आंध्र प्रदेश मासिक आर्थिक रिपोर्ट लॉन्च करेगा, सीएम चंद्रबाबू नायडू का डेटा-आधारित शासन पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार, 14 जुलाई को अमरावती स्थित सचिवालय में मंत्रियों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को संबोधित करते हुए घोषणा की कि राज्य सरकार एक मासिक आर्थिक रिपोर्ट शुरू करने जा रही है। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक विकास की निरंतर निगरानी और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से शासन को अधिक पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बनाना है। आंध्र प्रदेश का दावा है कि वह ऐसी मासिक आर्थिक रिपोर्ट लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
मासिक रिपोर्ट में क्या होगा
मुख्यमंत्री नायडू ने स्पष्ट किया कि इस रिपोर्ट में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी), राजस्व प्राप्ति और विभागीय प्रदर्शन का मासिक मूल्यांकन शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इससे कमियों को समय रहते पहचाना जा सकेगा और सुधारात्मक उपाय किए जा सकेंगे। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के प्रदर्शन व कौशल का भी नियमित मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने सभी विभागों से नागरिकों की संतुष्टि को प्राथमिकता देने और बेहतर सेवा वितरण पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से जमीनी दौरे करने की सलाह दी गई, ताकि आम लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके।
प्रौद्योगिकी और राजस्व वृद्धि
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने शासन को सरल बनाने और राजस्व संग्रह बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरण विकसित किए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न सरकारी विभागों में राजस्व संग्रह में 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य ने पिछले वर्ष 2017 के स्तर की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य तकनीक-आधारित शासन को अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि नायडू पहले भी 'साइबर राजधानी' की अवधारणा को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते रहे हैं।
जन शिकायत निवारण और भूमि विवाद
कुछ विभागों के खिलाफ बढ़ती जनशिकायतों पर चिंता व्यक्त करते हुए नायडू ने अधिकारियों को जन शिकायत निवारण प्रणाली (पीजीआरएस) के जरिए शिकायतों का शीघ्र समाधान करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी विभागों को लंबित शिकायतों की संख्या शून्य करने का लक्ष्य दिया और आवर्ती समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए नियमों व कानूनों में आवश्यक बदलाव पर विचार करने को कहा।
उन्होंने बताया कि पिछली सरकार की नीतियों के कारण राजस्व विभाग को बड़ी संख्या में शिकायतें विरासत में मिली हैं। भूमि विवादों के समाधान के लिए सरकार विभिन्न जिलों में हर महीने पट्टादार पासबुक वितरित कर रही है। हालांकि, अभी भी 72 लाख पट्टादार पासबुक वितरित किया जाना शेष है।
निवेश और औद्योगिक विकास की दिशा
निवेशकों का विश्वास बहाल करने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए नायडू ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान विश्वसनीयता खोने के बाद आंध्र प्रदेश एक बार फिर भारत के सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्यों में शामिल हो गया है। सरकार ने अब तक 19 राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एसआईपीबी) की बैठकें और 57 मंत्रिमंडल बैठकें आयोजित की हैं, जिनसे बड़े निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य केवल कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था बने रहना नहीं, बल्कि एक अग्रणी औद्योगिक राज्य के रूप में उभरना भी है। रायलसीमा में बागवानी, खनिज, दुर्लभ खनिज, सिलिका और चिमाकुर्थी ग्रेनाइट जैसे मूल्यवान संसाधनों के विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें मूल्यवर्धन के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। आने वाले महीनों में इन नीतियों के क्रियान्वयन की गति ही तय करेगी कि यह घोषणाएं जमीन पर कितना असर दिखाती हैं।