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एमएसपी पर कानूनी गारंटी और ₹2,700 प्रति क्विंटल दाम दो — जीतू पटवारी का MP सरकार पर हमला

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एमएसपी पर कानूनी गारंटी और ₹2,700 प्रति क्विंटल दाम दो — जीतू पटवारी का MP सरकार पर हमला

सारांश

मध्य प्रदेश में 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के सरकारी दावे पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। जीतू पटवारी का आरोप है कि देरी से खरीदी के कारण किसानों को ₹400–600 प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ और BJP का ₹2,700 का चुनावी वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने 28 मई 2026 को मध्य प्रदेश सरकार से एमएसपी पर कानूनी गारंटी की माँग की।
राज्य में अब तक 103 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीद हो चुकी है, लेकिन खरीदी प्रक्रिया पर विवाद जारी है।
BJP का चुनावी वादा ₹2,700 प्रति क्विंटल था, जबकि किसानों को ₹2,600 ही मिल रहे हैं — ₹100 कम।
कथित तौर पर व्यापारियों ने किसानों से ₹2,000–₹2,200 प्रति क्विंटल पर गेहूं खरीदा, जिससे प्रति क्विंटल ₹400–₹600 का नुकसान हुआ।
पटवारी ने तत्काल भुगतान, पारदर्शी खरीदी प्रक्रिया और एमएसपी की कानूनी गारंटी की पाँच सूत्री माँग रखी।

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद के आंकड़ों पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 28 मई 2026 को राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए माँग की कि किसानों को समय पर उचित दाम, भुगतान और सम्मान मिले। उन्होंने कहा कि 103 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।

वादे और हकीकत का फासला

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विधानसभा चुनाव में किसानों से ₹2,700 प्रति क्विंटल गेहूं खरीद का वादा किया था, लेकिन वर्तमान में किसानों को ₹2,600 प्रति क्विंटल ही मिल रहा है — यानी वादे से ₹100 प्रति क्विंटल कम। पटवारी ने कहा, 'पोस्टर और प्रचार से किसान समृद्ध नहीं होता, खेत में पसीना बहाने वाले किसान को समय पर दाम, भुगतान और सम्मान चाहिए।'

उनके अनुसार खरीदी देर से शुरू होने के कारण अनेक किसान मंडियों में एमएसपी से कम दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हुए। कथित तौर पर कई जगह व्यापारियों ने ₹2,000–₹2,200 प्रति क्विंटल तक गेहूं खरीदा, जबकि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,600 था। इस हिसाब से किसानों को प्रति क्विंटल ₹400–₹600 तक का नुकसान उठाना पड़ा।

खरीदी प्रक्रिया में अव्यवस्था के आरोप

पटवारी ने सरकार से सवाल किया कि भुगतान में देरी, पंजीयन की समस्याओं और खरीदी केंद्रों की अव्यवस्था से किसानों को कितनी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि किसान डीजल, खाद, बीज और बिजली की बढ़ती लागत से पहले से ही जूझ रहा है और मौजूदा एमएसपी वास्तविक उत्पादन लागत के मुकाबले बेहद कम है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद प्रक्रिया विवादों में रही हो। पिछले कई वर्षों में भी खरीदी में देरी और भुगतान अटकने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

कांग्रेस की पाँच सूत्री माँगें

पटवारी ने राज्य सरकार के सामने पाँच स्पष्ट माँगें रखीं:

पहली — एमएसपी पर कानूनी गारंटी दी जाए। दूसरी — किसानों का भुगतान तत्काल किया जाए। तीसरी — चुनावी वादे के अनुसार ₹2,700 प्रति क्विंटल का भुगतान हो। चौथी — खरीदी प्रक्रिया समय पर और पारदर्शी हो। पाँचवीं — खरीद के आंकड़े वास्तविक लाभकारी मूल्य को प्रतिबिंबित करें।

आम किसान पर असर

पटवारी ने तंज भरे अंदाज में कहा कि 'किसान मुख्यमंत्री के पोस्टर में मुस्कुरा सकता है, लेकिन खेत में खड़ा किसान आज भी कर्ज, कृषि लागत और सरकारी वादों के उल्लंघन से परेशान है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में गेहूं खरीद सीजन अपने अंतिम चरण में है और किसान भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।

राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और किसान संगठनों के मंचों पर और गरमाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन संरचनात्मक सुधार नहीं होता। असली सवाल यह है कि 103 लाख मीट्रिक टन खरीद के बावजूद अगर किसान मंडी में एमएसपी से नीचे बेचने को मजबूर हो रहा है, तो सरकारी खरीदी तंत्र की पहुँच और समयबद्धता पर पुनर्विचार ज़रूरी है। एमएसपी की कानूनी गारंटी की माँग राष्ट्रीय स्तर पर भी उठती रही है, और मध्य प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान राज्य में इसकी अनदेखी राजनीतिक रूप से महंगी पड़ सकती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश सरकार से क्या माँगें की हैं?
पटवारी ने पाँच माँगें रखी हैं — एमएसपी पर कानूनी गारंटी, तत्काल भुगतान, चुनावी वादे के अनुसार ₹2,700 प्रति क्विंटल दाम, पारदर्शी और समयबद्ध खरीदी प्रक्रिया, तथा वास्तविक लाभकारी मूल्य को दर्शाने वाले खरीद आंकड़े।
मध्य प्रदेश में गेहूं का एमएसपी और वादा किया गया दाम कितना है?
सरकारी एमएसपी ₹2,600 प्रति क्विंटल है, जबकि BJP ने चुनाव में ₹2,700 प्रति क्विंटल देने का वादा किया था। कांग्रेस के अनुसार यह ₹100 का अंतर अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
किसानों को गेहूं बेचने में कितना नुकसान हुआ?
कांग्रेस के आरोप के अनुसार खरीदी देर से शुरू होने के कारण कई किसानों ने व्यापारियों को ₹2,000–₹2,200 प्रति क्विंटल पर गेहूं बेचा, जबकि एमएसपी ₹2,600 था। इससे किसानों को प्रति क्विंटल ₹400–₹600 तक का नुकसान हुआ।
मध्य प्रदेश में अब तक कितनी गेहूं खरीद हुई है?
राज्य सरकार के अनुसार अब तक 103 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है। हालाँकि कांग्रेस इन आंकड़ों की पारदर्शिता और खरीदी प्रक्रिया की समयबद्धता पर सवाल उठा रही है।
एमएसपी की कानूनी गारंटी क्यों ज़रूरी मानी जा रही है?
कानूनी गारंटी के बिना एमएसपी केवल सरकारी घोषणा बनी रहती है और बाज़ार में दाम गिरने पर किसान के पास कोई कानूनी सहारा नहीं होता। पटवारी का कहना है कि डीजल, खाद, बीज और बिजली की बढ़ती लागत के बीच बिना गारंटी के एमएसपी किसान की वास्तविक समस्या हल नहीं करता।
राष्ट्र प्रेस
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