गेहूं MSP खरीद विवाद: MP में कोटा 100 लाख मीट्रिक टन हुआ, कमल नाथ ने लगाए गंभीर आरोप

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गेहूं MSP खरीद विवाद: MP में कोटा 100 लाख मीट्रिक टन हुआ, कमल नाथ ने लगाए गंभीर आरोप

सारांश

मध्य प्रदेश में गेहूं MSP खरीद का कोटा 78 से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया, लेकिन कांग्रेस नेता कमल नाथ ने आरोप लगाया कि 19 लाख पंजीकृत किसानों में से सिर्फ 7 लाख को स्लॉट मिला। सैटेलाइट सर्वे और बोरी की कमी से किसान परेशान हैं।

Key Takeaways

  • केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश का गेहूं MSP खरीद लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया।
  • 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन 23 अप्रैल 2025 तक केवल 7 लाख किसानों को स्लॉट मिला।
  • कांग्रेस नेता कमल नाथ ने आरोप लगाया कि बोरी की कमी और सैटेलाइट सर्वे आधारित रिजेक्शन किसानों को MSP से वंचित कर रहे हैं।
  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कोटा बढ़ोतरी को राज्य-केंद्र समन्वय की सफलता बताया और किसान हित में बड़ा कदम कहा।
  • राज्य में गेहूं खरीद 9 अप्रैल से शुरू होकर 15 अप्रैल 2025 से पूरे प्रदेश में विस्तारित की गई।
  • ग्रामीण विभाग और खाद्य विभाग मिलकर स्लॉट बुकिंग सरल करने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के प्रयास में लगे हैं।

भोपाल, 24 अप्रैल: मध्य प्रदेश में गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद को लेकर राजनीतिक तकरार तेज हो गई है। भाजपा सरकार ने जहां केंद्र से गेहूं खरीद लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कराने को किसान हितैषी फैसला बताया, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है और यह व्यवस्था किसानों के विरुद्ध काम कर रही है।

कमल नाथ के गंभीर आरोप

कमल नाथ ने शुक्रवार को प्रेस के सामने कहा कि भाजपा सरकार ने ऐसा जटिल जाल बिछाया है जिसमें किसान अपनी फसल MSP पर बेच ही नहीं पा रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद की शुरुआत में बोरी (गन्नी बैग) की कमी का बहाना बनाकर जानबूझकर देरी की गई, जिसके चलते छोटे और सीमांत किसानों को मजबूरी में बाजार में कम कीमत पर गेहूं बेचना पड़ा।

उन्होंने कहा कि जब खरीद प्रक्रिया शुरू हुई, तब भी स्लॉट बुकिंग की जटिल व्यवस्था ने किसानों की राह में रोड़े अटकाए। इससे भी बड़ी बात यह है कि सैटेलाइट सर्वे के आधार पर किसानों की खड़ी फसल को रिजेक्ट किया जा रहा है — एक ऐसी प्रक्रिया जिसे समझना आम किसान के लिए लगभग असंभव है।

आंकड़े जो सवाल उठाते हैं

कमल नाथ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य में गेहूं खरीद के लिए 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन 23 अप्रैल 2025 तक केवल लगभग 7 लाख किसान ही स्लॉट बुक करने में सफल रहे। यह अंतर — यानी 12 लाख से ज्यादा पंजीकृत किसान अभी भी स्लॉट के इंतजार में — सरकार की मंशा और क्षमता दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

यह विरोधाभास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्य प्रदेश देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक है और यहां के किसान हर साल MSP खरीद पर बड़ी उम्मीद लगाते हैं।

मुख्यमंत्री और सरकार का पक्ष

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को कहा कि खरीद लक्ष्य में 22 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय का नतीजा है। उनका कहना था कि इस फैसले का एकमात्र उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को MSP का लाभ दिलाना है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण विभाग और खाद्य विभाग मिलकर स्लॉट बुकिंग को सरल बनाने, खरीद केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं सुधारने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं।

