28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एआई आधारित रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल लॉन्च, ग्रामीण विकास में पारदर्शिता की नई पहल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एआई आधारित रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल लॉन्च, ग्रामीण विकास में पारदर्शिता की नई पहल

सारांश

ग्रामीण विकास में जवाबदेही की दिशा में केंद्र सरकार ने एक नई तकनीकी पहल की है — एआई आधारित रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल, जो बिखरी और कागज़ी ऑडिट व्यवस्था को डेटा-आधारित रियल-टाइम निगरानी में बदलने का दावा करता है। चंदौली से शुरू हुई यह पहल अब राष्ट्रव्यापी हो गई है।

मुख्य बातें

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 जून 2026 को नई दिल्ली के पूसा कैंपस में एआई आधारित रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल लॉन्च किया।
यह देश का पहला ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की संपूर्ण आंतरिक ऑडिट प्रक्रिया को एकीकृत करता है।
पोर्टल को ग्रामीण विकास मंत्रालय और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।
पायलट 1 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में शुरू हुआ; अक्टूबर 2025 से सभी प्रमुख मॉड्यूल पूरी तरह परिचालन में।
पोर्टल ऑडिट प्लानिंग से लेकर रियल-टाइम निगरानी तक की सभी प्रक्रियाओं को एक ही डिजिटल इकोसिस्टम में समेटता है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 जून 2026 को नई दिल्ली के पूसा कैंपस में आयोजित 'राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन' के दौरान देश के पहले एआई आधारित रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल का शुभारंभ किया। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में पारदर्शिता, जवाबदेही और टेक्नोलॉजी आधारित गवर्नेंस सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

पोर्टल की परिकल्पना और विकास

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस पोर्टल को नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के सहयोग से तैयार किया है। मुख्य नियंत्रक लेखा (सीसीए) के कार्यालय द्वारा परिकल्पित यह प्लेटफॉर्म जोखिम-आधारित और अनुपालन दोनों प्रकार के ऑडिट को एक ही डिजिटल इकोसिस्टम में संभालने में सक्षम है। मंत्रालय के अनुसार, यह पारंपरिक ऑडिट प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और बेहतर सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पोर्टल को विकसित करने से पूर्व मंत्रालय ने ऑडिटरों, विभिन्न कार्यक्रम प्रभागों, फील्ड अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया। इस व्यापक परामर्श प्रक्रिया ने प्लेटफॉर्म की व्यावहारिकता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।

पायलट से राष्ट्रव्यापी विस्तार तक

इस परियोजना का पायलट 1 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में शुरू किया गया था। पायलट के सफल क्रियान्वयन के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया गया। अक्टूबर 2025 से पोर्टल के सभी प्रमुख मॉड्यूल पूरी तरह परिचालन में आ गए। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ग्रामीण विकास योजनाओं में डिजिटल जवाबदेही को प्राथमिकता दे रही है।

पोर्टल की मुख्य विशेषताएँ

यह पोर्टल ऑडिट प्लानिंग, एग्जीक्यूशन, रिपोर्टिंग, अनुपालन प्रबंधन, निगरानी और विश्लेषण जैसी सभी प्रक्रियाओं को एकीकृत करता है। इसमें ऑडिट योजना, ऑडिट एंगेजमेंट की मंजूरी, ऑडिट टिप्पणियाँ, कार्रवाई रिपोर्ट, पैरा का निपटान और रिकॉर्ड का डिजिटल अभिलेखीकरण शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, पोर्टल से ऑडिट की प्रगति की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और अनुपालन प्रबंधन को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

किन समस्याओं का समाधान

गौरतलब है कि इससे पहले ऑडिट रिकॉर्ड अलग-अलग स्थानों पर बिखरे रहते थे, पत्राचार मैनुअल तरीके से होता था और रिपोर्ट तैयार करने में देरी होती थी। एक केंद्रीकृत रिपॉजिटरी के अभाव में बार-बार सामने आने वाली ऑडिट टिप्पणियों पर नजर रखना और समय के साथ जोखिमों का आकलन करना कठिन था। यह पोर्टल उन्हीं संरचनागत कमियों को दूर करने का प्रयास करता है।

आगे की राह

मंत्रालय के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म का लक्ष्य आंतरिक ऑडिट रिकॉर्ड का एक केंद्रीकृत भंडार तैयार करना, जोखिम-आधारित ऑडिट योजना को सक्षम बनाना और ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को स्वचालित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में धन के दुरुपयोग की पहचान और रोकथाम में सहायक सिद्ध हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती तकनीक नहीं, क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति है। चंदौली जैसे एकल जिले के पायलट से राष्ट्रव्यापी विस्तार तक की छलांग में जमीनी स्तर पर डिजिटल साक्षरता और नेटवर्क कनेक्टिविटी की बाधाएँ अनदेखी नहीं की जा सकतीं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ग्रामीण विकास योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतें दशकों पुरानी हैं — डिजिटल प्लेटफॉर्म तभी कारगर होगा जब डेटा की स्वतंत्र जाँच और परिणामों की सार्वजनिक रिपोर्टिंग का तंत्र भी साथ हो।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एआई आधारित रूरल इंटरनल ऑडिट पोर्टल क्या है?
यह ग्रामीण विकास मंत्रालय और एनआईसी द्वारा संयुक्त रूप से विकसित देश का पहला डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की संपूर्ण आंतरिक ऑडिट प्रक्रिया को एक ही इकोसिस्टम में एकीकृत करता है। इसमें ऑडिट प्लानिंग, रिपोर्टिंग, अनुपालन प्रबंधन और रियल-टाइम निगरानी शामिल है।
इस पोर्टल को किसने और कब लॉन्च किया?
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 जून 2026 को नई दिल्ली के पूसा कैंपस में आयोजित 'राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन' के दौरान इस पोर्टल को लॉन्च किया।
इस पोर्टल का पायलट कहाँ और कब शुरू हुआ था?
इस पोर्टल का पायलट 1 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में शुरू किया गया था। सफल परीक्षण के बाद अक्टूबर 2025 से इसके सभी प्रमुख मॉड्यूल पूरी तरह परिचालन में आ गए।
यह पोर्टल पारंपरिक ऑडिट प्रक्रिया से किस प्रकार अलग है?
पहले ऑडिट रिकॉर्ड अलग-अलग स्थानों पर बिखरे रहते थे और पत्राचार मैनुअल तरीके से होता था। यह पोर्टल उस बिखरी व्यवस्था को केंद्रीकृत डिजिटल भंडार में बदलता है, जोखिम-आधारित ऑडिट को सक्षम बनाता है और रियल-टाइम निगरानी की सुविधा देता है।
इस पोर्टल से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों पर क्या असर पड़ेगा?
मंत्रालय के अनुसार, यह पोर्टल ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएगा। ऑडिट रिपोर्ट स्वचालित रूप से तैयार होने और अनुपालन की रियल-टाइम निगरानी से धन के दुरुपयोग की पहचान और रोकथाम में मदद मिल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले