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चंद्रबाबू नायडू ने बैंकरों से आंध्र प्रदेश में आर्थिक गतिविधि बढ़ाने का आग्रह किया, 46 लाख किसानों को ₹3,125 करोड़ जारी होंगे

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चंद्रबाबू नायडू ने बैंकरों से आंध्र प्रदेश में आर्थिक गतिविधि बढ़ाने का आग्रह किया, 46 लाख किसानों को ₹3,125 करोड़ जारी होंगे

सारांश

चंद्रबाबू नायडू ने 235वीं एसएलबीसी बैठक में बैंकरों को आर्थिक गतिविधि बढ़ाने का निर्देश दिया — कृषि को ₹3.86 लाख करोड़ और प्राथमिकता क्षेत्र को ₹5.19 लाख करोड़ का ऋण वितरित हुआ। साथ ही शनिवार को 46.85 लाख किसानों के खाते में ₹3,125 करोड़ जमा होंगे।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 19 जून को 235वीं एसएलबीसी बैठक की अध्यक्षता की और बैंकरों से आर्थिक गतिविधि सुगम बनाने का आग्रह किया।
2025-26 में कृषि क्षेत्र को ₹3,86,249 करोड़ , एमएसएमई को ₹1,17,357 करोड़ और प्राथमिकता क्षेत्र को ₹5,19,693 करोड़ का ऋण दिया गया।
आंध्र प्रदेश में ऋण वितरण दक्षिण भारत के अन्य राज्यों से 137% अधिक।
'अन्नदाता सुखीभव-पीएम किसान' योजना के तहत 46,85,838 किसान परिवारों को ₹3,125.47 करोड़ शनिवार को जारी होंगे।
प्रत्येक पात्र किसान को इस वर्ष की पहली किस्त में ₹7,000 (राज्य: ₹5,000 + केंद्र: ₹2,000) मिलेंगे; सालाना कुल सहायता ₹20,000 ।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार, 19 जून को अमरावती स्थित सचिवालय में आयोजित 235वीं राज्य स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए बैंकरों से राज्य में आर्थिक गतिविधियों को सुगम बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। बैठक में 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना पर विस्तृत चर्चा हुई और कृषि, एमएसएमई तथा प्राथमिकता क्षेत्रों में ऋण वितरण की समीक्षा की गई।

ऋण वितरण के आँकड़े

बैंकों ने मुख्यमंत्री को बताया कि 2025-26 में कृषि क्षेत्र को ₹3,86,249 करोड़ का ऋण दिया गया। इसी अवधि में एमएसएमई क्षेत्र को ₹1,17,357 करोड़ और प्राथमिकता क्षेत्र को ₹5,19,693 करोड़ का ऋण वितरित किया गया। बैंकरों ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश में ऋण वितरण दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की तुलना में 137 प्रतिशत अधिक है — जो राज्य की वित्तीय सक्रियता का संकेत है।

बैठक में प्रमुख उपस्थिति

इस बैठक में मुख्य सचिव साई प्रसाद, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एमडी और सीईओ आशीष पांडे, केंद्रीय वित्त मंत्रालय की निदेशक नीलम अग्रवाल, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के क्षेत्रीय निदेशक ए.ओ. बशीर तथा नाबार्ड के जीएम के.वी.एस. प्रसाद सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब राज्य सरकार कृषि और लघु उद्योग क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कदम उठा रही है।

अन्नदाता सुखीभव योजना: 46 लाख किसानों को राहत

मुख्यमंत्री नायडू शनिवार को पलनाडू जिले के चिलकलुरिपेट मंडल के लिंगंगुंटला गाँव से 'अन्नदाता सुखीभव-पीएम किसान' योजना के तहत ₹3,125.47 करोड़ जारी करेंगे। इससे राज्य के कुल 46,85,838 किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें 45,69,817 भूमि-स्वामी किसान परिवार और 1,16,021 वन अधिकार अधिनियम (आरएफआर) के तहत खेती करने वाले परिवार शामिल हैं।

