10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

आंध्र प्रदेश में 2027 तक भूमि पुनर्सर्वेक्षण पूरा करेगी नायडू सरकार, 68.64 लाख पट्टादार पासबुक जारी होंगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
आंध्र प्रदेश में 2027 तक भूमि पुनर्सर्वेक्षण पूरा करेगी नायडू सरकार, 68.64 लाख पट्टादार पासबुक जारी होंगी

सारांश

चंद्रबाबू नायडू का यह ऐलान महज एक प्रशासनिक कदम नहीं — यह दशकों से उलझे भूमि विवादों को सुलझाने की राजनीतिक प्रतिबद्धता है। 9,365 गाँवों में ब्लॉकचेन-सुरक्षित पट्टादार पासबुक और 41,000 एकड़ विवादित भूमि का निपटारा — यह आंध्र प्रदेश के राजस्व सुधार का सबसे बड़ा दांव है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 10 अगस्त 2026 को घोषणा की कि आंध्र प्रदेश में भूमि पुनर्सर्वेक्षण 2027 तक पूरा होगा।
अगले सात महीनों में 9,365 गाँवों में सर्वेक्षण कर 68.64 लाख पट्टादार पासबुक जारी की जाएंगी।
अब तक 32.22 लाख पट्टादार पासबुक वितरित; 41,000 एकड़ भूमि विवादों का निपटारा, 1.27 लाख से अधिक लोगों को लाभ।
पासबुक में ब्लॉकचेन तकनीक , क्यूआर कोड और करेंसी-स्तरीय सुरक्षा फीचर शामिल।
1.36 लाख एकड़ भूमि फ्रीहोल्ड प्रतिबंधों से मुक्त; लगभग 9 लाख लोगों को ऑटो-म्यूटेशन सुविधा।
पुराने रिकॉर्ड — 1-बी, अडंगल, डीकेटी, एआरसी, इनाम, सीलिंग — डिजिटाइज किए जा रहे हैं।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 10 अगस्त 2026 को घोषणा की कि राज्य में भूमि पुनर्सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया 2027 तक संपन्न कर ली जाएगी और किसानों व भूमि स्वामियों को राज्य के आधिकारिक राजकीय चिह्न अंकित पट्टादार पासबुक वितरित की जाएंगी। यह घोषणा एलुरु जिले के कैकालुरु विधानसभा क्षेत्र के कालिदिंडी में आयोजित 'मी भूमि-मी हक्कू' पट्टादार पासबुक वितरण कार्यक्रम के दौरान की गई।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायडू ने महिला किसान नल्लाजर्ला दुर्गा भवानी को राजकीय चिह्न वाली पट्टादार पासबुक सौंपकर वितरण अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करने के लिए 'राजस्व रिकॉर्ड सुधार 2026' कार्यक्रम शुरू किया गया था। गठबंधन सरकार का एकमात्र एजेंडा राजस्व संबंधी समस्याओं का समाधान करना है, ऐसा नायडू ने कहा।

अब तक किसानों और भूमि स्वामियों को 32.22 लाख पट्टादार पासबुक वितरित की जा चुकी हैं। अगले सात महीनों में 9,365 गाँवों में पुनर्सर्वेक्षण पूरा कर 68.64 लाख अतिरिक्त पट्टादार पासबुक जारी की जाएंगी।

पिछली सरकार की विरासत और भूमि विवाद

नायडू ने कहा कि 2019 से 2024 के बीच की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में राजस्व रिकॉर्ड क्षतिग्रस्त हो गए थे। बड़ी संख्या में जमीन और संपत्तियों को धारा 22-ए के तहत डिजिटल रूप से दर्ज कर दिया गया, जिससे व्यापक विवाद उत्पन्न हुए। 2024 में गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद भूमि संबंधी शिकायतों की बाढ़ आ गई। उन्होंने यह भी बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों को आवंटित भूमि की धारा 22-ए संबंधी समस्या को सुलझाकर उन्हें पट्टे जारी किए गए।

