ई20 पेट्रोल से खराब हुई एक कार का नाम बताओ: नितिन गडकरी की आलोचकों को खुली चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 7 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'विकसित भारत कॉन्क्लेव' में ई20 पेट्रोल कार्यक्रम के विरोधियों को सीधी चुनौती दी — यदि 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से किसी भी वाहन को नुकसान पहुँचा हो, तो बस एक कार का नाम सामने रखें। उन्होंने माइलेज घटने और वाहन क्षति के दावों को 'पेड कैंपेन' बताते हुए खारिज किया।
मुख्य घटनाक्रम
गडकरी ने कॉन्क्लेव में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'देश में ई20 पेट्रोल की वजह से किसी भी कार में खराबी आने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। अगर किसी कार को ई20 पेट्रोल से दिक्कत हुई है, तो उसका सिर्फ एक नाम बता दीजिए।' उन्होंने यह भी कहा कि उच्च इथेनॉल मिश्रण को लेकर जानबूझकर झूठी कहानियाँ गढ़ी जा रही हैं और ये सब प्रायोजित अभियान का हिस्सा हैं।
ई20 कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर चुका है। इथेनॉल गन्ना, मक्का और चावल जैसे जैविक स्रोतों से तैयार होता है और इसे पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल माना जाता है। गडकरी ने बताया कि भारत हर साल लगभग ₹22 लाख करोड़ का पेट्रोलियम ईंधन आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों पर भारी दबाव पड़ता है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं और भारत की ऊर्जा आयात निर्भरता कम करना नीतिगत प्राथमिकता बन चुकी है। गौरतलब है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया है।
किसानों पर असर
गडकरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के आर्थिक पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि इस योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिला है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में इस कार्यक्रम की वजह से लगभग ₹45,000 करोड़ की अतिरिक्त आय पहुँची है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
हितों के टकराव पर सफाई
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने उन आरोपों का भी सामना किया जिनमें कहा जाता है कि इथेनॉल नीति से उनके परिवार के व्यावसायिक हित जुड़े हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके परिवार के सदस्य चीनी मिलों से संबद्ध हैं, लेकिन यह स्पष्ट किया कि उनका कारोबार इथेनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं है।
क्या होगा आगे
इथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल का आयात घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है। विशेषज्ञों का मानना है कि ई20 कार्यक्रम की सफलता अब क्रियान्वयन की पारदर्शिता और स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण पर निर्भर करेगी, ताकि वाहन उद्योग और उपभोक्ताओं की आशंकाओं का समाधान हो सके।