मूंग MSP खरीदी पर जीतू पटवारी का मोहन यादव को पत्र, MP किसानों की पूरी उपज खरीदने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 7 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर प्रदेश के ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादक किसानों की संपूर्ण उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर शत-प्रतिशत उपार्जन सुनिश्चित करने की माँग की है। पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का अग्रणी दलहन उत्पादक राज्य है और किसानों की उपेक्षा उनके परिश्रम के साथ अन्याय है।
मुख्य घटनाक्रम
पटवारी के अनुसार, प्रदेश के किसानों ने सरकारी नीतियों पर भरोसा कर अधिक निवेश किया और इस बार रिकॉर्ड मूंग उत्पादन हुआ। बावजूद इसके, किसान अपनी उपज MSP पर बेचने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। हरदा सहित प्रदेश के अनेक जिलों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं।
किसानों की प्रमुख समस्याएँ
पटवारी ने पत्र में किसानों के सामने आ रही कई गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी का लक्ष्य वास्तविक उत्पादन की तुलना में बेहद कम रखा गया है। इसके अलावा पंजीयन एवं स्लॉट आवंटन में अव्यवस्था, खरीदी केंद्रों की अपर्याप्त संख्या एवं क्षमता, गुणवत्ता परीक्षण के नाम पर किसानों को अनावश्यक रूप से लौटाया जाना तथा भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
पिछले वर्ष की पुनरावृत्ति का आरोप
पटवारी ने कहा कि पिछले वर्ष भी मूंग खरीदी में अव्यवस्था, सीमित उपार्जन, भुगतान में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते किसानों को आंदोलन करना पड़ा था। उनका कहना है कि दुर्भाग्यवश इस वर्ष भी वही स्थिति दोहराई जा रही है, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है।
केंद्र सरकार की नीति से विरोधाभास
कांग्रेस नेता ने तर्क दिया कि जब केंद्र सरकार स्वयं दलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने की बात करती है, तब किसानों की पूरी उपज की खरीदी सुनिश्चित न करना उनकी मेहनत और विश्वास के साथ सरासर अन्याय है। यदि यही स्थिति बनी रही तो हज़ारों किसानों को अपनी उपज MSP से कम दाम पर निजी व्यापारियों को बेचने के लिए विवश होना पड़ेगा।
आगे क्या होगा
पटवारी की माँग है कि राज्य और केंद्र सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर खरीदी लक्ष्य बढ़ाएँ, प्रक्रियागत अड़चनें दूर करें और भुगतान में पारदर्शिता लाएँ। किसान आंदोलन के और तेज़ होने की आशंका को देखते हुए सरकार का रुख आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।