गेहूं खरीद में किसानों से माफी मांगे MP सरकार: कमलनाथ का बड़ा आरोप, CM मोहन यादव ने दिया जवाब
सारांश
Key Takeaways
- कमलनाथ ने MP की भाजपा सरकार पर MSP गेहूं खरीद में जानबूझकर बाधाएं डालने का आरोप लगाया।
- 23 अप्रैल तक 19 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन केवल 7 लाख को ही स्लॉट मिला।
- सैटेलाइट सर्वे के आधार पर छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग खारिज होने से विवाद बढ़ा।
- CM मोहन यादव ने गेहूं खरीद सप्ताह में 6 दिन करने और स्लॉट बुकिंग 9 मई तक बढ़ाने की घोषणा की।
- कमलनाथ ने 2,700 रुपए प्रति क्विंटल MSP का वादा पूरा न होने पर सरकार से सार्वजनिक माफी की मांग की।
- पिछले साल MP में 2.45 करोड़ टन गेहूं उत्पादन के मुकाबले सरकार का खरीद लक्ष्य केवल 1 करोड़ टन है।
भोपाल, 24 अप्रैल। मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर किसानों की राह में रोड़े अटका रही है, ताकि कुल खरीद की मात्रा कम रहे और बिचौलिए फायदा उठाते रहें। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सफाई देते हुए खरीद प्रक्रिया सप्ताह में छह दिन जारी रखने और स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 9 मई तक बढ़ाने की घोषणा की।
कमलनाथ के प्रमुख आरोप
कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार ने शुरुआत में गन्नी बैग (बोरी) की कमी का बहाना बनाकर खरीद प्रक्रिया लगभग एक महीने तक टाल दी। इस देरी का सबसे बड़ा खामियाजा छोटे किसानों को भुगतना पड़ा, जिन्हें मजबूरी में अपना गेहूं बिचौलियों को MSP से कम कीमत पर बेचना पड़ा।
जब खरीद शुरू हुई, तब भी सरकार ने सैटेलाइट सर्वे के आधार पर छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग खारिज कर दी। किसान हैरान थे कि खेत में फसल खड़ी होने के बावजूद उनकी उपज क्यों नहीं खरीदी जा रही। कमलनाथ ने इसे तकनीकी बाधा की आड़ में भेदभाव करार दिया।
उन्होंने एक और नीतिगत विरोधाभास उजागर किया — सरकार ने व्यवस्था बनाई कि पहले 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा, फिर बड़े किसानों का। कमलनाथ का तर्क है कि यह एक सोची-समझी चाल है, क्योंकि अधिकांश छोटे किसान पहले ही बिचौलियों को अनाज बेच चुके हैं, इसलिए इस प्राथमिकता का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं होगा।
आंकड़े जो सरकार की पोल खोलते हैं
कमलनाथ ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 23 अप्रैल तक राज्य में 19 लाख किसानों ने MSP पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया, लेकिन इनमें से केवल लगभग 7 लाख किसान ही स्लॉट बुक कर सके। यानी करीब 12 लाख किसान अभी भी प्रतीक्षा में हैं।
उन्होंने सरकार के 1 करोड़ टन गेहूं खरीद लक्ष्य को भी अपर्याप्त बताया। उनके अनुसार, पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में 2.45 करोड़ टन गेहूं उत्पादन हुआ था और इस वर्ष उत्पादन और अधिक होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में 1 करोड़ टन का लक्ष्य महज 40 प्रतिशत से भी कम खरीद को दर्शाता है।
कमलनाथ ने मांग की कि सरकार 2,700 रुपए प्रति क्विंटल MSP का वादा पूरा न कर पाने के लिए किसानों से सार्वजनिक माफी मांगे, स्लॉट और सैटेलाइट सर्वे की समस्याएं तत्काल सुलझाए और अधिकतम खरीद सुनिश्चित करे।
सरकार की प्रतिक्रिया और CM मोहन यादव का आश्वासन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को एक संबोधन में कहा कि अब गेहूं खरीद सप्ताह में छह दिन जारी रहेगी और शनिवार को कोई अवकाश नहीं होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''जरूरत पड़ने पर इस अवधि को और बढ़ाया जा सकता है। हमारी सरकार का दृढ़ संकल्प है कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और राज्य सरकार हर स्थिति में किसानों के साथ खड़ी है।''
उल्लेखनीय है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब केंद्र सरकार ने हाल ही में मध्य प्रदेश को MSP पर 1 करोड़ टन गेहूं खरीदने की अनुमति दी थी। केंद्र की मंजूरी के बाद भी जमीनी स्तर पर किसानों की परेशानियां खत्म न होना, राज्य सरकार की क्रियान्वयन क्षमता पर सवाल खड़े करता है।
किसानों पर व्यापक असर और राजनीतिक संदर्भ
मध्य प्रदेश देश के शीर्ष गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक है। यहां के लाखों छोटे और सीमांत किसान रबी सीजन में गेहूं की बिक्री पर अपनी आजीविका निर्भर रखते हैं। MSP प्रक्रिया में बाधाएं सीधे उनकी आय को प्रभावित करती हैं और बिचौलियों की ताकत बढ़ाती हैं।
गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने किसान हितों को केंद्र में रखकर बड़ी जीत हासिल की थी। ऐसे में MSP खरीद में कथित लापरवाही न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि भाजपा की राजनीतिक साख को भी चुनौती देती है। 2026 के स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह मुद्दा विपक्ष के लिए एक मजबूत हथियार बन सकता है।
आने वाले दिनों में 9 मई तक स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया और गेहूं खरीद की प्रगति पर सभी की नजर रहेगी। यदि सरकार अपने 1 करोड़ टन के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाती, तो यह विवाद और गहरा हो सकता है।