13 अगस्त 2026
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रांची विधानसभा घेराव: 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR, 100 नामजद; 14 पुलिसकर्मी घायल

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रांची विधानसभा घेराव: 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR, 100 नामजद; 14 पुलिसकर्मी घायल

सारांश

रांची में 10 अगस्त के विधानसभा घेराव के बाद पुलिस ने 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज की है — 100 नामजद, 500 अज्ञात। JPSC-JSSC पेपर लीक की CBI जांच की मांग कर रहे छात्रों पर यह झारखंड की सबसे बड़ी पुलिसिया कार्रवाइयों में से एक है।

मुख्य बातें

रांची के विधानसभा थाने में 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, जिसमें 100 नामजद और 500 अज्ञात आरोपी शामिल।
घटना 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान हुई; पुलिस ने आंसू गैस , पानी की बौछार और लाठीचार्ज किया।
झड़प में 14 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी घायल हुए।
पुलिस का दावा: करीब 10 प्रतिशत प्रदर्शनकारियों ने हिंसा भड़काई; बाहरी उपद्रवी भी शामिल थे।
अज्ञात आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी , ड्रोन फुटेज और फेस रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
छात्र JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

झारखंड की राजधानी रांची में 10 अगस्त को हुए विधानसभा घेराव के दौरान कथित हिंसा और हंगामे के मामले में पुलिस ने 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। विधानसभा थाने में दर्ज इस मामले में 100 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी मुकदमा कायम किया गया है। 13 अगस्त को की गई यह कार्रवाई झारखंड में छात्र आंदोलन के इतिहास की सबसे बड़ी पुलिसिया कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

प्राथमिकी में क्या-क्या आरोप

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बैरिकेड तोड़ने, पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी करने, सरकारी कामकाज में बाधा डालने तथा पुलिस बल पर पथराव करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। झड़प के दौरान 14 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल के जवान घायल हुए, जिन्हें चिकित्सा सहायता दी गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार की और लाठीचार्ज किया। पुलिस का दावा है कि घेराव में शामिल करीब 90 प्रतिशत छात्र शांतिपूर्ण थे, जबकि लगभग 10 प्रतिशत लोगों ने माहौल को उग्र बनाया।

बाहरी उपद्रवियों की भूमिका का दावा

पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि कुछ बाहरी उपद्रवी वाहनों से प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और हंगामे को भड़काने का प्रयास किया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। यह ऐसे समय में आया है जब छात्र संगठन पुलिस की कार्रवाई को दमनकारी बता रहे हैं।

तकनीक से होगी अज्ञात आरोपियों की पहचान

पुलिस अब नामजद आरोपियों के अलावा अज्ञात प्रदर्शनकारियों की शिनाख्त के लिए वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज और ड्रोन कैमरों से मिले फुटेज की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।

छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह विधानसभा घेराव झारखंड में जारी छात्र आंदोलन की कड़ी में था। छात्र JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की जांच CBI से कराने की मांग कर रहे हैं। 10 अगस्त को इन्हीं मांगों को लेकर विधानसभा घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

आगे क्या होगा

पुलिस की इस व्यापक कार्रवाई के बाद आंदोलनकारी छात्रों की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दलों का रुख महत्वपूर्ण होगा। फेस रिकॉग्निशन तकनीक के इस्तेमाल की घोषणा से नागरिक स्वतंत्रता और निजता के सवाल भी उठ सकते हैं। मामले की आगे की जांच और गिरफ्तारियों पर सबकी नजर बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही पुलिस इसे कानून-व्यवस्था की जरूरत बताए। फेस रिकॉग्निशन और AI तकनीक के इस्तेमाल की घोषणा नागरिक स्वतंत्रता के लिहाज से गंभीर सवाल उठाती है — खासकर तब, जब छात्रों की मूल मांग परीक्षा भ्रष्टाचार की जांच है, जो सरकारी जवाबदेही से जुड़ी है। JPSC-JSSC विवाद वर्षों से अनसुलझा है और इसमें सरकार की निष्क्रियता ही इस आंदोलन की असली वजह है। जब तक पेपर लीक की विश्वसनीय जांच नहीं होती, FIR से आंदोलन थमेगा नहीं — बल्कि और तेज हो सकता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची विधानसभा घेराव में FIR क्यों दर्ज की गई?
10 अगस्त को रांची में विधानसभा घेराव के दौरान कथित हिंसा, पथराव, बैरिकेड तोड़ने और पुलिसकर्मियों से बदसलूकी के आरोप में पुलिस ने 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज की। इस घटना में 14 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए।
झारखंड में छात्र किस बात को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं?
छात्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। यह आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और 10 अगस्त का विधानसभा घेराव इसी सिलसिले में था।
FIR में कितने लोग नामजद हैं और कितने अज्ञात हैं?
विधानसभा थाने में दर्ज FIR में 100 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। कुल 600 प्रदर्शनकारी इस FIR के दायरे में हैं।
पुलिस अज्ञात आरोपियों की पहचान कैसे करेगी?
पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वीडियोग्राफी और ड्रोन कैमरों की मदद से अज्ञात आरोपियों की शिनाख्त कर रही है। जरूरत पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।
घेराव के दौरान पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी?
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, पानी की बौछार की और लाठीचार्ज किया। पुलिस का दावा है कि करीब 10 प्रतिशत प्रदर्शनकारियों ने स्थिति को उग्र किया, जबकि बाहरी उपद्रवी भी वाहनों से मौके पर पहुंचे थे।
राष्ट्र प्रेस
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