आंध्र प्रदेश का 2026-27 वार्षिक ऋण लक्ष्य ₹8.10 लाख करोड़, कृषि को ₹3.60 लाख करोड़ और एमएसएमई को ₹1.55 लाख करोड़
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के लिए वित्त वर्ष 2026-27 का वार्षिक ऋण योजना लक्ष्य ₹8.10 लाख करोड़ निर्धारित किया गया है — जो पिछले वर्ष के ₹6.60 लाख करोड़ के लक्ष्य की तुलना में 22.7 प्रतिशत की वृद्धि है। अमरावती में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में इस योजना को औपचारिक मंजूरी दी गई। कृषि, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और शिक्षा ऋण पर विशेष जोर के साथ यह योजना राज्य की 15 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि की महत्वाकांक्षा को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
ऋण योजना का क्षेत्रवार आवंटन
आधिकारिक बयान के अनुसार, कुल ₹8.10 लाख करोड़ में से ₹5.40 लाख करोड़ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि शेष ₹2.70 लाख करोड़ अन्य क्षेत्रों के लिए आवंटित हैं।
कृषि क्षेत्र के लिए ₹3.60 लाख करोड़ रखे गए हैं, जिनमें फसल ऋण के लिए अकेले ₹2 लाख करोड़ निर्धारित हैं। कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन देने के लिए बैंकों ने ₹10,693 करोड़ की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव रखा है।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए ₹1.55 लाख करोड़ का प्रावधान है, जिसमें सूक्ष्म उद्यमों के लिए ₹70,000 करोड़ विशेष रूप से आरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त ₹11,500 करोड़ आवास ऋण और ₹2,500 करोड़ शिक्षा ऋण के लिए प्रस्तावित हैं।
2025-26 में ऋण वितरण का प्रदर्शन
बैंकों ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र को ₹3,86,249 करोड़ के ऋण वितरित किए गए। एमएसएमई क्षेत्र को ₹1,17,357 करोड़ और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कुल मिलाकर ₹5,19,693 करोड़ का ऋण दिया गया।
बैंकर्स ने यह भी रेखांकित किया कि आंध्र प्रदेश में ऋण वितरण दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की तुलना में 137 प्रतिशत अधिक है — जो राज्य की बैंकिंग पहुँच की मजबूती को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकताएँ और निर्देश
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बैठक में बैंकों से एमएसएमई क्षेत्र को उदारतापूर्वक ऋण उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक सरल और स्वचालित बनाने की दिशा में कार्यरत है।
नायडू ने रतन टाटा इनोवेशन हब के माध्यम से स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और बैंकों से योग्य उद्यमियों का समर्थन करने का अनुरोध किया। उन्होंने 'वन फैमिली, वन एंटरप्रेन्योर' पहल का भी उल्लेख किया, जिसके तहत बड़े पैमाने पर नए उद्यमी तैयार करने की योजना है।
मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिक वित्तीय सहायता की अपील की। उन्होंने बताया कि सब्सिडी योजना के तहत 200 यंत्रीकृत मछली पकड़ने वाली नौकाओं की खरीद के प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं।
शिक्षा ऋण के संदर्भ में नायडू ने घोषणा की कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के साथ समन्वय करते हुए शिक्षा ऋण पर अतिरिक्त 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने के लिए तैयार है, ताकि देश-विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को अधिक अवसर मिल सकें।
साइबर धोखाधड़ी पर कड़ा रुख
बैठक में मुख्यमंत्री ने साइबर धोखाधड़ी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल गिरफ्तारी जैसी ठगी का शिकार पढ़े-लिखे लोग भी हो रहे हैं और पिछले तीन महीनों में आंध्र प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग इस तरह की साइबर धोखाधड़ी की चपेट में आए हैं।
नायडू ने बैंकों को डिजिटल गिरफ्तारी, साइबर ठगी और वित्तीय अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बैंक वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम के लिए केंद्रीय लेनदेन निगरानी केंद्र (सेंट्रल ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सेल) स्थापित करें।
आगे की राह
मुख्यमंत्री ने ऋण वितरण और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की निगरानी के लिए बैंकर्स और सरकारी अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक पांडेय के साथ मिलकर मुख्यमंत्री ने 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना औपचारिक रूप से जारी की। केंद्र प्रायोजित योजनाओं का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। यह योजना राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में कितनी कारगर साबित होती है, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।