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ई-जागृति को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में रजत सम्मान, 2.07 लाख उपभोक्ता मामले निपटाए

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ई-जागृति को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में रजत सम्मान, 2.07 लाख उपभोक्ता मामले निपटाए

सारांश

उपभोक्ता मामले विभाग के ई-जागृति प्लेटफॉर्म को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में रजत सम्मान मिला। जनवरी 2025 से अब तक 2.07 लाख से अधिक मामले निपटाए जा चुके हैं और 90.75% निपटान दर दर्ज हुई है। चार पुरानी प्रणालियों को एकीकृत कर बना यह AI-सक्षम प्लेटफॉर्म NRI उपभोक्ताओं को भी न्याय दिला रहा है।

मुख्य बातें

ई-जागृति को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
प्लेटफॉर्म ने 2.29 लाख से अधिक मामले दर्ज कर 2.07 लाख से अधिक मामले निपटाए; निपटान दर 90.75% ।
वित्त वर्ष 2025-26 में उपभोक्ता आयोगों की निपटान दर बढ़कर 92.30% हुई, जो पिछले वर्ष 89.47% थी।
पंजीकृत NRI उपयोगकर्ता 3,312 हुए; अब तक 61 NRI मामले निपटाए गए।
यह पुरस्कार 341 नामांकनों की प्रतिस्पर्धा में प्राप्त हुआ।
उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सहित 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में निपटान दर 100% से अधिक रही।

उपभोक्ता मामले विभाग के ई-जागृति डिजिटल प्लेटफॉर्म को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में रजत पुरस्कार से नवाज़ा गया है। प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा प्रदत्त यह सम्मान 'डिजिटल परिवर्तन हेतु प्रौद्योगिकी के उपयोग द्वारा सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन — श्रेणी-I' के अंतर्गत दिया गया। 7 जून 2026 को सरकार की ओर से इसकी जानकारी साझा की गई।

ई-जागृति क्या है और कैसे काम करता है

जनवरी 2025 में शुरू किया गया ई-जागृति प्लेटफॉर्म चार पुरानी प्रणालियों — OCMS, ई-दाखिल, NCDRC CMS और CONFONET — को एक एकीकृत, AI-सक्षम और पेपरलेस ढाँचे में समेटता है। यह उपभोक्ताओं को भारत या विदेश में कहीं से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने, मामले की प्रगति रियल-टाइम में ट्रैक करने और उपभोक्ता आयोगों तक शारीरिक रूप से पहुँचे बिना वर्चुअल सुनवाई में भाग लेने की सुविधा देता है।

मुख्य उपलब्धियाँ और आँकड़े

प्रारंभ से अब तक इस प्लेटफॉर्म पर 2.29 लाख से अधिक उपभोक्ता मामले दर्ज हुए हैं और 2.07 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है। इस प्रकार पोर्टल पर कुल 90.75 प्रतिशत की निपटान दर दर्ज हुई है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उपभोक्ता आयोगों ने 1,65,456 मामले दर्ज किए और 1,52,707 मामले निपटाए — निपटान दर 92.30 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 2024-25 की 89.47 प्रतिशत की तुलना में उल्लेखनीय सुधार है।

वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में 38,944 दर्ज मामलों में से 34,600 का निपटारा हुआ, जिससे 88.84 प्रतिशत की निपटान दर प्राप्त हुई — यह वित्त वर्ष 2024-25 की समान तिमाही से अधिक है।

एनआरआई उपभोक्ताओं के लिए विशेष सुविधा

ई-जागृति ने अनिवासी भारतीयों (NRI) को भारत लौटे बिना उपभोक्ता न्याय प्राप्त करने का मार्ग खोला है। पंजीकृत NRI उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर 3,312 हो गई है और अब तक कुल 61 NRI मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

पुरस्कार चयन प्रक्रिया और राज्यों का प्रदर्शन

यह सम्मान केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों से प्राप्त 341 नामांकनों की गहन मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद प्रदान किया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में NCDRC के अतिरिक्त उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश), मध्य प्रदेश, पंजाब, मेघालय, राजस्थान, कर्नाटक और अरुणाचल प्रदेश उन राज्यों में शामिल रहे जहाँ निपटान दर 100 प्रतिशत से अधिक रही।

यह पुरस्कार ऐसे समय में मिला है जब डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं की पहुँच और दक्षता को लेकर नागरिकों की अपेक्षाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। आने वाले समय में इस प्लेटफॉर्म के और विस्तार और अधिक राज्यों में उच्च निपटान दर हासिल करने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये मामले वास्तव में उपभोक्ता के पक्ष में निपटे या केवल 'बंद' हुए। डिजिटल पहुँच ने प्रक्रिया को सुगम बनाया है, परंतु न्याय की गुणवत्ता — यानी उपभोक्ता को वास्तव में कितना मुआवज़ा या राहत मिली — इस पुरस्कार की कसौटी नहीं थी। NRI उपयोगकर्ताओं की संख्या 3,312 तक पहुँचना उत्साहजनक है, लेकिन केवल 61 निपटाए गए NRI मामले यह संकेत देते हैं कि इस वर्ग के लिए अभी भी लंबा रास्ता तय करना है। पुरस्कार प्रक्रिया सुधार को मान्यता देता है — और यह सराहनीय है — किंतु नागरिक-केंद्रित सेवा का अंतिम मानदंड संतुष्ट उपभोक्ता होना चाहिए, न केवल उच्च निपटान दर।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-जागृति प्लेटफॉर्म क्या है?
ई-जागृति उपभोक्ता मामले विभाग का एकीकृत AI-सक्षम डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया। यह OCMS, ई-दाखिल, NCDRC CMS और CONFONET — चार पुरानी प्रणालियों — को एक पेपरलेस ढाँचे में समेटता है और उपभोक्ताओं को कहीं से भी शिकायत दर्ज कराने व वर्चुअल सुनवाई की सुविधा देता है।
ई-जागृति को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में कौन-सा सम्मान मिला?
ई-जागृति को प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा 'डिजिटल परिवर्तन हेतु प्रौद्योगिकी उपयोग — सरकारी प्रक्रिया पुनर्गठन श्रेणी-I' के अंतर्गत रजत पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार 341 नामांकनों की प्रतिस्पर्धा में प्राप्त हुआ।
ई-जागृति पर अब तक कितने उपभोक्ता मामले निपटाए गए हैं?
जनवरी 2025 में शुरुआत से अब तक 2.29 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए हैं और 2.07 लाख से अधिक मामले निपटाए गए हैं। इस प्रकार पोर्टल पर 90.75 प्रतिशत की निपटान दर दर्ज की गई है।
क्या NRI उपभोक्ता भी ई-जागृति का उपयोग कर सकते हैं?
हाँ, ई-जागृति अनिवासी भारतीयों (NRI) को भारत वापस आए बिना उपभोक्ता न्याय दिलाने में सक्षम बनाता है। अब तक 3,312 NRI उपयोगकर्ता पंजीकृत हुए हैं और 61 NRI मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
वित्त वर्ष 2025-26 में उपभोक्ता आयोगों का प्रदर्शन कैसा रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में उपभोक्ता आयोगों ने 1,65,456 मामले दर्ज कर 1,52,707 मामले निपटाए और 92.30 प्रतिशत की निपटान दर हासिल की। यह वित्त वर्ष 2024-25 की 89.47 प्रतिशत की दर से बेहतर है।
राष्ट्र प्रेस
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