किसानों को दिन में बिजली और गेहूं खरीद का लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन: MP CM मोहन यादव का बड़ा फैसला
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 24 अप्रैल 2025 को किसानों को दिन में पर्याप्त बिजली देने का आश्वासन दिया।
- गेहूं खरीद लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया — केंद्र सरकार की मंजूरी मिली।
- स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई की गई; खरीद केंद्र सप्ताह में 6 दिन खुलेंगे।
- 'कृषक मित्र योजना' के तहत 90%25 सब्सिडी पर सोलर पंप वितरित किए जा रहे हैं।
- उड़द किसानों को एमएसपी के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा।
- 'भावांतर योजना' के तहत सरसों उत्पादक किसान पहले से बेहतर कीमतों का लाभ उठा रहे हैं।
भोपाल, 24 अप्रैल — मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को किसानों के हित में दो अहम घोषणाएं कीं — पहली, प्रदेश के किसानों को अब दिन के समय पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी; और दूसरी, इस रबी सीजन में गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है, जिसके लिए केंद्र सरकार की स्वीकृति भी मिल चुकी है। सीएम ने इसे किसानों की अथक मेहनत का सम्मान बताया।
गेहूं खरीद में बड़ी राहत: स्लॉट बुकिंग 9 मई तक
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुकिंग अब छोटे और बड़े — सभी किसानों के लिए पूरी तरह खोल दी गई है। इससे पहले सीमित स्लॉट के कारण कई किसान पंजीकरण नहीं करा पाते थे।
खरीद केंद्र अब सप्ताह में छह दिन — शनिवार को भी — संचालित होंगे। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है, ताकि कोई भी किसान इस सुविधा से वंचित न रहे।
दिन में बिजली और सोलर पंप: सिंचाई पर फोकस
सिंचाई के लिए रात में बिजली मिलने की पुरानी समस्या से किसान लंबे समय से परेशान रहे हैं। सीएम मोहन यादव ने घोषणा की कि अब दिन के समय पर्याप्त बिजली सुनिश्चित करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही 'कृषक मित्र योजना' के तहत किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप वितरित किए जा रहे हैं। यह कदम दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।
दलहन-तिलहन को प्रोत्साहन: उड़द पर 600 रुपये बोनस
मुख्यमंत्री यादव ने दलहन और तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाओं की भी घोषणा की। एमएसपी पर उड़द (काली चना) की खरीद के साथ-साथ 600 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जाएगा।
इसके अलावा किसान 'भावांतर योजना' के तहत सरसों की बेहतर कीमतों का लाभ पहले से उठा रहे हैं। यह योजना बाजार मूल्य और एमएसपी के बीच के अंतर की भरपाई सरकार द्वारा की जाती है।
विश्लेषण: राजनीतिक संदर्भ और जमीनी हकीकत
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश के सबसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में से एक है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में गेहूं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन खरीद लक्ष्य और वास्तविक उत्पादन के बीच का अंतर किसानों को निजी व्यापारियों पर निर्भर बनाता था, जो अक्सर एमएसपी से कम कीमत देते थे।
खरीद लक्ष्य को 78 लाख से 100 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाना — यानी लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि — एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां दूर से ही दिखने लगी हैं और किसान वर्ग एक निर्णायक मतदाता समूह है।
दिन में बिजली का वादा नया नहीं है — यह मांग वर्षों से किसान संगठन उठाते रहे हैं। अब इसे नीतिगत प्राथमिकता देना सरकार के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता ही इसकी असली कसौटी होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में '2047 तक विकसित मध्य प्रदेश' के लक्ष्य को साकार करने में कृषि क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए सीएम यादव ने कहा कि सरकार 'अन्नदाताओं' के साथ हर कदम पर खड़ी रहेगी। आने वाले हफ्तों में स्लॉट बुकिंग की प्रगति और खरीद केंद्रों की कार्यक्षमता यह तय करेगी कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी उतरती हैं।