आईसीएमआर-माइंड्स को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस 2026 में गोल्ड अवॉर्ड, AI से मानसिक स्वास्थ्य सेवा में क्रांति
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की महत्वाकांक्षी परियोजना आईसीएमआर-माइंड्स को 5 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में प्रतिष्ठित गोल्ड अवॉर्ड से नवाज़ा गया। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने यह सम्मान 'नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के लिए एआई और अन्य उभरती तकनीकों के नवाचारी उपयोग' श्रेणी में दिया।
पुरस्कार समारोह और प्रमुख उपस्थिति
यह पुरस्कार जयपुर में 1 और 2 जुलाई 2026 को आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन-2026 के दौरान प्रदान किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह सम्मान प्रदान किया। इस अवसर पर राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास तथा डीएआरपीजी एवं पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा भी उपस्थित रहीं।
आईसीएमआर-माइंड्स परियोजना क्या है
आईसीएमआर-माइंड्स एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान प्राथमिकता परियोजना है, जिसका मूल उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत से जुड़ी समस्याओं की जांच तथा उपचार को अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की सेवाओं के साथ एकीकृत करना है। इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसका क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (सीडीएसएस) है, जो प्रशिक्षित फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की प्रत्यक्ष सहायता के बिना भी मानकीकृत तरीके से मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग, मूल्यांकन, फॉलो-अप और सामान्य उपचार करने में सक्षम बनाता है।
इस डिजिटल प्लेटफॉर्म में मानकीकृत स्क्रीनिंग एवं मूल्यांकन प्रक्रिया, भूमिका-आधारित क्लीनिकल मार्गदर्शन, ऑफलाइन सुविधा, बहुभाषी समर्थन, गेमिफाइड फीचर्स तथा रियल-टाइम प्रशासनिक डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं शामिल हैं। यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित डिजिटल निर्णय प्रणाली से संचालित होती है।
कंटिन्यूटी ऑफ केयर: विशेषज्ञता और पहुंच का संतुलन
परियोजना का कंटिन्यूटी ऑफ केयर मॉडल इसे और अधिक प्रभावशाली बनाता है। इसके तहत जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञों के पास रेफर किया जाता है और स्थिति सामान्य होने पर उन्हें फॉलो-अप उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर जटिल मामलों पर अधिक ध्यान दे पाते हैं, फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका सुदृढ़ होती है और बड़े अस्पतालों पर दबाव भी कम होता है।
सात राज्यों में सात संस्थान
यह परियोजना देश के सात राज्यों में सात प्रमुख संस्थानों के सहयोग से लागू की जा रही है — एम्स गुवाहाटी (असम), गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ (अहमदाबाद), एम्स नई दिल्ली, सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज (बेंगलुरु), एम्स भोपाल, एम्स भुवनेश्वर और पीजीआईएमईआर चंडीगढ़। परियोजना की सफलता में असम, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पंजाब के राज्य स्वास्थ्य विभागों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
आईसीएमआर की प्रतिबद्धता
इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि आईसीएमआर भविष्य में भी डेटा-आधारित तथा बड़े स्तर पर लागू की जा सकने वाली तकनीकों के माध्यम से देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सहभागी संस्थानों और राज्य स्वास्थ्य प्रणालियों के सहयोग से आईसीएमआर देशवासियों को किफायती, मानकीकृत और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्यरत रहेगा। यह पुरस्कार भारत में डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।