योजना की संरचना और पिछले वर्ष का तुलनात्मक विवरण

राज्य सरकार की 'सुपर सिक्स' प्रतिबद्धताओं के अंतर्गत शुरू की गई इस योजना में प्रत्येक पात्र किसान परिवार को सालाना ₹20,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है — राज्य सरकार की ओर से ₹14,000 और केंद्र सरकार की पीएम-किसान योजना के अंतर्गत ₹6,000। यह राशि तीन किस्तों में वितरित होती है। इस वर्ष की पहली किस्त में राज्य सरकार ₹5,000 और केंद्र सरकार ₹2,000 देगी, यानी प्रत्येक किसान के खाते में ₹7,000 जमा होंगे। गौरतलब है कि पिछले वर्ष इस योजना के तहत कुल ₹8,985.41 करोड़ वितरित किए गए थे, जिसमें राज्य का हिस्सा ₹6,560.18 करोड़ और केंद्र का हिस्सा ₹2,425.23 करोड़ था।

आगे की राह

बैंकिंग क्षेत्र की इस सक्रिय भागीदारी और किसान-केंद्रित योजनाओं के एक साथ क्रियान्वयन से आंध्र प्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने की कोशिश में है। आने वाले महीनों में एसएलबीसी की अगली बैठक में 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना के लक्ष्यों की प्रगति की समीक्षा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह ऋण वास्तव में छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँच रहा है या बड़े कृषि व्यवसायों में केंद्रित है। 'अन्नदाता सुखीभव' योजना की ₹20,000 सालाना सहायता राशि बढ़ती कृषि लागत के सामने पर्याप्त है या नहीं, यह एक बड़ा प्रश्न है जिसका उत्तर सरकारी आँकड़े नहीं देते। दक्षिण भारत में 137% अधिक ऋण वितरण का दावा सत्यापन माँगता है — क्योंकि यह उपलब्धि तभी सार्थक है जब एनपीए दर नियंत्रण में हो। वन अधिकार अधिनियम के तहत 1.16 लाख किसानों को योजना में शामिल करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इन परिवारों तक भुगतान की वास्तविक पहुँच सुनिश्चित करना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

235वीं एसएलबीसी बैठक में क्या निर्णय लिए गए?
बैठक में 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना पर चर्चा हुई और कृषि, एमएसएमई, स्वयं सहायता समूहों तथा बटाईदार किसानों को दिए गए ऋण की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री नायडू ने बैंकरों से राज्य में आर्थिक गतिविधियों को सुगम बनाने का आग्रह किया।
'अन्नदाता सुखीभव-पीएम किसान' योजना क्या है और इसमें कितनी राशि मिलती है?
यह आंध्र प्रदेश सरकार की 'सुपर सिक्स' प्रतिबद्धताओं के अंतर्गत शुरू की गई योजना है, जिसमें प्रत्येक पात्र किसान परिवार को सालाना ₹20,000 की सहायता मिलती है। इसमें राज्य सरकार ₹14,000 और केंद्र सरकार पीएम-किसान के तहत ₹6,000 देती है।
इस वर्ष किसानों को पहली किस्त में कितनी राशि मिलेगी?
इस वर्ष की पहली किस्त में प्रत्येक पात्र किसान के खाते में कुल ₹7,000 जमा होंगे — राज्य सरकार की ओर से ₹5,000 और केंद्र सरकार की पीएम-किसान योजना के तहत ₹2,000।
आंध्र प्रदेश में कृषि ऋण वितरण की स्थिति कैसी है?
2025-26 में बैंकों ने आंध्र प्रदेश के कृषि क्षेत्र को ₹3,86,249 करोड़ का ऋण दिया। बैंकरों के अनुसार राज्य में ऋण वितरण दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की तुलना में 137 प्रतिशत अधिक है।
योजना से कितने किसान परिवारों को लाभ मिलेगा और इनमें कौन शामिल हैं?
इस बार कुल 46,85,838 किसान परिवारों को लाभ मिलेगा, जिनमें 45,69,817 भूमि-स्वामी किसान परिवार और 1,16,021 वन अधिकार अधिनियम (आरएफआर) के तहत खेती करने वाले परिवार शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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