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ई20 पेट्रोल से कार खराब: रायपुर उपभोक्ता अदालत का देश का पहला फैसला, मारुति ग्रैंड विटारा बदलने का आदेश

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ई20 पेट्रोल से कार खराब: रायपुर उपभोक्ता अदालत का देश का पहला फैसला, मारुति ग्रैंड विटारा बदलने का आदेश

सारांश

ई20 पेट्रोल से मारुति ग्रैंड विटारा खराब होने पर रायपुर उपभोक्ता अदालत ने देश का पहला फैसला सुनाया — कंपनी को 45 दिन में कार बदलनी होगी या ₹20,50,494 चुकाने होंगे। यह निर्णय देशभर के उन वाहन मालिकों के लिए मिसाल बन सकता है जो ई20 ईंधन से नुकसान झेल रहे हैं।

मुख्य बातें

रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 14 जुलाई 2025 को ई20 पेट्रोल से वाहन क्षति पर देश का पहला उपभोक्ता फैसला सुनाया।
उपभोक्ता प्रेमराज देवता की मारुति ग्रैंड विटारा में ई20 पेट्रोल से इंजन खराबी, मिसफायरिंग और माइलेज गिरावट की शिकायत थी।
आयोग ने संबंधित पक्षकारों को 45 दिनों के भीतर नई ई20-समर्थित कार देने या ₹20,50,494 भुगतान करने का आदेश दिया।
मानसिक क्षति के लिए ₹1 लाख और मुकदमा खर्च के लिए ₹10,000 अतिरिक्त देय होंगे।
समय पर भुगतान न होने पर 7% वार्षिक ब्याज भी लागू होगा।
आयोग ने माना कि अधिकांश पंपों पर केवल ई20 उपलब्ध होने से उपभोक्ता के पास कोई वैकल्पिक ईंधन विकल्प नहीं था।

रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 14 जुलाई 2025 को ई20 पेट्रोल से वाहन को हुए नुकसान के मामले में देश का पहला उपभोक्ता फैसला सुनाते हुए प्रेमराज देवता के पक्ष में आदेश जारी किया। आयोग ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता की मारुति ग्रैंड विटारा कार बदलें, अन्यथा ₹20,50,494 की राशि का भुगतान करें।

मामले की पृष्ठभूमि

उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने आरोप लगाया था कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा में ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद से लगातार गंभीर समस्याएं उत्पन्न होने लगीं। शिकायत में इंजन संबंधी खराबी, वाहन की परफॉर्मेंस में गिरावट, मिसफायरिंग और माइलेज में लगातार कमी जैसी तकनीकी परेशानियों का विस्तार से उल्लेख किया गया। उनका कहना था कि बार-बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत कराने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

इस परिवाद को ऑनलाइन 12 मार्च 2025 को दर्ज किया गया था और इसका औपचारिक पंजीयन 16 अप्रैल 2025 को हुआ। मात्र तीन महीनों में आयोग ने 14 जुलाई 2025 को अपना निर्णय सुना दिया।

आयोग के प्रमुख निष्कर्ष

आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने एक महत्वपूर्ण तथ्य को रेखांकित किया कि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 ईंधन ही उपलब्ध कराया जा रहा था, जिसके कारण उपभोक्ता के पास व्यावहारिक रूप से कोई वैकल्पिक ईंधन विकल्प नहीं था। यह निष्कर्ष इस मामले को कानूनी दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूरे देश में ई20 ईंधन के प्रसार को बढ़ावा दे रही है और वाहन निर्माताओं को ई20-अनुकूल इंजन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

आयोग का आदेश

आयोम ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे उपभोक्ता की पुरानी कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई ई20 ईंधन-समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। यदि निर्धारित अवधि में वाहन नहीं बदला जाता है, तो विपक्षी पक्षकारों को वाहन की कीमत और संबंधित खर्चों सहित कुल ₹20,50,494 का भुगतान करना होगा।