खरीद प्रक्रिया की समयरेखा

राज्य में गेहूं की सरकारी खरीद 9 अप्रैल 2025 से कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में शुरू हुई थी। इसके बाद 15 अप्रैल से इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया गया ताकि फसल सीजन के दौरान खरीद व्यवस्था सुचारू रह सके।

गौरतलब है कि पिछले वर्षों में भी मध्य प्रदेश में MSP खरीद के दौरान स्लॉट बुकिंग, भुगतान में देरी और केंद्रों पर अव्यवस्था की शिकायतें आती रही हैं। इस बार कोटा बढ़ने के बावजूद यदि क्रियान्वयन की खामियां दूर नहीं हुईं, तो बड़े लक्ष्य का लाभ जमीन पर नहीं पहुंचेगा।

किसानों पर असर और आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट आधारित फसल सत्यापन की प्रक्रिया तकनीकी रूप से सटीक हो सकती है, लेकिन इसे किसानों तक समझाने और अपील की व्यवस्था बनाए बिना लागू करना छोटे किसानों के लिए नुकसानदेह साबित होता है।

अब देखना यह होगा कि क्या सरकार शेष 12 लाख पंजीकृत किसानों को सीजन खत्म होने से पहले स्लॉट दे पाती है और क्या 100 लाख मीट्रिक टन के नए लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। आने वाले हफ्तों में खरीद के आंकड़े ही तय करेंगे कि यह बढ़ोतरी महज घोषणा थी या किसानों के लिए वास्तविक राहत।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है। जब 19 लाख में से 12 लाख किसान स्लॉट के लिए तरस रहे हों, तो 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य महज एक बड़ा आंकड़ा बनकर रह जाता है। सैटेलाइट सर्वे आधारित फसल रिजेक्शन की व्यवस्था तकनीकी रूप से भले ही सही हो, पर इसे बिना किसान-प्रशिक्षण और अपील तंत्र के लागू करना छोटे किसानों के साथ अन्याय है। यह वही पैटर्न है जो हर साल दोहराया जाता है — बड़े लक्ष्य, बड़े दावे, लेकिन जमीन पर अव्यवस्था — और इस बार भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद का नया लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश का गेहूं MSP खरीद लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह बढ़ोतरी 22 लाख मीट्रिक टन की है, जिसे मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य-केंद्र समन्वय का परिणाम बताया।
कमल नाथ ने MP गेहूं खरीद पर क्या आरोप लगाए?
कमल नाथ ने आरोप लगाया कि 19 लाख पंजीकृत किसानों में से केवल 7 लाख को ही स्लॉट मिला। उन्होंने कहा कि बोरी की कमी, सैटेलाइट सर्वे से फसल रिजेक्शन और स्लॉट बुकिंग की जटिलता किसानों को MSP से वंचित कर रही है।
मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद कब से शुरू हुई?
राज्य में गेहूं की सरकारी खरीद 9 अप्रैल 2025 से कुछ क्षेत्रों में शुरू हुई और 15 अप्रैल से पूरे प्रदेश में विस्तारित की गई। इसका उद्देश्य फसल सीजन के दौरान खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाना था।
सैटेलाइट सर्वे से गेहूं खरीद में क्या समस्या हो रही है?
सैटेलाइट सर्वे के आधार पर किसानों की खड़ी फसल को रिजेक्ट किया जा रहा है, जिसे समझना आम किसान के लिए मुश्किल है। कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और अपील का तंत्र नहीं है।
MP में गेहूं खरीद कोटा बढ़ने से किसानों को क्या फायदा होगा?
सरकार का दावा है कि 100 लाख मीट्रिक टन के नए लक्ष्य से अधिक किसान MSP पर गेहूं बेच सकेंगे और उन्हें समय पर भुगतान मिलेगा। हालांकि विपक्ष का कहना है कि जब तक स्लॉट बुकिंग और खरीद केंद्रों की व्यवस्था नहीं सुधरती, बड़ा कोटा कागजी ही रहेगा।
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