बेंगलुरु: शिक्षक की पिटाई और भेदभाव के बाद आठवीं के छात्र ने की आत्महत्या की कोशिश, हालत गंभीर
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के मारियप्पनपाल्या इलाके के एक निजी स्कूल में आठवीं कक्षा का एक छात्र 15 जुलाई 2026 को जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा है। परिवार का आरोप है कि स्कूल स्टाफ द्वारा शारीरिक दंड और आरटीई कोटे के आधार पर भेदभाव किए जाने के बाद छात्र ने आत्महत्या की कोशिश की। ज्ञानभारती पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कर लिया गया है और जाँच जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
परिवार के अनुसार, राइट टू एजुकेशन (आरटीई) कोटे के तहत दाखिला पाए इस छात्र का स्कूल में अपने दो सहपाठियों से झगड़ा हुआ था। मामला हेडमास्टर तक पहुँचा, जिसके बाद शिक्षकों ने कथित तौर पर छात्र की पिटाई की। परिवार का यह भी आरोप है कि उसके शरीर पर चोट के निशान थे और उसे पूरे दिन स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
आरटीई कोटे पर भेदभाव का आरोप
माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि आरटीई कोटे के तहत प्रवेश मिलने के कारण छात्र के साथ लगातार भेदभाव किया जाता था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में स्कूलों में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल उठते रहे हैं। छात्र के पिता एक किराने की दुकान पर काम करते हैं और माँ गारमेंट फैक्ट्री में कार्यरत हैं।
कैसे हुई घटना
कथित अपमान और मारपीट से आहत छात्र जब घर लौटा, तब घर पर कोई बड़ा नहीं था। उसने अपनी चचेरी बहन को घटना की जानकारी दी और इसके बाद कथित तौर पर छत के पंखे से लटककर आत्महत्या का प्रयास किया। चचेरी बहन को कुछ असामान्य लगा, उसने तुरंत छात्र को देखा और संघर्ष करते पाकर उसे बचाया। इसके बाद परिवार के सदस्यों को सूचित किया गया।
चिकित्सा स्थिति और अस्पताल में भर्ती
छात्र को नयांडाहल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर उसकी गंभीर चोटों का उपचार कर रहे हैं, जिनमें रीढ़ की हड्डी में आई चोट भी शामिल है।
पुलिस जाँच और आगे की कार्रवाई
परेशान माता-पिता ने अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप और दोषियों को जवाबदेह ठहराने की माँग की है। ज्ञानभारती पुलिस ने मामला दर्ज कर घटना की परिस्थितियों की जाँच शुरू कर दी है। स्कूल प्रशासन पर शारीरिक दंड और भेदभाव के आरोपों की पुष्टि के लिए जाँच जारी है, जबकि स्कूल ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। आने वाले दिनों में पुलिस की जाँच रिपोर्ट यह तय करेगी कि स्कूल स्टाफ के विरुद्ध किस धारा में कार्रवाई होगी।