इसके अतिरिक्त, आयोग ने मानसिक परेशानी के मुआवज़े के रूप में ₹1 लाख और मुकदमे के खर्च के लिए ₹10,000 अलग से देने का आदेश दिया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि 45 दिनों के भीतर भुगतान न होने पर भुगतान की तारीख तक 7% वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

आम उपभोक्ताओं पर असर

यह फैसला उन लाखों वाहन मालिकों के लिए एक मिसाल बन सकता है जो ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद अपने वाहनों में तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। देश में ई20 ईंधन का प्रसार तेज़ी से हो रहा है, लेकिन पुराने वाहनों की ई20-अनुकूलता को लेकर उपभोक्ताओं में पहले से ही संशय था।

आलोचकों का कहना है कि सरकार और तेल कंपनियों को ई20 ईंधन के व्यापक रोलआउट से पहले उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से सूचित करना चाहिए था कि कौन से वाहन इस ईंधन के लिए उपयुक्त हैं। यह फैसला उस दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक संकेत है।

आगे की राह

यह देश का पहला ऐसा फैसला है जो ई20 पेट्रोल से वाहन को हुए नुकसान पर उपभोक्ता के हक में आया है। माना जा रहा है कि इस निर्णय के बाद देश भर में इसी तरह के मामले उपभोक्ता अदालतों में दायर हो सकते हैं। संबंधित पक्षकारों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ई20 से हुए नुकसान की ज़िम्मेदारी तय होनी ही थी। असली सवाल यह है कि क्या इस फैसले के बाद वाहन निर्माता और तेल विपणन कंपनियाँ ई20 अनुकूलता को लेकर उपभोक्ताओं को पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी देना शुरू करेंगी, या देशभर की उपभोक्ता अदालतों को इसी तरह के सैकड़ों मामलों से जूझना पड़ेगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई20 पेट्रोल विवाद में रायपुर अदालत का फैसला क्या है?
रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 14 जुलाई 2025 को उपभोक्ता प्रेमराज देवता के पक्ष में फैसला सुनाया और संबंधित पक्षकारों को 45 दिनों के भीतर मारुति ग्रैंड विटारा बदलने या ₹20,50,494 का भुगतान करने का आदेश दिया। यह ई20 पेट्रोल से वाहन क्षति पर देश का पहला उपभोक्ता अदालत का निर्णय है।
ई20 पेट्रोल से मारुति ग्रैंड विटारा में क्या समस्याएं आईं?
उपभोक्ता प्रेमराज देवता के अनुसार, ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद उनकी मारुति ग्रैंड विटारा में इंजन खराबी, परफॉर्मेंस में गिरावट, मिसफायरिंग और माइलेज में लगातार कमी आने लगी। बार-बार सर्विस सेंटर में मरम्मत कराने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला क्यों दिया?
आयोग ने माना कि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 ईंधन उपलब्ध होने के कारण उपभोक्ता के पास व्यावहारिक रूप से कोई वैकल्पिक ईंधन विकल्प नहीं था। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया गया।
अगर कंपनी 45 दिनों में कार नहीं बदलती तो क्या होगा?
यदि संबंधित पक्षकार 45 दिनों के भीतर नई ई20-समर्थित कार नहीं देते, तो उन्हें वाहन की कीमत और खर्चों सहित ₹20,50,494 का भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त, भुगतान में देरी पर 7% वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
इस फैसले का देश के अन्य ई20 पेट्रोल उपयोगकर्ताओं पर क्या असर होगा?
यह देश का पहला ऐसा फैसला है जो ई20 पेट्रोल से वाहन क्षति पर उपभोक्ता के हक में आया है, इसलिए यह भविष्य के मामलों में एक न्यायिक मिसाल बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देशभर में इसी तरह की शिकायतें उपभोक्ता अदालतों में दायर होने की संभावना बढ़ गई है।
राष्ट्र प्रेस
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