांसफर के ज़रिये संदिग्धों को धन पहुँचाने के सुराग भी मिले हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लखनऊ जोनल टीम ने 16 जुलाई को मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में उत्तर प्रदेश सहित कुछ अन्य स्थानों पर 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह मामला कथित तौर पर टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़ा है, जो लगभग दो वर्ष पहले सामने आया था। 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के तहत की गई इस कार्रवाई को केंद्रीय एजेंसी की अब तक की इस मामले में सबसे बड़ी छापेमारी बताया जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में सबसे पहले उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की थी। जब जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू उजागर हुए, तो ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया। एफआईआर में एक संगठित गिरोह का उल्लेख है जो कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने, उनके लिए जाली भारतीय पहचान दस्तावेज़ तैयार करवाने और देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें बसाने में सक्रिय था।

वित्तीय नेटवर्क की परतें

ईडी अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में एक गहरे वित्तीय नेटवर्क के सुराग मिले हैं। इसमें कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाएं शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर भारी मात्रा में विदेशी चंदा प्राप्त होता था। आरोप है कि इस धन को अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई बैंक खातों, 'म्यूल अकाउंट' और बहु-स्तरीय लेन-देन के ज़रिये ठिकाने लगाया जाता था। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अवैध घुसपैठ और टेरर फंडिंग के खिलाफ अपनी नीति को और सख्त बनाने में जुटी है।

नकद और छोटे ट्रांसफर का जाल

जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्धों को नकद निकासी और छोटी रकम के बैंक ट्रांसफर के माध्यम से धन पहुँचाया जाता था। इस तरह की लेयरिंग तकनीक का उपयोग आमतौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में संदिग्धों की पहचान छुपाने के लिए किया जाता है। गौरतलब है कि यह मामला अवैध घुसपैठ और आतंकी वित्तपोषण दोनों आयामों को एक साथ जोड़ता है, जो इसे विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।

आगे की जांच

ईडी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और जल्द ही और खुलासे हो सकते हैं। छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई सामने आ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि अभी तक ये आरोप जांच के दायरे में हैं, न कि न्यायालय में सिद्ध। एटीएस से ईडी तक का सफर दर्शाता है कि मामला बहु-एजेंसी निगरानी में है, जो आमतौर पर तब होता है जब अपराध की जड़ें गहरी और अंतरराज्यीय होती हैं। असली परीक्षा यह होगी कि जब्त साक्ष्य अदालत में कितने टिकाऊ साबित होते हैं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने उत्तर प्रदेश में छापेमारी क्यों की?
ईडी ने पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में यह छापेमारी की, जो कथित टेरर फंडिंग और रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ से जुड़े नेटवर्क की जांच का हिस्सा है। यह मामला लगभग दो साल पहले यूपी एटीएस की एफआईआर से शुरू हुआ था।
इस मामले में कितने और कहाँ छापे मारे गए?
ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने उत्तर प्रदेश सहित कुछ अन्य स्थानों पर कुल 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों ने अन्य राज्यों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए हैं।
इस नेटवर्क में चैरिटेबल ट्रस्टों की क्या भूमिका बताई जा रही है?
जांच के अनुसार, कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाओं को कथित तौर पर भारी विदेशी चंदा मिलता था। आरोप है कि इस धन को म्यूल अकाउंट और बहु-स्तरीय बैंक ट्रांजैक्शन के ज़रिये अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
यूपी एटीएस और ईडी की इस मामले में अलग-अलग क्या भूमिका है?
यूपी एटीएस ने शुरुआत में अवैध घुसपैठ और जाली दस्तावेज़ों के आरोपों में एफआईआर दर्ज की थी। जब जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू सामने आए, तो ईडी ने पीएमएलए के तहत इसे अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
ईडी के अधिकारियों के अनुसार आगे की जांच जारी है। छापेमारी में मिले दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच हो रही है, और विशेषज्ञों के अनुसार संपत्ति कुर्की व और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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