तकनीक और पारदर्शिता

नायडू ने बताया कि पट्टादार पासबुक में करेंसी नोटों जैसे मजबूत सुरक्षा फीचर शामिल किए गए हैं। संपत्ति की जानकारी में छेड़छाड़ रोकने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त क्यूआर कोड और अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा उपाय भी जोड़े गए हैं। ई-केवाईसी पूर्ण होने के बाद ग्राम सभाओं के माध्यम से पारदर्शी तरीके से पासबुक वितरित की जा रही हैं।

आम जनता पर असर

मुख्यमंत्री के अनुसार अब तक 41,000 एकड़ से अधिक भूमि से जुड़े विवादों का निपटारा किया जा चुका है, जिससे 1.27 लाख से अधिक किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों को लाभ मिला है। इसके अलावा 1.36 लाख एकड़ भूमि को फ्रीहोल्ड प्रतिबंधों से मुक्त कराया गया है। लगभग 9 लाख लोगों को ऑटो-म्यूटेशन की सुविधा प्रदान की जा चुकी है।

डिजिटलीकरण और आगे की राह

सरकार पुराने भूमि रिकॉर्ड — जिनमें 1-बी, अडंगल, डीकेटी, एआरसी, इनाम और सीलिंग रिकॉर्ड शामिल हैं — को डिजिटाइज कर रही है। सभी लिंक दस्तावेज़ ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। पुनर्सर्वेक्षण का कार्य किसानों की उपस्थिति में किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। यह पहल भूमि स्वामित्व को लेकर दशकों पुरानी अनिश्चितता को दूर करने की दिशा में राज्य का सबसे व्यापक प्रयास मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि 9,365 गाँवों में 2027 की समयसीमा के भीतर सर्वेक्षण वास्तव में पूरा होता है या नहीं। आंध्र प्रदेश में भूमि विवादों का इतिहास पुराना है और प्रशासनिक क्षमता की सीमाएँ इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की सबसे बड़ी परीक्षा होंगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में भूमि पुनर्सर्वेक्षण कब तक पूरा होगा?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के अनुसार भूमि पुनर्सर्वेक्षण की प्रक्रिया 2027 तक पूरी कर ली जाएगी। अगले सात महीनों में 9,365 गाँवों में सर्वेक्षण कार्य संपन्न किया जाएगा।
पट्टादार पासबुक क्या है और इसे क्यों जारी किया जा रहा है?
पट्टादार पासबुक एक आधिकारिक भूमि स्वामित्व दस्तावेज़ है जिसमें राज्य का राजकीय चिह्न अंकित होता है। यह किसानों और भूमि स्वामियों को उनके स्वामित्व अधिकारों का प्रमाण देती है और इसमें ब्लॉकचेन तकनीक व क्यूआर कोड जैसे सुरक्षा फीचर शामिल हैं।
'मी भूमि-मी हक्कू' कार्यक्रम क्या है?
'मी भूमि-मी हक्कू' (मेरी भूमि-मेरा अधिकार) आंध्र प्रदेश सरकार का पट्टादार पासबुक वितरण अभियान है। 10 अगस्त 2026 को एलुरु जिले के कालिदिंडी में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहाँ मुख्यमंत्री नायडू ने स्वयं पासबुक वितरित कीं।
आंध्र प्रदेश में भूमि विवाद क्यों बढ़े थे?
नायडू के अनुसार 2019 से 2024 के बीच बड़ी संख्या में जमीन और संपत्तियों को धारा 22-ए के तहत डिजिटल रूप से दर्ज कर दिया गया, जिससे विवाद उत्पन्न हुए। 2024 में गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद इन शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ी।
अब तक कितने किसानों को इस सुधार से फायदा मिला है?
अब तक 32.22 लाख पट्टादार पासबुक वितरित की जा चुकी हैं और 41,000 एकड़ भूमि विवादों का निपटारा हो चुका है। इससे 1.27 लाख से अधिक किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों को लाभ मिला है, जबकि लगभग 9 लाख लोगों को ऑटो-म्यूटेशन की सुविधा दी जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 3 दिन पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले