किसानों का गेहूं नहीं खरीदना चाहती MP सरकार — कमलनाथ का मोहन यादव पर बड़ा हमला
सारांश
Key Takeaways
- कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर किसानों को एमएसपी पर गेहूं बेचने से रोक रही है।
- 23 अप्रैल तक 19 लाख से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन केवल 7 लाख के स्लॉट बुक हो सके।
- बारदाने की कमी के कारण गेहूं खरीद प्रक्रिया करीब एक महीना देरी से शुरू हुई, जिससे छोटे किसान बिचौलियों के चंगुल में फँसे।
- सैटेलाइट सर्वे के आधार पर छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग अस्वीकृत की जा रही है, जिससे वे एमएसपी से वंचित हो रहे हैं।
- सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा है, जबकि राज्य में 245 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं उत्पादन हुआ है।
- कमलनाथ ने माँग की कि भाजपा 2700 रुपये प्रति क्विंटल MSP न देने के लिए किसानों से सार्वजनिक माफी माँगे।
भोपाल, 24 अप्रैल: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य सरकार की नीयत ही नहीं है कि किसानों का गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक के बाद एक ऐसे अवरोध खड़े किए हैं जिससे किसान एमएसपी पर गेहूं बेचने से वंचित रह जाएं। राज्य में इस समय गेहूं की एमएसपी खरीद प्रक्रिया जारी है।
बारदाने की कमी से लेकर सैटेलाइट सर्वे तक — किसानों के सामने एक के बाद एक अड़चनें
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने सबसे पहले बारदाने की कमी का बहाना बनाकर गेहूं खरीद प्रक्रिया को करीब एक महीना पीछे धकेल दिया। इसका सीधा खामियाजा छोटे किसानों को भुगतना पड़ा जो भंडारण की सुविधा न होने के कारण बिचौलियों को औने-पौने दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हो गए।
जब खरीद प्रक्रिया शुरू हुई, तो सैटेलाइट सर्वे का हवाला देकर छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग अस्वीकृत कर दी गई। किसान यह समझने में असमर्थ हैं कि उनके खेत में खड़ी फसल को सैटेलाइट से क्यों नकारा जा रहा है। इसके बाद भी स्लॉट बुकिंग में लगातार तकनीकी समस्याएं बनी हुई हैं।
मझोले और बड़े किसानों के खिलाफ नया 'कुचक्र'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे किसानों को उलझाने के बाद सरकार मझोले और बड़े किसानों के विरुद्ध एक नई व्यवस्था लेकर आई। इसके तहत यह तय किया गया कि पहले पाँच एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा, उसके बाद बाकी किसानों की बारी आएगी।
कमलनाथ के अनुसार सरकार को भलीभाँति पता है कि जब तक बड़े किसानों की बारी आएगी, तब तक छोटे किसान पहले ही बिचौलियों को गेहूं बेच चुके होंगे। इस प्रकार दोनों वर्गों के किसानों से न्यूनतम गेहूं खरीदी सुनिश्चित करने की रणनीति बना ली गई है।
सरकारी आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं 'षड्यंत्र'
23 अप्रैल तक के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कमलनाथ ने बताया कि मध्य प्रदेश में 19 लाख से अधिक किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से केवल करीब 7 लाख किसानों के स्लॉट ही बुक हो सके हैं। रजिस्ट्रेशन और स्लॉट आवंटन के बीच यह 12 लाख का भारी अंतर सरकार की मंशा को उजागर करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य महज दिखावा है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में लगभग 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था और सरकार खुद मान रही है कि इस बार उत्पादन उससे भी अधिक है। ऐसे में कुल उत्पादन के मुकाबले खरीद का लक्ष्य बेहद कम रखा गया है।
कमलनाथ की माँगें — माफी और 2700 रुपये MSP
कमलनाथ ने सरकार से माँग की है कि स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे से जुड़ी समस्याओं को तत्काल दूर किया जाए और अधिकतम किसानों से गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा ने किसानों से 2700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी देने का वादा किया था, जिसे पूरा न करने के लिए उसे किसानों से माफी माँगनी चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में किसान एमएसपी की गारंटी की माँग को लेकर आंदोलनरत हैं। यदि स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे की समस्याएँ जल्द नहीं सुलझाई गईं, तो लाखों किसानों को सरकारी मूल्य से वंचित रहकर निजी व्यापारियों पर निर्भर होना पड़ सकता है — जो आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से महंगा साबित हो सकता है।