15 जुलाई 2026
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मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने लखन पटेल से छीना पशुपालन विभाग, अब केवल आनंद विभाग रहेगा

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मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ने लखन पटेल से छीना पशुपालन विभाग, अब केवल आनंद विभाग रहेगा

सारांश

मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव — मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस लेकर अपने पास रख लिया। पटेल के पास अब केवल आनंद विभाग बचा है। लंबे समय से चल रही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच यह कदम सियासी हलचल को और तेज कर सकता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 15 जुलाई 2026 को राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार वापस लिया।
अब पशुपालन विभाग सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के अधीन रहेगा।
लखन पटेल के पास अब केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी बची है।
पटेल ने कहा कि विभागों में बदलाव मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है; उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
पटेल दमोह जिले की पथरिया सीट से विधायक हैं और 2023 में दोबारा जीतकर मंत्री बने थे।
यह बदलाव राज्य में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच आया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 15 जुलाई 2026 को एक अहम प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार वापस ले लिया है। राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, अब यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के अधीन रहेगा, जबकि पटेल के पास केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी बचेगी।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य सरकार ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर यह बदलाव प्रभावी किया। भोपाल से जारी इस आदेश में विभाग पुनर्वितरण का कोई विशेष कारण नहीं बताया गया है। सरकार की ओर से इस निर्णय पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में लखन पटेल विभिन्न कारणों से चर्चा में रहे थे, हालाँकि सरकार ने इस बदलाव को किसी विशेष घटनाक्रम से नहीं जोड़ा है।

लखन पटेल की प्रतिक्रिया

मीडिया से बात करते हुए लखन पटेल ने कहा कि उन्हें इस विभागीय बदलाव की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'विभागों का आवंटन और उनमें बदलाव करना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।' उनकी प्रतिक्रिया संयमित रही और उन्होंने किसी प्रकार की असहमति व्यक्त नहीं की।

लखन पटेल का राजनीतिक सफर

लखन पटेल दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे पहली बार 2013 में विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। 2018 के चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने वापसी करते हुए जीत दर्ज की और मोहन यादव सरकार में मंत्री पद पाया।

मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएँ लंबे समय से जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषक इस बदलाव को संभावित कैबिनेट फेरबदल का संकेत मान रहे हैं। हालाँकि, सरकार की ओर से इस संदर्भ में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

आगे देखना होगा कि क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव पशुपालन विभाग का प्रभार किसी अन्य मंत्री को सौंपते हैं या इसे अपने पास ही बनाए रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर बड़े फेरबदल से पहले आता है। लखन पटेल का यह कहना कि उन्हें 'कोई जानकारी नहीं थी', यह दर्शाता है कि यह निर्णय अचानक और एकतरफा था। असली सवाल यह है कि क्या यह महज प्रशासनिक पुनर्गठन है, या पटेल के हालिया विवादों की परोक्ष प्रतिक्रिया — जिसका जवाब सरकार ने देने से परहेज किया है। मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच यह कदम सत्तारूढ़ दल के भीतर समीकरणों को और उजागर कर सकता है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखन पटेल से पशुपालन विभाग क्यों लिया गया?
राज्य सरकार ने विभाग वापस लेने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है। अधिसूचना के अनुसार, पशुपालन विभाग का प्रभार अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास रहेगा। हाल के दिनों में लखन पटेल विभिन्न कारणों से चर्चा में रहे थे, लेकिन सरकार ने इस बदलाव को किसी विशेष घटनाक्रम से नहीं जोड़ा है।
लखन पटेल के पास अब कौन-सा विभाग है?
पशुपालन विभाग वापस लिए जाने के बाद लखन पटेल के पास केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी बची है। वे राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद पर बने हुए हैं।
लखन पटेल कौन हैं और वे किस सीट से विधायक हैं?
लखन पटेल मध्य प्रदेश के दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे 2013 में पहली बार विधायक बने, 2018 में हार गए और 2023 में दोबारा जीतकर मोहन यादव सरकार में मंत्री बनाए गए।
क्या यह बदलाव मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार का संकेत है?
राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि राज्य में कैबिनेट विस्तार की चर्चाएँ लंबे समय से चल रही हैं। हालाँकि, सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अब पशुपालन विभाग की जिम्मेदारी किसके पास है?
राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार, पशुपालन एवं डेयरी विभाग का प्रभार अब सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कोई नया आवंटन नहीं किया जाता।
राष्ट्र प्रेस
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