26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

किसानों का गेहूं नहीं खरीदना चाहती MP सरकार — कमलनाथ का मोहन यादव पर बड़ा हमला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
किसानों का गेहूं नहीं खरीदना चाहती MP सरकार — कमलनाथ का मोहन यादव पर बड़ा हमला

सारांश

मध्य प्रदेश में गेहूं MSP खरीद पर कांग्रेस नेता कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार को घेरा। 19 लाख पंजीकरण के बावजूद सिर्फ 7 लाख स्लॉट बुक, बारदाना संकट और सैटेलाइट सर्वे को लेकर किसानों में भारी असंतोष। कमलनाथ ने 2700 रुपये MSP न देने पर माफी माँगने की माँग की।

मुख्य बातें

कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर किसानों को एमएसपी पर गेहूं बेचने से रोक रही है।
23 अप्रैल तक 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन केवल 7 लाख के स्लॉट बुक हो सके।
बारदाने की कमी के कारण गेहूं खरीद प्रक्रिया करीब एक महीना देरी से शुरू हुई, जिससे छोटे किसान बिचौलियों के चंगुल में फँसे।
सैटेलाइट सर्वे के आधार पर छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग अस्वीकृत की जा रही है, जिससे वे एमएसपी से वंचित हो रहे हैं।
सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि राज्य में 245 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं उत्पादन हुआ है।
कमलनाथ ने माँग की कि भाजपा 2700 रुपये प्रति क्विंटल MSP न देने के लिए किसानों से सार्वजनिक माफी माँगे।

भोपाल, 24 अप्रैल: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार की नीयत ही नहीं है कि किसानों का गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक के बाद एक ऐसे अवरोध खड़े किए हैं जिससे किसान एमएसपी पर गेहूं बेचने से वंचित रह जाएं। राज्य में इस समय गेहूं की एमएसपी खरीद प्रक्रिया जारी है।

बारदाने की कमी से लेकर सैटेलाइट सर्वे तक — किसानों के सामने एक के बाद एक अड़चनें

कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सबसे पहले बारदाने की कमी का बहाना बनाकर गेहूं खरीद प्रक्रिया को करीब एक महीना पीछे धकेल दिया। इसका सीधा खामियाजा छोटे किसानों को भुगतना पड़ा जो भंडारण की सुविधा न होने के कारण बिचौलियों को औने-पौने दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हो गए।

जब खरीद प्रक्रिया शुरू हुई, तो सैटेलाइट सर्वे का हवाला देकर छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग अस्वीकृत कर दी गई। किसान यह समझने में असमर्थ हैं कि उनके खेत में खड़ी फसल को सैटेलाइट से क्यों नकारा जा रहा है। इसके बाद भी स्लॉट बुकिंग में लगातार तकनीकी समस्याएं बनी हुई हैं।

मझोले और बड़े किसानों के खिलाफ नया 'कुचक्र'

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे किसानों को उलझाने के बाद सरकार मझोले और बड़े किसानों के विरुद्ध एक नई व्यवस्था लेकर आई। इसके तहत यह तय किया गया कि पहले पाँच एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा, उसके बाद बाकी किसानों की बारी आएगी।

कमलनाथ के अनुसार सरकार को भलीभाँति पता है कि जब तक बड़े किसानों की बारी आएगी, तब तक छोटे किसान पहले ही बिचौलियों को गेहूं बेच चुके होंगे। इस प्रकार दोनों वर्गों के किसानों से न्यूनतम गेहूं खरीदी सुनिश्चित करने की रणनीति बना ली गई है।

सरकारी आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं 'षड्यंत्र'

23 अप्रैल तक के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कमलनाथ ने बताया कि मध्य प्रदेश में 19 लाख से अधिक किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से केवल करीब 7 लाख किसानों के स्लॉट ही बुक हो सके हैं। रजिस्ट्रेशन और स्लॉट आवंटन के बीच यह 12 लाख का भारी अंतर सरकार की मंशा को उजागर करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य महज दिखावा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में लगभग 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था और सरकार खुद मान रही है कि इस बार उत्पादन उससे भी अधिक है। ऐसे में कुल उत्पादन के मुकाबले खरीद का लक्ष्य बेहद कम रखा गया है।

कमलनाथ की माँगें — माफी और 2700 रुपये MSP

कमलनाथ ने सरकार से माँग की है कि स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे से जुड़ी समस्याओं को तत्काल दूर किया जाए और अधिकतम किसानों से गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने किसानों से 2700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी देने का वादा किया था, जिसे पूरा न करने के लिए उसे किसानों से माफी माँगनी चाहिए।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में किसान एमएसपी की गारंटी की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं। यदि स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे की समस्याएँ जल्द नहीं सुलझाई गईं, तो लाखों किसानों को सरकारी मूल्य से वंचित रहकर निजी व्यापारियों पर निर्भर होना पड़ सकता है — जो आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यानी 60% से अधिक किसान अभी भी प्रतीक्षारत हैं। विडंबना यह है कि सरकार 100 लाख मीट्रिक टन खरीद का दावा करती है जबकि कुल उत्पादन 245 लाख मीट्रिक टन से अधिक है — यानी खरीद लक्ष्य उत्पादन का महज 40% है। बारदाना संकट और सैटेलाइट सर्वे जैसी तकनीकी अड़चनें यदि प्रशासनिक लापरवाही नहीं हैं, तो ये नीतिगत विफलता जरूर हैं जिसका सीधा खामियाजा सीमांत किसानों को उठाना पड़ रहा है। यह मुद्दा 2026 के संभावित चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है क्योंकि मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में गेहूं की केंद्रीय भूमिका है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमलनाथ ने मध्य प्रदेश सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि मोहन यादव सरकार ने जानबूझकर किसानों को एमएसपी पर गेहूं बेचने से रोकने के लिए बारदाना संकट, सैटेलाइट सर्वे अस्वीकृति और स्लॉट बुकिंग में अड़चनें पैदा की हैं। उनके अनुसार यह एक सुनियोजित चक्रव्यूह है।
मध्य प्रदेश में गेहूं MSP खरीद के आंकड़े क्या हैं?
23 अप्रैल तक 19 लाख से अधिक किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन केवल करीब 7 लाख किसानों के स्लॉट बुक हो सके हैं। यह 12 लाख का अंतर किसानों की बड़ी समस्या को दर्शाता है।
मध्य प्रदेश में गेहूं का MSP 2025 में कितना है?
कमलनाथ के अनुसार भाजपा ने किसानों से 2700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी देने का वादा किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह वादा पूरा नहीं कर रही और इसके लिए माफी माँगनी चाहिए।
सैटेलाइट सर्वे से किसानों की स्लॉट बुकिंग क्यों अस्वीकृत हो रही है?
मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद के लिए सैटेलाइट सर्वे के आधार पर फसल सत्यापन किया जा रहा है, जिसमें तकनीकी खामियों के कारण कई छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग अस्वीकृत हो रही है। किसान यह समझ नहीं पा रहे कि खड़ी फसल के बावजूद उनका आवेदन क्यों रद्द हो रहा है।
मध्य प्रदेश में कुल कितने गेहूं उत्पादन का लक्ष्य और खरीद लक्ष्य है?
पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में करीब 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन हुआ था और इस बार उत्पादन उससे अधिक होने का दावा है। इसके बावजूद सरकार ने केवल 100 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा है, जो कुल उत्पादन का लगभग 40% है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले