एआई और ई-गवर्नेंस सुधारों से भारत के शासन का नया अध्याय: डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 13 जुलाई 2026 को शिलांग में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल प्लेटफॉर्म की बुनियाद पर शासन व्यवस्था के एक नए और निर्णायक चरण में कदम रख रहा है। यह सम्मेलन 'नेक्स्ट जेनरेशन एडमिनिस्ट्रेटिव एंड ई-गवर्नेंस रिफॉर्म्स' विषय पर प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) और मेघालय सरकार ने संयुक्त रूप से आयोजित किया।
एक दशक के सुधारों की समीक्षा
डॉ. सिंह ने पिछले एक दशक में हुए प्रशासनिक बदलावों का उल्लेख करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने करीब 2,000 अप्रासंगिक और पुराने नियमों को समाप्त किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नियामक भूमिका से आगे बढ़कर सुविधा प्रदाता की भूमिका अपनाई है, जिसमें नीति निर्माण से लेकर सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी तक नागरिकों को केंद्र में रखा गया है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत
मंत्री ने बताया कि 56 करोड़ से अधिक जनधन खाते, आधार-आधारित सेवाएँ, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने सरकार और नागरिकों के बीच के संबंध को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने रेखांकित किया कि आज यूपीआई प्रतिमाह 18 अरब से अधिक डिजिटल लेनदेन संसाधित करता है, जिससे भारत वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में अग्रणी स्थान पर है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई विकसित देश भी इतनी बड़ी मात्रा में रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन की प्रणाली विकसित करने में जुटे हैं।
शिकायत निवारण में एआई का उपयोग
डॉ. सिंह ने बताया कि डीएआरपीजी ने केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस) को विश्व के सबसे बड़े तकनीक-संचालित शिकायत निवारण मंचों में से एक में रूपांतरित कर दिया है। उन्होंने बताया कि जहाँ 2014 में सालाना लगभग 2 लाख शिकायतें दर्ज होती थीं, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25 लाख से अधिक हो गई है। गौरतलब है कि इस प्लेटफॉर्म में अब बहुभाषी एआई चैटबॉट की सुविधा जोड़ी गई है, जबकि अंतिम चरण में मानवीय हस्तक्षेप बनाए रखा गया है ताकि संवेदनशीलता सुनिश्चित हो सके।
विशेष अभियान और राजस्व लाभ
मंत्री ने लंबित मामलों के निपटान और स्वच्छता के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान की उपलब्धियाँ भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि अप्रचलित सामग्री और कबाड़ के वैज्ञानिक निस्तारण से अब तक ₹4,000 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों में लगभग 700 लाख वर्गफुट जगह खाली कराई गई है, जिससे कार्यालयों की कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार आया है।
आगे की राह
डॉ. सिंह के अनुसार, भविष्य के प्रशासनिक सुधारों में एआई, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक-केंद्रित सेवा प्लेटफॉर्म को प्राथमिकता दी जाएगी। यह सम्मेलन राज्य सरकारों के साथ मिलकर ई-गवर्नेंस के अगले स्तर की रूपरेखा तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।