मध्य प्रदेश: लखन पटेल को आनंद विभाग, जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से पूछा — क्या व्यवस्था भी बदलेगी?
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिमंडल फेरबदल में मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस लेकर उन्हें आनंद विभाग की जिम्मेदारी सौंपी है। इस फैसले पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तीखा सवाल किया है कि क्या महज विभाग बदलने से जमीनी व्यवस्था भी बदल जाएगी।
पटवारी का पत्र और मुख्य सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने अपने पत्र में स्वीकार किया कि लोकतंत्र में विभाग बदलने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास है, लेकिन उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जनता इससे अधिक जानना चाहती है। पटवारी ने लिखा कि मुख्यमंत्री यादव के पास पहले से अनेक विभाग हैं और वे भी जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए हैं। उन्होंने पूछा कि अब पशुपालन विभाग भी सीधे मुख्यमंत्री के पास आ गया है, तो प्रदेश के किसान, पशुपालक और गो-भक्त यह जानना चाहते हैं कि इस विभाग का भविष्य भी बाकी विभागों जैसा ही रहेगा या कुछ बदलेगा।
गोवंश और गोशालाओं की दुर्दशा पर आरोप
पटवारी ने आरोप लगाया कि जिस भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने वर्षों तक गाय को अपनी राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक बनाया, उसी के शासन में मध्य प्रदेश का गोवंश सबसे अधिक उपेक्षित है। उनके अनुसार प्रदेश की गोशालाओं में चारे, पानी, उपचार और संसाधनों का संकट लगातार सामने आता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब गो-संरक्षण BJP के मुख्य चुनावी एजेंडे में शामिल रहा है।
किसानों और पशुपालकों पर असर
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि किसानों की अतिरिक्त आय का प्रमुख जरिया माना जाने वाला पशुपालन अब बढ़ती लागत, महंगे चारे और कमजोर सरकारी सहायता के कारण घाटे का सौदा बनता जा रहा है। उन्होंने गोशालाओं में प्रतिदिन दी जाने वाली चारे की राशि की पर्याप्तता और सड़क हादसों में पशुओं की मौतों पर भी गंभीर चिंता जताई।
आनंद विभाग का उद्देश्य
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने आनंद विभाग की स्थापना की थी। इस विभाग का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि नागरिकों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा देना है। मंत्री लखन पटेल को अब इसी जिम्मेदारी के साथ नई भूमिका में काम करना होगा।
आगे की राह
इस फेरबदल के बाद पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास आ गई है। विपक्ष की इस चुनौती के बाद देखना होगा कि सरकार गोशाला प्रबंधन और पशुपालकों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।