आंध्र प्रदेश में 2027 तक भूमि पुनर्सर्वेक्षण पूरा करेगी नायडू सरकार, 68.64 लाख पट्टादार पासबुक जारी होंगी
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 10 अगस्त 2026 को घोषणा की कि राज्य में भूमि पुनर्सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया 2027 तक संपन्न कर ली जाएगी और किसानों व भूमि स्वामियों को राज्य के आधिकारिक राजकीय चिह्न अंकित पट्टादार पासबुक वितरित की जाएंगी। यह घोषणा एलुरु जिले के कैकालुरु विधानसभा क्षेत्र के कालिदिंडी में आयोजित 'मी भूमि-मी हक्कू' पट्टादार पासबुक वितरण कार्यक्रम के दौरान की गई।
मुख्य घटनाक्रम
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायडू ने महिला किसान नल्लाजर्ला दुर्गा भवानी को राजकीय चिह्न वाली पट्टादार पासबुक सौंपकर वितरण अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करने के लिए 'राजस्व रिकॉर्ड सुधार 2026' कार्यक्रम शुरू किया गया था। गठबंधन सरकार का एकमात्र एजेंडा राजस्व संबंधी समस्याओं का समाधान करना है, ऐसा नायडू ने कहा।
अब तक किसानों और भूमि स्वामियों को 32.22 लाख पट्टादार पासबुक वितरित की जा चुकी हैं। अगले सात महीनों में 9,365 गाँवों में पुनर्सर्वेक्षण पूरा कर 68.64 लाख अतिरिक्त पट्टादार पासबुक जारी की जाएंगी।
पिछली सरकार की विरासत और भूमि विवाद
नायडू ने कहा कि 2019 से 2024 के बीच की पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में राजस्व रिकॉर्ड क्षतिग्रस्त हो गए थे। बड़ी संख्या में जमीन और संपत्तियों को धारा 22-ए के तहत डिजिटल रूप से दर्ज कर दिया गया, जिससे व्यापक विवाद उत्पन्न हुए। 2024 में गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद भूमि संबंधी शिकायतों की बाढ़ आ गई। उन्होंने यह भी बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिकों को आवंटित भूमि की धारा 22-ए संबंधी समस्या को सुलझाकर उन्हें पट्टे जारी किए गए।
तकनीक और पारदर्शिता
नायडू ने बताया कि पट्टादार पासबुक में करेंसी नोटों जैसे मजबूत सुरक्षा फीचर शामिल किए गए हैं। संपत्ति की जानकारी में छेड़छाड़ रोकने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त क्यूआर कोड और अन्य प्रौद्योगिकी-आधारित सुरक्षा उपाय भी जोड़े गए हैं। ई-केवाईसी पूर्ण होने के बाद ग्राम सभाओं के माध्यम से पारदर्शी तरीके से पासबुक वितरित की जा रही हैं।
आम जनता पर असर
मुख्यमंत्री के अनुसार अब तक 41,000 एकड़ से अधिक भूमि से जुड़े विवादों का निपटारा किया जा चुका है, जिससे 1.27 लाख से अधिक किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों को लाभ मिला है। इसके अलावा 1.36 लाख एकड़ भूमि को फ्रीहोल्ड प्रतिबंधों से मुक्त कराया गया है। लगभग 9 लाख लोगों को ऑटो-म्यूटेशन की सुविधा प्रदान की जा चुकी है।
डिजिटलीकरण और आगे की राह
सरकार पुराने भूमि रिकॉर्ड — जिनमें 1-बी, अडंगल, डीकेटी, एआरसी, इनाम और सीलिंग रिकॉर्ड शामिल हैं — को डिजिटाइज कर रही है। सभी लिंक दस्तावेज़ ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। पुनर्सर्वेक्षण का कार्य किसानों की उपस्थिति में किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। यह पहल भूमि स्वामित्व को लेकर दशकों पुरानी अनिश्चितता को दूर करने की दिशा में राज्य का सबसे व्यापक प्रयास मानी जा रही है।