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MP गेहूं खरीदी घोटाला: जीतू पटवारी बोले — सिर्फ पटवारी नहीं, बड़े अफसर और BJP नेतृत्व पर भी हो जांच

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MP गेहूं खरीदी घोटाला: जीतू पटवारी बोले — सिर्फ पटवारी नहीं, बड़े अफसर और BJP नेतृत्व पर भी हो जांच

सारांश

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी घोटाले में निचले स्तर के पटवारियों पर कार्रवाई से कांग्रेस संतुष्ट नहीं। जीतू पटवारी ने सीधा सवाल दागा — फर्जी किसान, दूसरे राज्यों का गेहूं और करोड़ों का भुगतान महीनों तक कैसे चला? BJP की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की असली परीक्षा अब वरिष्ठ अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण की जांच से होगी।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में फर्जी किसानों , दूसरे राज्यों के गेहूं और करोड़ों रुपये के कथित अनुचित भुगतान की अनियमितताएं सामने आई हैं।
अब तक की कार्रवाई केवल निचले स्तर के पटवारियों तक सीमित रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 26 जून 2025 को सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिकारियों और BJP नेतृत्व की जांच की मांग उठाई।
पटवारी ने कृषि मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने और राजनीतिक संरक्षण की जांच का सवाल किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' दावे पर विपक्ष ने सीधा तंज कसा है।

मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर हुई गेहूं खरीदी में कथित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 26 जून 2025 को सवाल उठाया कि जब करोड़ों रुपये का यह कथित घोटाला महीनों तक चलता रहा, तो जवाबदेही केवल निचले स्तर के पटवारियों तक सीमित क्यों रखी जा रही है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मुख्य घटनाक्रम

राज्य के विभिन्न जिलों में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के दौरान फर्जी किसानों के नाम पर खरीदी, दूसरे राज्यों का गेहूं खपाने और करोड़ों रुपये के भुगतान जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं। अब तक की कार्रवाई निचले स्तर के पटवारियों तक ही सीमित रही है, जिसे लेकर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई है।

जीतू पटवारी की मांग

पटवारी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि 'गेहूं समर्थन मूल्य घोटाले में सवाल सिर्फ पटवारियों पर कार्रवाई का नहीं, बल्कि BJP की जवाबदेही का है।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि इतनी बड़ी व्यवस्था महीनों तक बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी के चलती रही, तो यह संभव नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि कृषि विभाग, मंडी व्यवस्था और शीर्ष स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही।

BJP सरकार पर जवाबदेही का सवाल

पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार के 'जीरो टॉलरेंस' के दावे पर सीधा तंज कसा। उन्होंने कहा कि 'भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली BJP सरकार को जवाब देना चाहिए कि करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले की जवाबदेही आखिर किसकी है।' आलोचकों का कहना है कि केवल निचले कर्मचारियों पर कार्रवाई करके असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

कृषि मंत्री पर नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न

कांग्रेस नेता ने जनता की ओर से तीन प्रमुख सवाल खड़े किए — क्या कृषि मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेंगे, क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी, और क्या राजनीतिक संरक्षण की भी जांच की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो यह कार्रवाई 'छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर बड़े जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास' मानी जाएगी।

आगे क्या होगा

यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा में भी गूंज सकता है, क्योंकि कांग्रेस ने उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि राज्य में गेहूं खरीदी की पारदर्शिता पर यह पहली बार सवाल नहीं उठे हैं — विगत वर्षों में भी समर्थन मूल्य प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें आती रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत मिलीभगत की ओर इशारा करता है। BJP की 'जीरो टॉलरेंस' नीति की विश्वसनीयता इस बात पर टिकी है कि क्या जांच ऊपर तक जाती है या केवल पटवारियों पर खत्म होती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश गेहूं खरीदी घोटाला क्या है?
मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के दौरान फर्जी किसानों के नाम पर खरीदी, दूसरे राज्यों का गेहूं खपाने और करोड़ों रुपये के कथित अनुचित भुगतान की अनियमितताएं सामने आई हैं। अब तक राज्य के विभिन्न जिलों के निचले स्तर के पटवारियों पर कार्रवाई की गई है।
जीतू पटवारी ने क्या मांग की है?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मांग की है कि केवल पटवारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है — कृषि विभाग, मंडी व्यवस्था के शीर्ष अधिकारियों और BJP नेतृत्व की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कृषि मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेने का भी सवाल किया है।
BJP सरकार का इस मामले पर क्या रुख है?
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार भ्रष्टाचार के मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दावा करती रही है। हालांकि, अब तक की कार्रवाई निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित रही है और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ किसी जांच की घोषणा नहीं हुई है।
क्या इस मामले में राजनीतिक संरक्षण की जांच होगी?
कांग्रेस ने राजनीतिक संरक्षण की जांच की मांग उठाई है, लेकिन अभी तक राज्य सरकार ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। यह मामला विधानसभा में भी उठाए जाने की संभावना है।
इस घोटाले से किसानों पर क्या असर पड़ा?
फर्जी किसानों के नाम पर खरीदी और दूसरे राज्यों का गेहूं खपाने से असली किसानों को समर्थन मूल्य का उचित लाभ मिलने पर सवाल खड़े हुए हैं। सरकारी खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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